द्वैराचार का पर्याय है आरएसएस : मोदी का मन विदेशों में ही रमता है, और बात राष्ट्र भक्ति की करते हैं

आरएसएस के तथाकथित आर्थिक और मजदूर संगठनों ने फ्लिपकार्ट को ख़रीदने के वॉलमार्ट के सौदे को ग़ैर-क़ानूनी बताते हुए इसका विरोध किया है। कोई उनसे पूछे कि वे किस तर्क पर और किस मुँह से यह विरोध कर रहे हैं ...

अरुण माहेश्वरी

आरएसएस के तथाकथित आर्थिक और मजदूर संगठनों ने फ्लिपकार्ट को ख़रीदने के वॉलमार्ट के सौदे को ग़ैर-क़ानूनी बताते हुए इसका विरोध किया है। कोई उनसे पूछे कि वे किस तर्क पर और किस मुँह से यह विरोध कर रहे हैं ?

उनका कहना है कि ईकामर्स के सारे मंच अभी नुक़सान उठा कर भी बाजार पर क़ब्ज़ा करने के मंच बने हुए हैं। Cash burning model। वे कहते हैं कि इनका उद्देश्य भारत के उपभोक्ताओं के बारे में सारे तथ्यों (डाटा) को चुराने और भारत के बाजार के सभी परंपरागत खिलाड़ियों को नष्ट करके उस पर स्थाई रूप से अपना क़ब्ज़ा जमाने का हैं !

यही वे सभी संगठन है जो नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के तुगलकी कदम, रिटेल में विदेशी निवेश को बढ़ा कर सौ फ़ीसदी तक ले जाने और अन्य सभी क्षेत्रों में विदेशी निवेश को पूरी तरह से खोल देने का समर्थन करते रहे हैं। खुद नरेंद्र मोदी ‘नुक़सान उठा कर बाजार पर क़ब्ज़ा जमाने’ की रिलायंस की रणनीति के प्रत्यक्ष सहयोगी हैं।

नोटबंदी से जिस पेटीएम को अरबों का लाभ दिया गया उसमें एक ओर जहाँ मुख्य भागीदारी चीन की दुनिया की सबसे बड़ी ई कामर्स की कंपनी अलीबाबा की है, वहीं हाल में कोबरा पोस्ट के स्टिंग से पता चला है कि उसके भारतीय प्रमोटरों के तार सीधे तौर पर आरएसएस से जुड़े हुए हैं।

और ये निकले हैं विदेशी कंपनियों के द्वारा भारत के बाजार का विरोध करने ! मोदी सरकार और पूरा आरएसएस विदेशी कंपनियों की विस्तारवादी रणनीति के भारत में प्रमुख औज़ार की भूमिका निभा रहे हैं, और इससे जुड़े संगठन भारतीय बाजार में विदेशी निवेश का विरोध करते हैं !

दरअसल, जीवन के हर क्षेत्र में द्वैराचार का भारत में एक नाम है - आरएसएस। इनकी बौद्धिकियों तक में बाक़ायदा राजनीति में कपट के पाठ पढ़ाये जाते हैं। और, मोदी इस द्वैराचार के सबसे नग्न और अश्लील साक्षात रूप हैं, जिनके इन चार साल का शासन बताता है कि उनका मन विदेशों में ही रमता है, और बात राष्ट्र भक्ति की करते हैं !

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