अगस्त में बच्चे मरते हैं तो क्या, बुलेट ट्रेन तो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है

जीएसटी पहिए के आविष्कार के बाद की सबसे बड़ी क्रान्ति है। इसने हर छोटीमोटी चीज को बेशकीमती बना दिया है! इस 'बेशकीमतीकरण' को मंहगाई बताने वाले पिछड़े हुए लोग हैं। ...

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हाइलाइट्स

जीएसटी पहिए के आविष्कार के बाद की सबसे बड़ी क्रान्ति है। इसने हर छोटीमोटी चीज को बेशकीमती बना दिया है! इस 'बेशकीमतीकरण' को मंहगाई बताने वाले पिछड़े हुए लोग हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोग कम खाएंगे, गम खाएंगे और देश के लिए बलिदान की भावना को मजबूत बनाएंगे।

आशुतोष कुमार

बुलेट ट्रेन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

ऐतिहासिक उपलब्धियां सस्ते में नहीं मिलतीं। शिक्षा और स्वास्थ्य के कुल बजट से ज़्यादा बुलेट पर खर्च करने के लिए जिगरा चाहिए। वो भी उस दौर में जब हस्पतालों में आक्सीजन वगैरह की कमी से कुछ हजार बच्चों के अगस्त में मरने का मीडिया वाले इतना ढोल पीट रहे हों।

सरकारी स्कूलों में छप्पर नहीं हैं तो निजी स्कूलों में जाने से कौन रोक रहा है। राजस्थान ने राह दिखाई है। वहाँ सरकारी स्कूल ही खत्म किए जा रहे हैं। धीरे- धीरे सरकारी हस्पताल भी खत्म हो जाएंगे। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी।

निजी स्कूल और हस्पताल कत्लगाह नहीं हो गए हैं। जो बम्पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं, वो क्या देश के काम नहीं आएगा? मरना - जीना भगवान के हाथ में है। लेकिन बुलेट ट्रेन चलाना तो हमारे हाथ में है।

कच्चे तेल की सस्ती के जमाने में पेट्रोल और डीजल को मंहगे से मंहगा करते जाने के लिए दूरदर्शिता चाहिए। पिछले जमाने में पेट्रोल को मिट्टी के मोल बेचकर पर्यावरण का जो कबाड़ा किया गया है, वो क्या दिखाई नहीं दे रहा? मंहगा पेट्रोल न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखने के काम आता है, बल्कि बज़रिए नोटबंदी भ्रष्टाचार का समूल विनाश करने के लिए जनता ने जीडीपी और रोजगार के दर की जो महान कुर्बानी दी है, उसे भी कुछ सम्हालने के काम आता है।

जीएसटी पहिए के आविष्कार के बाद की सबसे बड़ी क्रान्ति है। इसने हर छोटीमोटी चीज को बेशकीमती बना दिया है! इस 'बेशकीमतीकरण' को मंहगाई बताने वाले पिछड़े हुए लोग हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोग कम खाएंगे, गम खाएंगे और देश के लिए बलिदान की भावना को मजबूत बनाएंगे।

देश के रखवाले आपको कितना कुछ दे रहे हैं, देख लीजिए। और आप हैं कि एक ठो वोट देने में जान जा रही है। बताइए नोटा को दे देते हैं, मगर देश-भक्तों को नहीं देते। इस बदमाशी का क्या इलाज़ है?

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