भगवान की शरण पहुंचे भाजपा के महत्वाकांक्षी नेता, डॉ. रमन सिंह हुए होशियार

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भी सोचना चाहिए कि वे किस तरह के विषधारियों को पाल रहे हैं, जिनकी नजरें उनकी कुर्सी पर गड़ी हुई हैं और रोज उनके सत्ताच्युत होने की वंदना प्रभु के चरणों में करते हैं।...

India Writers

रायपुर, 04 अगस्त 2017

प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट क्या शुरू हुई, प्रदेश भाजपा के महत्वाकांक्षी नेताओं ने भगवान की शरण ले ली। किसी ने कुलेश्वर महादेव को प्रसन्न करने की कोशिश की तो किसी ने चम्पारण्य जाकर रुद्राभिषेक कराया। परंतु इनसे अलग भाजपा संगठन के एक बड़े नेता बड़ी उम्मीद के साथ मां कामाख्या के चरणों पर जाकर लोट गए। वे यहीं नहीं रुके, भाग्य परिवर्तन की आस में एक ऐसा पत्थर अपनी अंगुलियों में जड़ लिया, जो पांच लाख रुपए का है और पत्थर पहनने की सलाह देने वाले ने दावा किया है कि नेतृत्व परिवर्तन हुआ तो उन्हें घर बैठे बुलावा आ जाएगा।

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मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भी सोचना चाहिए कि वे किस तरह के विषधारियों को पाल रहे हैं, जिनकी नजरें उनकी कुर्सी पर गड़ी हुई हैं और रोज उनके सत्ताच्युत होने की वंदना प्रभु के चरणों में करते हैं।

भाजपा के तीसरे कार्यकाल में हर दो-चार महीने में नेतृत्व परिवर्तन की खबरें बाजार में जरूर आती हैं। बिलासपुर में आंखफोड़वा व गर्भाशय निकालने की घटना हुई तो लगने लगा कि अब यह सरकार गई, उसके बाद देश के सबसे बड़े घोटालों में शुमार नॉन घोटाले का मामला सामने आया तो लगा कि अब इस सरकार को कोई नहीं बचा सकता है। अगुस्ता खरीदी और पनामा पेपर्स में डॉ. रमन सिंह की सीधे संलिप्तता की बात सामने आते ही लगा कि बहुत जल्द प्रदेश में नया मुख्यमंत्री शपथ लेगा लेकिन ऐसा सोचने वालों को यह जरूर ख्याल रखना चाहिए कि जिस झीरम नरसंहार काण्ड के बाद सरकार को आंच नहीं आई, वह इस तरह के हिचकोलों से भला कहां गिरेगी?

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फिर भी भाजपा के कई महत्वाकांक्षी नेता उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं।

चोखेलाल ने जिस भाजपा के बड़े नेता के कामाख्या देवी के दरबार में जाने की बात की, उसे मुख्यमंत्री ने पूरा संरक्षण दिया। विधानसभा का पिछला चुनाव हारने के बावजूद उसे संगठन में प्रतिष्ठित किया। बिलासपुर जिले में वहां के स्थानीय मंत्री के साथ उसकी भले राजनीतिक वैमनस्यता हो परंतु मुख्यमंत्री निवास में उसे पूरी तरह संरक्षण मिलता है और बदले में वह मुख्यमंत्री के रबर स्टैम्प की तरह संगठन के फैसले करता है।

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इन सबके बावजूद सत्ता प्रमुख बनने का सपना देखने से वह बाज नहीं आ रहा है। उसे अच्छी तरह पता है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में पिछड़ा वर्ग के हिस्से में मुख्यमंत्री की कुर्सी आ सकती है। नया मुख्यमंत्री निश्चित रूप से डॉ. रमन सिंह की सलाह पर ही बनाया जाएगा। पिछड़ा वर्ग से सबसे ताकतवर नेता रायपुर सांसद रमेश बैस कभी भी मुख्यमंत्री की गुडबुक में नहीं रहे हैं, इसलिए पिछड़ा वर्ग का यह नेता संभावनाएं तलाश रहा है। उसे मालूम है कि वह डॉ. रमन सिंह का भरोसेमंद रबर स्टैम्प है इसलिए अगर कभी चुनने की बारी आई तो डॉ. रमन सिंह उसके नाम पर अत्यंत गंभीरता से सोच सकते हैं परंतु उसे यह पता नहीं है कि यह राह कांटों से भरी है।

खैर सभी जानते हैं कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।

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राजनीति संभावनाओं से भरी पड़ी है, इसलिए कोशिश सभी को करनी चाहिए। कोशिश के साथ अगर भाग्य को दुरुस्त करना है तो पत्थरों का सहारा लेने के अलावा प्रभु चरण वंदन भी जरूरी है। कहते हैं न कि पुरुष का भाग्य और नारी का चरित्र कब बदल जाए…भगवान भी नहीं जानता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संगठन के यह बड़े नेता प्रदेश की राजनीतिक झंझावतों से दूर मां कामाख्या के चरणों तक पहुंच गए हैं। अगर मुख्यमंत्री की कुर्सी न मिल पाई तो पंद्रह महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। उसमें अगर भाजपा ने मौका दिया तो चुनाव जरूर लड़ेंगे लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी उन्हें पराजित करने वालों ने कमर कस ली है। विधानसभा में प्रवेश आसान नहीं होगा क्योंकि उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत बिलासपुर जिले के एक मंत्री देंगे। मंत्री कभी नहीं चाहेंगे कि बिलासपुर जिले में राजनीति का विकेंद्रीकरण हो और उनके अलावा कोई और भी पॉवर प्वाइंट बने। मंत्री जितनी ताकत खुद को जिताने में लगाएंगे, उससे अधिक ताकत वे संगठन के इस नेता को पराजित करने में लगाएंगे और इसके लिए उन्होंने तैयारी भी कर रखी है।

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वैसे बिलासपुर की तरह की तस्वीरें चुनाव के समय प्रदेश के अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों में दिखाई देंगी, जहां भाजपा प्रत्याशी खुद को जिताने से अधिक ताकत ऐसे लोगों को हराने में लगाएंगे जो आगे चलकर उनके लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकते हैं। इसके अलावा उन्हें उन लोगों से भी निपटना होगा, जो टिकट के दावेदार हैं और उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित किया जाएगा। कई तरह की लड़ाइयां लड़ने के बाद ही उन्हें जीत का स्वाद मिल सकेगा। इस दिशा में भाजपा के इन नेताओं ने सामानंतर तैयारी शुरू कर दी है जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि दीवाली के बाद प्रदेश में राजनीतिक घटनाक्रम देखने योग्य रहेंगे।

चोखेलाल

मुखिया के मुखारी

इण्डिया रायटर्स (मासिक पत्रिका) की प्रस्तुति 

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