शनि से डरकर हुआ मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार

श्रीमान नरेंद्र मोदी ग्रह, नक्षत्र, कौन सी घड़ी में क्या करना है, जिन दलों को मंत्री पद की दावत नहीं दी है, संभव है वे ही नीच ग्रहों की भूमिका में आ जाएँ। शिव सेना यदि शनि है तो JDU भी राहु से कम नहीं...

पुष्परंजन
हाइलाइट्स

२०१४ में शपथ के तुरंत बाद प्रधान सेवक जी ऑस्ट्रेलिया, फिजी रवाना हो गए थे, २०१६ में कैबिनेट में कांट-छांट विस्तार किया तो दक्षिण अफ़्रीकी देशों की यात्रा पर श्रीमान मोदी जी चल दिए. और अब चीन-म्यांमार के वास्ते निकल चुके. क्या इसके पीछे भी ग्रह दशा की कोई भूमिका हो सकती है? सोचियेगा और विमर्श कीजियेगा !

 

पुष्परंजन

आखिर क्या वजह है कि मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार जो पहले शनिवार को होना था वो रविवार को हुआ। क्या शनि दृष्टि से बचना था, इसलिए शपथ का दिन रविवार तय हुआ ?

खबरिया चैनलों की चीख-पुकार से तो यही लग रहा था कि शनिवार को मोदी कैबिनेट की शपथ हो जायेगी, और अगले दिन पीएम ब्रिक्स बैठक के वास्ते चीन रवाना हो जायेंगे। मगर,  मोदी मंत्रिमंडल शनि दृष्टि का जोखिम नहीं लेना चाहता, इसलिए रविवार को शपथ ग्रहण का आयोजन ठीक समझा गया.

श्रीमान नरेंद्र मोदी ग्रह, नक्षत्र, कौन सी घड़ी में क्या करना है, इसका पूरा ध्यान रखते हैं.

26 मई 2014 को देश के प्रधान सेवक पद की शपथ ली तो दिन सोमवार था. गणना करने वालों की हिदायत थी कि सूर्यास्त से पहले-पहले मोदी जी शपथ ले लें, वरना राहु काल आरम्भ हो जाएगा ! ठीक छह बजे शाम को मोदी जी ने यह शुभ कार्य संपन्न कर लिया था.

5 जुलाई 2016 को मंगलवार था जब मोदी कैबिनेट में 19 नए मंत्री बनाये गये और पांच मंत्री नप गये थे। इसबार भी पांच ही नपे हैं।

लगता है मोदी जी को किसी ज्योतिष या तांत्रिक ने कह रखा है, जब भी नापो पांच को ही नापो।

अच्छा यह भी ध्यान देने वाली बात है कि है २०१४ में शपथ के तुरंत बाद प्रधान सेवक जी ऑस्ट्रेलिया, फिजी रवाना हो गए थे, २०१६ में कैबिनेट में कांट-छांट विस्तार किया तो दक्षिण अफ़्रीकी देशों की यात्रा पर श्रीमान मोदी जी चल दिए. और अब चीन-म्यांमार के वास्ते निकल चुके. क्या इसके पीछे भी ग्रह दशा की कोई भूमिका हो सकती है? सोचियेगा और विमर्श कीजियेगा !

अच्छा किया उद्धव ठाकरे ने बोल दिया, "हम पावर के भूखे नहीं हैं"। न्योता नहीं पाने वाले चंद्रबाबू नायडू गारू खुश नक्को रे ! एआइएडीएमके को लड़ाया और अब लटकाया। नीतीश बाबू इतने खुन्नस में हैं कि बोल गए, अरे भाई मुझे मिडिया वालों से ही पता चला कि जेडीयू को न्योता नहीं दिया।

बात न्योते की चली तो आप सबों को पता तो होगा कि शादी या श्राद्ध में दो क़िस्म का भोज होता है। एक जात के लिए, और दूसरा परजात (बाहर वालों) के लिए। लगता है अमित भाई शाह यही आदेश लेने संघ परिवार के पास गये थे !

इस बार जिन दलों को मंत्री पद की दावत नहीं दी है, संभव है वे ही नीच ग्रहों की भूमिका में आ जाएँ। शिव सेना यदि शनि है, तो जदयू भी राहु से कम नहीं हैं..

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