अपने मामूली हित साधन के लिए आप और भाजपा लोकशाही की महत्वपूर्ण संस्था को तबाह कर रहे

नौकरशाही को जनहित में इस्तेमाल करना आज के नेताओं के लिए बहुत जरूरी है लेकिन उनका अपमान करने का अधिकार उनको नहीं है।...

हाइलाइट्स

अब कोशिश यह हो रही है कि पानी को इतना गन्दला कर दिया जाए कि सच्चाई कहीं बहुत नीचे दब जाए।

यह जनहित में है और राष्ट्रहित में है कि नौकरशाही को तबाह न किया जाए क्योंकि यह हमारी आजादी की लड़ाई के महान कारीगर, सरदार वल्लभ भाई पटेल की विरासत है

शेष नारायण सिंह

दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव ने पुलिस में शिकायत की है कि उनको दिल्ली राज्य के कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के सामने अपमानित किया और मारा पीटा। बताया गया है कि उनको देर रात को मुख्यमंत्री आवास पर किसी काम से बुलाया गया था और मतभेद होने के बाद विधायकों ने उनके साथ धक्का- मुक्की की। आम आदमी पार्टी के नेता और प्रवक्ता विधायकों को निर्दोष बता रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने बाकायदा प्रेस कान्फ्रेंस करके बताया कि सब बीजेपी की चाल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के मुख्य सचिव झूठ बोल रहे हैं। उनके साथ कोई मारपीट नहीं हुई। उनकी डॉक्टरी जांच में जिन चोटों के सबूत हैं, वे हेराफेरी करके लिखवाये गए हैं। जब उनसे पूछा जाता है कि जिस अस्पताल में उनकी डॉक्टरी जांच हुई थी वह दिल्ली सरकार का सरकारी अस्पताल है तो क्या अपनी सरकार के ही डॉक्टरों पर उन लोगों को भरोसा नहीं है। इसका कोई जवाब नहीं आता। वे बताने लगते हैं कि दिल्ली में लोगों को राशन नहीं मिल रहा है और मुख्य सचिव कोई भी काम नहीं कर रहे हैं।

आम आदमी पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्य सचिव के पत्र पर जिन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई हुई है वे दलित और मुसलमान हैं। इस तरह गृह मंत्रालय ने भेदभावपूर्ण तरीके से काम किया है।

बहरहाल अब कोशिश यह हो रही है कि पानी को इतना गन्दला कर दिया जाए कि सच्चाई कहीं बहुत नीचे दब जाए।

इस बीच खबर है कि दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने गृहमंत्रालय के पास दिल्ली सरकार की मौजूदा स्थिति के बारे में रिपोर्ट भी दी है।

मुख्य सचिव के साथ हुई वारदात में जो आपराधिक कार्य है उसके बारे में तो दिल्ली पुलिस जांच कर रही है जबकि आईएएस अधिकारी के साथ हुई मारपीट और अफसरों के काम कर सकने के माहौल से सम्बंधित हालात की जांच गृहमंत्रालय करेगा।

उपराज्यपाल की रिपोर्ट में अगर संवैधानिक मशीनरी के ब्रेक डाउन की बात कही गई होगी तो केंद्र सरकार के पास निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करने के अधिकार हैं। इस बात की सम्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि केंद्र की सरकार यह कदम उठा भी सकती है। पूरे देश में जीत रही भारतीय जनता पार्टी के लिए यह बहुत मुश्किल हालत है कि दिल्ली में ही उनकी पार्टी बुरी तरह से हार गई है। यह बीजेपी के नेताओं की दुखती रग है... आम आदमी पार्टी को नीचा दिखाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। अरविन्द केजरीवाल और उनकी सरकार ने उनको मौका भी दे दिया है। जहां तक केंद्र की बीजेपी सरकार का अब तक का रिकार्ड है, उससे तो बिल्कुल साफ है कि वह आम आदमी पार्टी को परेशान करने का कोई भी अवसर छोड़ने वाली नहीं है।

आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की आपसी तकरार में सरकार का एक बहुत ही मजबूत स्तम्भ दांव पर लग गया है। आम आदमी पार्टी और उसकी सरकार का आरोप है कि बीजेपी, केंद्र सरकार और नौकरशाही के जरिये जनता द्वारा चुनी हुई सरकार पर नकेल कस रही है जबकि बीजेपी के नेता कहते हैं कि अपना काम ठीक से न कर पाने के कारण अरविन्द केजरीवाल अपनी नाकामी को ढंकने के लिए बहाना ढूंढते रहते हैं इसलिए यह सारी कारस्तानी की गई है। ऐसा लगता है कि इन लोगों को मालूम नहीं है कि अपने मामूली हित साधन के लिए दोनों ही पार्टियां लोकशाही की एक ऐसी संस्था को तबाह कर रहे हैं जिसका विधायिका के फैसलों को लागू करने में बहुत अधिक योगदान है। इनके काम से सिविल सर्विस की अथारिटी कमजोर हो रही है।

अक्सर देखा गया है कि मुकामी प्रशासन में नेता लोग अफसरों से बहुत नाराज रहते हैं लेकिन जब उन्हीं नेताओं के पास सरकार का काम आ जाता है तो उनको सरकार चलाने के लिए जिस मशीनरी की जरूरत है, उससे नाराज रहने का विकल्प खत्म हो जाता है। उनको सिविल सर्विस को साथ लेकर चलना पड़ता है। जो साथ लेकर चलते हैं वे सफल हो जाते हैं। लेकिन आजकल तो सिविल सर्विस को बिलकुल रीढ़विहीन बना देने का एक तरह से अभियान ही चल रहा है। हर प्रदेश से खबरें आ रही हैं कि नेताओं ने बड़े अफसरों के साथ मारपीट की लेकिन मुख्यमंत्री के कमरे में उनकी मौजूदगी में राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी के पिटने की यह पहली घटना है। अगर सही और कारगर कदम उठाकर इस नुकसान को तुरंत से ही काबू न कर लिया गया तो इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि आगे भी ऐसी घटनाएं होंगीं। यह जनहित में है और राष्ट्रहित में है कि नौकरशाही को तबाह न किया जाए क्योंकि यह हमारी आजादी की लड़ाई के महान कारीगर, सरदार वल्लभ भाई पटेल की विरासत है।

1947 में जब देश आजाद हुआ तो उस आजादी को मजबूत करने का काम सरदार पटेल ने किया। आजादी की लड़ाई में उनका योगदान महात्मा गांधी के बाद सबसे ज़्यादा है। महात्मा गांधी ही वास्तव में आजादी की लड़ाई के नेता थे। उनके सारे कार्यक्रमों को संगठित करने का जिम्मा सरदार पटेल का ही रहता था। महात्मा गांधी को सरदार पटेल पर बहुत भरोसा था। यह भरोसा 1925 के बाद और भी मजबूत हो गया जब 1925 में गांधी जी, बेलगाम में हुए कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष बने। उस अधिवेशन की स्वागत समिति के अध्यक्ष सरदार पटेल थे।

सरदार ने जिस तरह से अधिवेशन की व्यवस्था की उसके बाद महात्मा गांधी को पक्का भरोसा हो गया कि सरदार पटेल में अद्भुत संगठन क्षमता है। इसी का नतीजा था कि बाद के गांधी जी के बाम्बे प्रेसिडेंसी में हुए कार्यक्रम की व्यवस्था सरदार ने ही की। बाद में उन्होंने देश की एकजुटता के लिए जो काम किया वह दुनिया भर में आदर्श है। आजादी को जिस तरह से सरदार पटेल ने समेकित किया वह दुनिया भर में कहीं देखने को नहीं मिलता। लेनिन, माओ, फिदेल कास्त्रो, नेल्सन मंडेला आदि ने भी अपनी-अपनी आजादी के लिए लड़ाई की अगुवाई की थी लेकिन उसको विधिवत समेकित करने काम और लोगों ने किया।

भारत की आजादी की लड़ाई में सरदार पटेल सबसे अगली कतार में थे लेकिन आज़ादी मिलने के बाद उन्होंने आराम नहीं किया। वे गृह मंत्रालय के अलावा सूचना और प्रसारण मंत्रालय का काम भी देखते थे। देशी राज्यों के एकीकरण का काम तो था ही। आजादी के साथ-साथ ही देश में भारी अराजकता आ गई थी। हर जगह दंगे हो रहे थे। जंगल राज का माहौल था। ऐसी मुश्किल हालात में सरदार पटेल ने पूरे देश में कानून का राज कायम किया। यह बहुत ही कठिन काम था। इसको सफल बनाने में उन्होंने ब्रिटिश राज की मशीनरी का ही उपयोग किया। उन्होंने आईसीएस अफसरों को भरोसा दिला दिया कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी उनकी सेवाएं सुरक्षित हैं। बस फर्क यह पड़ा है कि पहले वे शासन करते थे अब सेवा करना होगा। इस तरह सरदार पटेल ने अंग्रेज राज को चलाने के सबसे मदबूत स्तम्भ को अपना बना लिया। आज की नौकरशाही, उसी आईसीएस की वारिस है। और यह देश को सुचारु रूप से संचालन के लिए सरदार पटेल की विरासत है।

नौकरशाही को जनहित में इस्तेमाल करना आज के नेताओं के लिए बहुत रूरी है लेकिन उनका अपमान करने का अधिकार उनको नहीं है।

जब देश के नेता आजादी के जश्न मना रहे थे सरदार पटेल अपने काम में जुट गए थे। वे बहुत ही दूरदर्शी थे। उन्होंने साफ देख लिया कि एक मजबूत सिविल सर्विस बहुत जरूरी है। अक्टूबर 1949 में संविधान सभा के अपने भाषण में सरदार पटेल ने इस बात को जोर देकर कहा भी था।

उन्होंने कहा कि, 'अगर आपके पास अखिल भारतीय सेवा के अफसरों की ऐसी जमात नहीं है जो बेझिझक अपनी बात को कह सकें तो आप एकजुट भारत नहीं रख पायेंगे।'

उन दिनों आईसीएस को स्टील फ्रेम कहा जाता था। आईसीएस को स्टील फ्रेम नाम 1922 में ब्रिटिश संसद में दिए गए लायड जार्ज के एक भाषण के बाद दिया गया। उन्होंने कहा था, 'अगर आप कपड़े के ताने-बाने से स्टील फ्रेम को अलग कर दें तो वह गिर जाएगा। एक संस्था ऐसी है जिसको हम लुंज-पुंज नहीं कर सकते, यह एक ऐसी संस्था है जिसको हम काम करने के उसके विशेषाधिकार से मुक्त नहीं कर सकते। वही संस्था जिसने भारत में ब्रिटिश राज को बनाया है और वह संस्था है, भारत की सिविल सर्विस।'

सरदार पटेल को यह मालूम था और उनकी भी इच्छा थी कि राष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह की सर्विस की स्थापना की जाए... सरदार पटेल ने अपनी यह इच्छा महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू को भी बताया था और उनको दोनों ही नेताओं का पूरा समर्थन मिला। इसके बाद ही सरदार पटेल ने आईसीएस को सुरक्षा की गारंटी दी और भारतीय प्रशासनिक सेवा की बुनियाद रखी।

सरदार पटेल के इन प्रस्तावों को जबरदस्त विरोध का सामना भी करना पड़ा लेकिन सरदार पटेल की सुविचारित नीति का विरोध धीरे-धीरे खत्म हो गया। सरदार पटेल ने कोई जोर जबरदस्ती नहीं की। लोगों को समझा बुझाकर उन्होंने उस वक्त के आईसीएस को तब तक बचाए रखने की सरकारी गारंटी दे दी जब तक वे अफसर रिटायर नहीं हो जाते।

साथ-साथ ही अपनी नई अखिल भारतीय सेवा की बुनियाद डाल दी। सरदार पटेल की मृत्यु 1950 में ही हो गई थी लेकिन तब तक आल इण्डिया सर्विसेज एक्ट 1951 को अंतिम रूप दिया जा चुका था और उसी की बुनियाद पर आज का आईएएस बनाया गया है। देश को एक रखने में और राजनीतिक इच्छा को कार्यरूप देने में सिविल सर्विस का बहुत ही अधिक योगदान है। इसलिए उसको अपमानित करना या उसके हौसले पस्त करना न देशहित में है और न जनहित में है। दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री को चाहिए कि अब तक उनके विधायकों ने इतनी महत्वपूर्ण संस्था का जो नुकसान किया उसको जल्द से जल्द संभालने की कोशिश शुरू कर दें।

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