कल का भारत बन्द दलित राजनीति की नवचेतना कहा जा सकता है, मायावती चूक गईं, भीम आर्मी लोकप्रिय हुई

संघी दलितों पर आप चुप हैं ? और सवर्णों को गाली देकर कल की हिंसा को जायज ठहरा रहे हैं ?...

संघी दलितों पर आप चुप हैं ? और सवर्णों को गाली देकर कल की हिंसा को जायज ठहरा रहे हैं ?

उमाशंकर सिंह परमार

वाम संगठनों के सवर्ण कल के भारत बन्द में थे। उन्हें जाति से मतलब नहीं है, वह शोषण की ऐतिहासिक दृष्टि लेकर चलते हैं, इसलिए कोई भी प्रतिरोध हो वह "जाति" और "धर्म" नहीं देखते। कुछ शहरों में तो वाम संगठन ही नेतृत्व कर रहे थे। मगर मायावती इस आन्दोलन में नहीं थीं। न ही उदितराज और रामदास अठावले, पासवान आदि का बयान आया है। इन संघी दलितों पर आप चुप हैं ? और सवर्णों को गाली देकर कल की हिंसा को जायज ठहरा रहे हैं ? आन्दोलन जाति से नही विचारधारा से चलते हैं।तभी जनता की सहानुभूति होती है भागीदारी होती है। कल के इस आन्दोलन का जिस तरह से मूल्यांकन किया जा रहा है वह इस आन्दोलन को बीजेपी के पक्ष मे करने के अपराधी हैं।

आप सवर्णों द्वारा दी गयी पुरा व्यवस्था की आलोचना करते हैं, मैं भी करता हूँ। आप जब अपने अधिकारों के लिए सड़क में निकलते हैं, तो मैं भी निकलता हूँ। आप जब आरक्षण पर तर्क देते हैं, मैं भी आपके पक्ष में होता हूँ। आपके साथ मनुस्मृति को जलाता हूँ। आपने भारत बन्द किया, आपके पेटेन्ट राजनैतिक ठेकेदार बाहर रहे, दूर रहे लेकिन मैं और मेरे दल के संगठन आपके साथ थे।

लेकिन साथी जब आप हर बयान में केवल और केवल सवर्णों को गाली देते हैं, आप जब प्रगतिशील सवर्णों और भाजपाई सवर्णों को एक ही लाठी से हाँकने लगते हैं। जब आप हिंसा को जायज ठहराने के लिए संघी मानसिकता और तर्क का सहारा लेते हैं। जब आप विचारधारा और व्यक्ति की गरीबी आर्थिक दशा उसके शोषण को धकिया कर जाति के आधार पर गलीच मानने लगते हैं, तब म़ुझे शंका होने लगती है कि तुम भी वहीं से संचालित हो जहाँ से बीजेपी।

कल का भारतबन्द दलित राजनीति की नवचेतना कहा जा सकता है। मायावती चूक गयीं। भीम आर्मी लोकप्रिय हुई ... अब बसपा और कांग्रेस आपस मे दलित वोटों के लिए लड़ेंगीं। भीम आर्मी यदि कांग्रेस का समर्थन करती है तो मायावती पासवान आदि की विदाई तय है। और भाजपा खुश है कि उसका जातीय सवर्ण और श्रेष्ठ ओबीसी, जो आदतों से सवर्ण है उसके पक्ष में एकजुट हो जाएगें।

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