आपातकाल की याद -जब अंबिका सोनी ने गिरफ्तार कराया पत्रकार को

आपातकाल की याद - 3

(समकालीन तीसरी दुनिया, जून 2011 से)

1 नवंबर 1975 को 21वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के प्रतिनिधियों का नागरिक अभिनंदन लाल किले के दीवान-ए-आम में शाम को 7 बजे आयोजित किया गया था।

इस समारोह की रिपोर्टिंग के लिए ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ के रिपोर्टर वीरेन्द्र कपूर को जिम्मेदारी सौंपी गयी थी।

समारोह के समाप्त होने के बाद युवकों के एक समूह ने नारे लगाए और हवा में पर्चें फेंके। तुरत ही पुलिस ने पहुंच कर वहां उन युवकों को गिरफ्तार कर लिया।

वीरेन्द्र कपूर ने देखा कि एक युवक की कलाई को एक महिला ने कस कर पकड़ लिया है और इस महिला के बारे में उन्हें बाद में पता चला कि वह अंबिका सोनी हैं।

वीरेन्द्र कपूर ने बताया कि उन्होंने अंबिका सोनी से कहा कि ‘लोगों को गिरफ्तार करने का काम आप पुलिस पर छोड़ दीजिए।’

कपूर ने बताया कि अंबिका सोनी के साथ उनको बहस करते देख तत्कालीन एसपी (सीआईडी) के. एस. बाजवा वहां दौड़ते हुए पहुंचे और श्रीमती सोनी से बातचीत करने के बाद पुलिस वालों को आदेश दिया कि वे कपूर को गिरफ्तार कर लें। उन्हें गेट के बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ी तक ले जाया गया।

कपूर का कहना है कि इस बीच शायद अंबिका सोनी को जानकारी मिली कि मैं एक पत्रकार हूं और फिर वह मेरे पास आयीं और आकर मुझसे कहा कि

‘क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि उस लड़के को गिरफ्तार कराने में आपको मेरी मदद करनी चाहिए थी न कि मुझे रोकना चाहिए था?’

वीरेन्द्र कपूर को लगा कि यह महिला मुझसे चाहती है कि मैं खेद व्यक्त करूं और उन्होंने कहा कि

‘मैं अभी भी मानता हूं कि जब भारी संख्या में यहां पुलिस तैनात है तो आपको इससे कोई सरोकार नहीं होना चाहिए।’

वीरेन्द्र कपूर ने बताया कि यह सुनकर अंबिका सोनी ने कहा-

‘ठीक है फिर जाओ बंद रहो।’

वीरेन्द्र कपूर को कोतवाली पुलिस स्टेशन ले जाया गया और फिर जेल भेज दिया गया।

(स्रोत: शाह आयोग की रिपोर्ट)

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