बाल नरेंद्र वाकई बहुत छोटे हो तुम ! सिर्फ संघपूत हो, जो भारत के कपूत परंपरा के सिरमौर हैं

नेहरू का मूल्याङ्कन इतिहास संघियों के शाखा ज्ञान से तो नहीं करेगा। हाँ, ये जरूर पता चला कि डिग्री वाकई फर्जी है !...

अतिथि लेखक

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

सुना है किसी ने आज सदन में सूरज की ओर मुहं करके थूका था। नेहरू का मूल्याङ्कन इतिहास संघियों के शाखा ज्ञान से तो नहीं करेगा। हाँ, ये जरूर पता चला कि डिग्री वाकई फर्जी है !

बहुत छोटे हो तुम !

तुम उस भारतीय महिला पीएम इन्दिरा गांधी के जन्म दिन और बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि नहीं दे सके जिसने तुम्हारे सर्जिकल स्ट्राइक के झुनझुने से लाखों गुना पराक्रम दिखा कर पाकिस्तान को जरासंध की गति प्रदान की थी। तुम उस नेहरू को अपमानित करने से बाज नहीं आये जिसे देश और दुनिया राष्ट्र-निर्माता के तौर पर जानती है और जानती रहेगी। वाकई तुम सिर्फ संघपूत हो जो भारत के कपूत परंपरा के सिरमौर हैं।

सरदार पटेल के साथ भी नहीं थे, सुभाष के साथ भी नहीं थे, भगत सिंह के साथ भी नहीं थे, तो आप और आपके पूर्वज संघी थे किसके साथ ? गांधी-नेहरू के कद को घटाने के लिए इन महापुरुषों के नाम से मिथ्या बातें कहने वाले आप आरएसएस के लोग तब इनमें से किसी के भी साथ क्यों नहीं थे ?

उन्हें नेहरू मंजूर नहीं है,

यह बात खुद में नेहरू की तारीफ है। मैं समझता हूँ कि नेहरू जी के प्रति संघ का द्वेष खुद नेहरू जी की प्रामाणिकता है। हर पढ़े लिखे शख्स को, चाहे डॉक्टर हो या इंजिनियर या वैज्ञानिक या कुछ और, नेहरू के जीवन के बारे में जानना चाहिए। नेहरू जी की लिखी किताबें पढ़नी चाहिए।

(मधुवन दत्त चतुर्वेदी की फेसबुक टिप्पणियों का समुच्चय)

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