ये मंत्री कुर्सी क्यों नहीं छोड़ते ?

देशव्यापी पद्मावती, हिन्दू-हिन्दू के शोर में मोदी सरकार के मंत्रियों के निकम्मेपन पर किसी का ध्यान नहीं जाता. कभी कांग्रेस के मंत्रियों को भी महंगाई से मतलब नहीं हुआ करता था ! यही अहंकार उन्हें ले डूब...

पुष्परंजन

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किसी के मकान पर मूतने वाले वाले माननीय कृषि मंत्री से कोई ये नहीं पूछता कि मान्यवर प्याज की बुवाई का रकबा 2. 65 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.90 लाख हेक्टेयर रह गया, कृषि विकास दर में ४.१ प्रतिशत से १.७ फीसदी की गिरावट आ गयी, तो आपने क्या किया? लोगों को बस मंत्री के मूत्रत्याग को मुद्दा बनाना था.

सितम्बर से नये प्याज की आवक, मंडियों में आरम्भ हो जाती है. अक्टूबर-नवम्बर में प्याज सबसे सस्ता हो जाता था. कभी चीन के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्याज की पैदावार वाला देश हुआ करता था. कृषि मंत्रालय की लापरवाही से उसका सत्यानाश हो गया.

नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान से यह नहीं पूछा जाता कि प्याज़ को जमाखोरों से मुक्त करने में आप क्यों अक्षम हो, और आपके नाकारापन की वजह से इस सीजन में प्याज 80 रूपये किलो और अन्य सब्ज़ियां, अंडे, आवश्यक खाद्य सामग्री कीमतें आसमान पर हैं, तो कुर्सी छोड़ क्यों नहीं देते ?

बुधवार को नागरिक आपूर्ति मंत्री बघार रहे थे, "हम क़ीमत को नियंत्रित नहीं कर सकते, जमाखोरी भी नहीं रोक सकते !" वैसे, सत्ता किसी भी पार्टी की हो, इस आदमी को बस मंत्री बनने से मतलब रहता है. जनता जाये भाड़ में.

अब तो देशव्यापी पद्मावती, हिन्दू-हिन्दू के शोर में मोदी सरकार के मंत्रियों के निकम्मेपन पर किसी का ध्यान नहीं जाता. कभी कांग्रेस के मंत्रियों को भी महंगाई से मतलब नहीं हुआ करता था ! यही अहंकार उन्हें ले डूबा !

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