मारे जाने वाले लोगों के लिए सबसे पहले संवेदना और सहानुभूति हत्यारे ही व्यक्त करते हैं

सांकेतिक मौकापरस्त विरोध संघ परिवार का और कारपोरेट राज में हिस्सेदारी, पूंजीवादी विकल्प है और देश को एक गैस चैंबर से निकालकर दूसरे गैस चैंबर में धकेलकर अपनी अपनी रोटी सेंकने का पुख्ता इंतजाम है।

पलाश विश्वास
Updated on : 2018-05-25 23:42:37

पलाश विश्वास

जनविरोधी सत्तालोलुप क्षत्रपों के इस मौकापरस्त गठबंधन में मनुष्य और प्रकृति का भविष्य देखने वाले विद्वतजनों की दृष्टि, प्रतिबद्धता, इतिहासबोध की बलिहारी। इन चेहरों में से किसी ने कभी कारपोरेट राज, मुक्त बाजार, आर्थिक सुधार, संविधान और लोकतंत्र की हत्या, आधार परियोजना या सत्तावर्ग के नरसंहारी अश्वमेध अभियान का विरोध किया हो, मुझे मालूम नहीं है। ये तमाम रंग बिरंगे चेहरे कुलीन सत्ता जाति वर्चस्व के मनुस्मृति निरंकुश सत्ता के चेहरे हैं।

भारतीय जनता के खिलाफ कारपोरेट राष्ट्र के महायुद्ध के ये भी सिपाहसालार हैं। सत्ता समीकरण से समता और न्याय का लोकतंत्र और समाज का निर्माण असंभव है।

सांकेतिक मौकापरस्त विरोध संघ परिवार का और कारपोरेट राज में हिस्सेदारी, पूंजीवादी विकल्प है और देश को एक गैस चैंबर से निकालकर दूसरे गैस चैंबर में धकेलकर अपनी अपनी रोटी सेंकने का पुख्ता इंतजाम है। जनता और जमीन से कटे क्रांतिकारियों का यही पूंजी पोषित क्रांति उपक्रम है और पल्लाभारी होते ही गिरगिट की तरह सत्ता और बाजार की सारी ताकतें एकजुट हो जायेंगी विचारधारा और नैतिकता को तिलांजलि देकर। बदलाव के नाम पर 1967 से यह सिलसिला लगातार जारी है और लगातार जनपदों, किसानों, कामगारों, आम लोगों के खिलाफ हमले तेज होते गये हैं और दिल्ली की सत्ता निरंकुश होकर जनपदों को कुचलती रही है।

विकास के नाम महाविनाश, मनुष्य और प्रकृति का सर्वनाश, आपदाओं का सृजन और अर्थव्यवस्था, उत्पादन प्रणाली का विध्वंस, कारपोरेट घरानों की फंडिंग से चलने वाली भारतीय राजनीति के विकास का माडल है। इसको बदलने के लिए जमीन पर जो सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलन प्रतिरोध होना चाहिए, उसकी कोई कोशिश किये बिना सत्ता परिवर्तन से बंगला के बुद्धिजीवियों की तर्ज पर पाला बदलने की तैयारी में हैं सत्ता संरक्षण में खाये, अघाये, मुटियाये, चर्बीदार पढ़े लिखे लोग।

मारे जाने वाले लोगों के लिए सबसे पहले संवेदना और सहानुभूति हत्यारे ही व्यक्त करते हैं और अंत्येष्टि की रस्म अदायगी शास्त्रीय विधान से करने का हमारा अखंड राष्ट्रवाद है।

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