गुजरात चुनाव का सटीक विश्लेषण,  कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार, भाजपा की बढ़ी बेचैनी

कहा जा रहा है सब कुछ बीजेपी के साथ है, फिर भी बीजेपी में एक बेचैनी दिख रही है। उसे लग रहा है कि कहीं वो इस चुनाव को हार ना जाये, आखिर ऐसा क्यों?...

गुजरात_चुनाव में अब मोदी जी और उनकी कैबिनेट के कई मंत्री भी ताल ठोंक रहे हैं.. पिछले 22 साल से सत्ता पर काबिज़ बीजेपी को पहली बार कांग्रेस की कड़ी चुनौती का सामना करना पड रहा है..राहुल गाँधी लगातार बीजेपी और मोदी जी पर वार कर रहे हैं..कुछ जातीय समीकरण भी इस वक्त कांग्रेस के हाथ को मजबूत करते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार दिख रहा है। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस के पक्ष में पूरा माहौल होने के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के लिए जीत आसान नहीं है। सवाल है आखिर कौन कौन से कारण हैं जिसके दम पर कांग्रेस के लिए यह जीत आसान नहीं है?

‘मन की बात चाय के साथ’ पर चर्चा में लगभग 51 हज़ार बूथों को जोड़ने का प्लान बीजेपी का है, साथ हीं मोदी जी की धुआंधार जनसभा भी होनी है। मोदी-अमित शाह की चुनाव जीताऊ जोड़ी भी है और दोनों गुजरात से ही हैं। मोदी जी तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अब देश के प्रधानमंत्री भी हैं। ऐसे देखा जाये तो सब कुछ बीजेपी के साथ है, फिर भी बीजेपी में एक बेचैनी दिख रही है। उसे लग रहा है कि कहीं वो इस चुनाव को हार ना जाये, आखिर ऐसा क्यों?

तो, यह चुनाव जिस प्रकार गुजरात से बाहर निकलकर केंद्र की साख का सवाल हो गया है उसी प्रकार यह राहुल गाँधी के राजनीतिक सफ़र के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस चुनाव में अगर उन्हें जीत मिलती है तो राहुल कांग्रेस के स्थापित नेता हो जायेंगे।दूसरी तरफ अगर मोदी इस चुनाव को हारते हैं तो बीजेपी में अभी तक जो उनका वर्चस्व है उसे झटका लगेगा। लेकिन सब कुछ आने वाले समय में मोदी के कैम्पेन पर निर्भर करेगा... आइए इन सभी सवालों पर देशबन्धु ऑनलाइन के एडिटर अमलेन्दु उपाध्याय से समझते हैं गुजरात चुनाव के निहितार्थ –

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