मोदी-शाह का हर कदम हिटलर की नकल के सिवाय और कुछ नहीं, प्रणब मुखर्जी और हिंडनबर्ग की साम्यता

नाजियों ने नाजी प्रचार के अलावा बाकी सारी किताबों को गैर-जर्मन गंदा साहित्य कहा था जैसे आरएसएस के लोग अपने अलावा बाकी हर आदमी को हिंदू-विरोधी और जघन्य बताते हैं।...

हाइलाइट्स

सभी चित्र फेसबुक से साभार

मोदी-शाह का हर कदम हिटलर की नकल के सिवाय और कुछ नहीं, प्रणब मुखर्जी और हिंडनबर्ग की साम्यता

अरुण माहेश्वरी

Autobiography of Hitlerहिटलर के लोग घर-घर जाकर हिटलर की आत्म-कथा और जर्मन नस्ल की श्रेष्ठता का झूठा बखान करने वाले नाजी साहित्य को बांटा करते थे। हूबहू उसी की नकल करते हुए अमित शाह ने लोगों के घरों में जाकर संघ के झूठ पर टिके हिंदुत्व की श्रेष्ठता के साहित्य के वितरण का अभियान शुरू कराया है। कहना न होगा, मोदी-शाह का हर कदम हिटलर और नाजियों की कार्यनीति की नकल के सिवाय और कुछ नहीं होता है। यह तस्वीर बर्लिन वाल के सामने लगी हिटलर के आतंक की चित्र प्रदर्शनी से ली गई है।

प्रणब मुखर्जी और हिंडनबर्ग की साम्यता

Pranab Mukherjee and Hindenburgबर्लिन की दीवार के सामने शैतान हिटलर के आतंक राज की कहानी की चित्र प्रदर्शनी में एक चित्र यह भी था। तत्कालीन राष्ट्रपति हिंडनबर्ग से मुलाकात के वक्त विनम्रता की भावमूर्ति दिखाई देते हिटलर का चित्र। हिंडनबर्ग को धोखा दे कर हिटलर ने जब जर्मनी पर अपना एकक्षत्र राज कायम किया, उसके बाद हिंडनबर्ग को विदा करते समय का यह चित्र। इसे देख हमारे दिमाग में प्रणब मुखर्जी के स्वागत में पलक पावड़े बिछाये हुए आरएसएस के नेताओं की विनम्रता के मिथ्याचार का चित्र कौंध गया।

हिटलर और गोयेबल्स ने सरे- बाजार होली जलाई थी महान साहित्य की किताबों की

घर-घर घूम कर नाजी प्रचार की किताबें बंटवाने वाले हिटलर और गोयेबल्स ने जर्मनी के वास्तविक महान साहित्य की किताबों की सरे- बाजार होली जलाई थी। उन्होंने नाजी प्रचार के अलावा बाकी सारी किताबों को गैर-जर्मन गंदा साहित्य कहा था जैसे आरएसएस के लोग अपने अलावा बाकी हर आदमी को हिंदू-विरोधी और जघन्य बताते हैं।

Hitler Booksयह भी पढ़ें 

जीवन के आखिरी पड़ाव में संघ शरणागत हुए प्रणब मुखर्जी, हेडगेवार को बताया “भारत मां के सपूत”

बूढ़े पिता प्रणब मुखर्जी के नागपुर प्रणाम पर बेटी शर्मिष्ठा ने उठाए सवाल

संघ के घर में प्रणब मुखर्जी ने संघ प्रमुख सहित स्वयंसेवकों को पढ़ाया राष्‍ट्र, राष्‍ट्रवाद, देशभक्‍ति, गाँधी और नेहरू का पाठ

प्रणब दा ! क्या आरएसएस अपनी भारत विरोधी हिन्दू राष्ट्रवादी विचारधारा को त्याग सकता है?

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।
hastakshep
>