फिर पाकिस्तान की शरण में भाजपा-आरएसएस ! जिन्ना ने एक पाकिस्तान बनाया ये भारत के टुकड़े-टुकड़े करके छोड़ेंगे

अंग्रेजों के दलाल सावरकर के इन वंशधरों को कभी अंग्रेज अधिकारियों की तस्वीरों, मूर्तियों और उनके नाम पर महत्वपूर्ण इमारतों और स्थलों के नामकरण पर आपत्ति नहीं होती...

अरुण माहेश्वरी

जब भी कोई महत्वपूर्ण चुनाव आता है, भाजपा-आरएसएस के लोग भारत को छोड़ पाकिस्तान पर पिल पड़ते हैं। पैसठ साल पहले आरएसएस के बारे में अमेरिकी अध्येता जे ए कुर्रान( जूनियर) ने अपने शोध-प्रबंध का अंत इसी बात से किया था कि ‘भारत में आरएसएस का भविष्य काफी हद तक पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों पर निर्भर है’। यह इस बात का भी संकेत था कि आरएसएस अपनी राजनीति के लिये हमेशा किसी न किसी रूप में पाकिस्तान के विषय को उठाने का काम जरूर करता रहेगा।

अब जैसे-जैसे 2019 करीब आ रहा है और लोग मोदी सरकार की निकम्मई पर उसे रात-दिन कोसने लगे हैं तथा खुद मोदी सबको एक भाषणबाज विदूषक नजर आने लगे हैं, भारत के मुद्दों को छोड़ कर संघियों का पाकिस्तान-केंद्रित प्रचार तेज होता जा रहा है।

अभी वे पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति मोहम्मद अली जिन्ना की एक तस्वीर पर भिड़े हुए हैं। अलीगढ़ विश्वविद्यालय के एक कक्ष में सालों से लगी हुई तस्वीर पर।

यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ कहते हैं कि भारत को तोड़ने वाले जिन्ना की कोई तस्वीर इस देश में नहीं होनी चाहिए। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी ‘आज तक’ में दिए गए एक साक्षात्कार में आदित्यनाथ की बात को अनुमोदित किया है।

अब इनसे कोई पूछे कि भारत में द्वि-राष्ट्रवाद और पाकिस्तान बनाने का पहला प्रस्तावक कौन था ? जिन्ना ने तो 1940 में पाकिस्तान की बात कही थी, लेकिन इसके दो साल पहले, 1938 में ही हिंदू महासभा की एक सभा में उसके नेता सावरकर ने द्वि-राष्ट्र का सिद्धांत पेश कर दिया था। सावरकर के बारे में सब जानते हैं कि कालापानी की सजा से छूटने के लिये उन्होंने अंग्रेजों से लिखित तौर पर माफी मांगी थी और अंग्रेजो के हित में काम करने का मुचलका भी दिया था। इसके विपरीत जिन्ना ने कभी अंग्रेजों को उनकी चाकरी का मुचलका नहीं दिया था। उल्टे एक बैरिस्टर के नाते उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बाल गंगाधर तिलक का मुकदमा सफलता के साथ लड़ा था।

इसीलिये अंग्रेजों के दलाल सावरकर के इन वंशधरों को कभी अंग्रेज अधिकारियों की तस्वीरों, मूर्तियों और उनके नाम पर महत्वपूर्ण इमारतों और स्थलों के नामकरण पर आपत्ति नहीं होती है। सिर्फ किसी भी मुसलमान के नाम को देख कर ये उस पर पिल पड़ते हैं !

कहना न होगा, ये लोग जिस पथ के पथिक हैं, इनका वश चले तो अपने आका पश्चिमी साम्राज्यवादियों के इशारे पर ये भारत के टुकड़े-टुकड़े करके छोड़ेंगे। जिन्ना ने एक पाकिस्तान बनाया, ये हर प्रदेश को हिंदुस्तान-पाकिस्तान बना डालेंगे।

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