क्या रामचंद्र गुहा कांग्रेस को दंगाई पार्टी समझते हैं ! लेकिन दंगों में तो शामिल थे संघी-भाजपाई, देखें सुबूत

सिख-विरोधी दंगों के बारे में जो एफआईआर लिखाये गये उनमें बड़ी संख्या में भाजपा के लोगों के भी नाम थे। अटलबिहारी वाजपेयी के एक चुनाव-एजेंट रामकुमार जैन का नाम भी एक एफआइआर (FIR 312/15 dt. 18.6.1992) में...

क्या रामचंद्र गुहा कांग्रेस को दंगाई पार्टी समझते हैं ! लेकिन दंगों में तो शामिल थे संघी-भाजपाई, देखें सुबूत

Sikh riots BJP Names figure in records Hindustan Times February 02, 2002

-अरुण माहेश्वरी

कुछ लोग अपनी जानकारी के बल पर 1984 के बारे में लंदन में कही गयी राहुल की बातों को काटने के लिये मचल उठे हैं। इनमें इतिहासकार रामचंद्र गुहा भी शामिल हैं।

इस बारे में हम यही कहेंगे कि उनकी जानकारी उतनी ही है जितनी दूर तक तब उनकी नजर पड़ी थी। अन्य तथ्य दूसरी सचाई भी बयान करते हैं। यह भी विचार का एक पहलू है कि सिख-विरोधी दंगों के बारे में जो एफआईआर लिखाये गये उनमें बड़ी संख्या में भाजपा के लोगों के भी नाम थे।

इस विषय पर श्री ओम थानवी ने हमें तब के ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक क्लिपिंग भेजी है। हिंदुस्तान टाइम्स (2-2-2002) की इस क्लिपिंग से जहां यह पता चलता है कि कांग्रेस के कुछ नेता इन दंगों में शामिल पाये गये थे, वही यह भी जाहिर होता है चौरासी के दंगों में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी कई कार्यकर्ता शरीक थे। खालिस्तान नाम से अलग सिख देश बनाने की माँग से ये लोग पहले से क्रुद्ध थे।

ओम थानवी जी ने यह भी बताया है कि “दंगों में आहत-हताहत मामलों की गवाहियों की जाँच के लिए दिल्ली शासन ने जस्टिस जैन-अग्रवाल की एक समिति गठित की थी। उस समिति (जिसकी रिपोर्ट कुछ साल पहले दिल्ली सरकार से मैंने किसी तरह जुटाई थी) की अनुशंसा पर भाजपा और संघ के 49 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ 14 मुक़दमे दर्ज किए गए। ज़्यादातर मुक़दमे श्रीनिवासपुरी थाने में दर्ज हुए।

दंगों के सिलसिले में गिरफ़्तार भाजपा-संघ के अनेक कार्यकर्ताओं के नाम उक्त ख़बर में मिलेंगे। ...हाल में चल बसे अटलबिहारी वाजपेयी के एक चुनाव-एजेंट रामकुमार जैन का नाम भी एक एफआइआर (FIR 312/15 dt. 18.6.1992) में था।

ओम जी लिखते हैं कि “कहने का मतलब यह कि चौरासी के दंगे मूलतः हिंदू-सिख हिंसा थे। उसमें कांग्रेस के कार्यकर्ता तो शामिल थे ही, भाजपा-संघ के भी जुट गए थे। वहशी दौर था।”

इस विषय में हम राहुल गांधी से पूरी तरह सहमत होते हुए यह और जोड़ना चाहेंगे कि कांग्रेस पार्टी की विचारधारा या कार्यपद्धति में दंगा नाम की चीज का कोई स्थान नहीं है, जबकि इसके विपरीत आरएसएस दंगों को, भारत में मुस्लिम बस्तियों को उजाड़ना अपना पवित्र कर्त्तव्य मानता है। उसके नेताओं ने लिखा है कि भारत में मुस्लिम बस्तियां मिनी पाकिस्तान हैं और पाकिस्तान अब तक भी कोई तयशुदा मामला नहीं है।

इसलिये यह कहना पूरी तरह से सही नहीं है कि कोई भी पार्टी आदेश जारी करके दंगों में शामिल नहीं होती है। आरएसएस और उसके दूसरे संगठन बाकायदा निर्णय लेकर दंगों में शामिल होते रहे हैं। 2002 का गुजरात दंगा तो इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। आरएसएस वालों की सैद्धांतिक दीक्षा में यह सब शामिल है। आरएसएस पर मेरी किताब में इस बारे में उनके नेताओं के महान वचनों को बाकायदा उद्धृत किया गया है।

इसीलिये राहुल गांधी का यह कहना सही है कि कांग्रेस पार्टी ने निर्णय लेकर 1984 का दंगा नहीं कराया था जैसा कि संघ परिवार वाले अक्सर किया करते हैं।

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