जीतेंगे पीएम मोदी ही, मोदी के मुकाबले नहीं फेंक पाएंगे इमरान

चुनाव जीतने के बाद भारत में नेता जिस तरह वायदों से पलटते हैं, पाकिस्तान उससे जुदा नहीं है। चुनाव के समय इमरान खान ने दो करोड़ नौकरियां देने का वायदा किया था। जीतते ही अब यह घटकर एक करोड़ हो गया। ...

पुष्परंजन
जीतेंगे पीएम मोदी ही, मोदी के मुकाबले बॉल नहीं फेंक पाएंगे इमरान

साहेब, बीबी, और गुलाम के इतने बुरे दिन आ सकते हैं, विरासत की सियासत करने वालों ने सोचा न था!

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कूटनीति की पिच पर बालिंग इमरान खान को करनी है, और बैटिंग मोदी करेंगे। बताइये, जीतेगा कौन? इमरान खान एक गेंदबाज के बतौर टेस्ट क्रिकेट में 362 विकेट ले चुके हैं। इस बिना पर वे पाकिस्तान के पहले और दुनिया के चौथे गेंदबाज माने जाते हैं। इमरान की कप्तानी में पाकिस्तान को पहली बार विश्व कप हासिल हुआ था। टेस्ट क्रिकेट में 3 हजार 807 रनों का रिकार्ड भी है। इस सारी उपलब्धियों के बावजूद मैं कहूंगा, जीतेंगे पीएम मोदी। क्योंकि यह राजनीति की पिच है, और यहां के 'पापा पंचो' मोदी जी के अलावा दक्षिण एशिया में कोई हो नहीं सकता। बैटिंग करनी हो, अथवा बालिंग!

पीएम मोदी से दीक्षा लेनी ही होगी इमरान को

इमरान चाहे जितने बड़े फन्ने खां हों, राजनीति की पाठशाला में उन्हें पीएम मोदी से दीक्षा लेनी ही होगी। इसकी शुरूआत हो चुकी है। उन्होंने अहद किया है कि हर साल 20 लाख लोगों को रोजगार देंगे। पांच साल में एक करोड़ लोगों को रोजगार और पचास लाख 'लो कॉस्ट घरों' का निर्माण कराएंगे, ताकि कोई बेघर न रहे। किसानों को कर्ज़ माफी, और सब्सिडी का भी संकल्प पहले राउंड के भाषण में पाकिस्तान की प्रजा से कर चुके हैं। पैसा कहां से आएगा? इस प्रश्न का उत्तर टैक्स पेयर्स की जेब है, जिसका दायरा बढ़ाना है।

मोदीनॉमिक्स

तो सोचिये इमरान खान को यह ज्ञान आया कहां से? 'मोदीनॉमिक्स' का अध्ययन किये बगैर आ भी नहीं सकता। विकास का मोदी मॉडल जानना ही होगा। इमरान खान अपने शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी को बुलायेंगे? मुझे शक ही है। पाकिस्तानी नेता मोदी जितने उदार हो भी नहीं सकते। 26 मई 2014 को राष्ट्रपति भवन में नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने दक्षेस के सभी शासन प्रमुखों को बुलाकर इतिहास रचा था। इमरान खान ऐसे वक्त प्रधानमंत्री बन रहे हैं, जब देश का खजाना खाली है। सबसे बड़ा उदाहरण है नीलम-झेलम नदी पर अधूरा पड़ा दाइमेर-भाषा डैम। बांघ बनना जरूरी है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी को पानी और बिजली चाहिए। 650 अरब रुपये का बजट बढ़ते-बढ़ते 1450 खरब रुपये हो चुका है। चुनांचे, वित्त मंत्रालय ने खैरात की राशि पाने के वास्ते एक अकांउट खोल दिया है। इसका नाम रखा गया है, 'दाइमेर-भाषा एंड मोहम्मद डैम फंड'। मुख्य न्यायाघीश मियां साकिब निसार ने अपने खाते से दस लाख रुपये इस फंड में जमा कराया है। चीफ जस्टिस ने न्यायपालिका के सभी कर्मियों से बांध के वास्ते दान की अपील की है। पिछले सोमवार को पाक सेना के तीनों विंग के अधिकारियों ने फैसला लिया कि वे दो दिन की सेलरी दान करेंगे।

अजीबोगरीब घटनाओं का शिकार हुआ दाइमेर-भाषा बांध

दाइमेर-भाषा बांध कई अजीबोगरीब घटनाओं का शिकार हुआ है। इस बांध के वास्ते दो बार संगे बुनियाद रखा गया। एक बार मुशर्रफ ने, तो दूसरी बार 2011 में आसिफ अली जरदारी ने शिलान्यास किया था। अब लगता इमरान खान भी आधारशिला रखेंगे। डॉन के पत्रकार खुर्रम हुसैन ने जो आंकड़े जुटाये, उसके अनुसार जिस गति से 'दाइमेर-भाषा एंड मोहम्मद डैम फंड' में पैसे आ रहे हैं, लक्ष्य तक पहुंचने में 199 साल लग जाएंगे।

6 जुलाई को इस फंड के वास्ते पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने अकाउंट खोला। 11 जुलाई तक इसके खाते में तीन करोड़ 20 लाख रुपये आये थे। पत्रकार खुर्रम हुसैन के अनुसार, 'अगर रोज़ दो करोड़ रुपये भी इस फंड में लोग दान में भेजते हैं, उस हिसाब से 72 हजार 500 दिन यानी 199 साल में दाइमेर-भाषा बांध परियोजना के वास्ते पूरा पैसा मिल पायेगा।' इस गणित को पढ़ने के बाद पाकिस्तान के किसी भी नागरिक का हौसला पस्त हो सकता है। सच यह है कि इस देश की हालत, कंगलों जैसी हो चुकी है।

फार्मूला क्या है इमरान के पास?

ऐसे में इमरान के पास फार्मूला क्या है? उन्होंने अपने ताजा बयान में कहा कि भारत एक कदम आगे बढ़े, हम दो कदम बढ़ेंगे। हम व्यापार चाहते हैं, ताकि देश को कंगाली की हालत से बाहर निकाला जा सके। तो क्या पाक सेना का एक बड़ा हिस्सा भी यही चाह रहा है? कश्मीर के फ्रंट पर गोलियां चलनी बंद हो जाए, घुसपैठ, पत्थरबाजा पर विराम लगे, तो समझिए कि ये सुधरना चाहते हैं। वरना इस तरह के बयान तो नये निजाम के लिए उसकी औपचारिकता का हिस्सा हो जाता है। , कामयाब रही। मगर, सेना को कौन छुएगा? 2016 में बलूचिस्तान में कुख्यात भूमि घोटाले में सेना के छह अफसर बर्खास्त किये गये थे। इस तरह के दर्जनों मामले सैनिक से लेकर सिविल अदालतों में हैं।

इमरान खान को रोजगार गिनाने का पकौड़ा फार्मूला हिन्दुस्तान से उधार लेना होगा

चुनाव जीतने के बाद भारत में नेता जिस तरह वायदों से पलटते हैं, पाकिस्तान उससे जुदा नहीं है। चुनाव के समय इमरान खान ने दो करोड़ नौकरियां देने का वायदा किया था। जीतते ही अब यह घटकर एक करोड़ हो गया। इस संख्या को कैलकुलेटर से निकालें तो इमरान खान हर घंटे 114 नौकरियां देने वाले हैं। जब नहीं दे पायेंगे, तो रोजगार गिनाने का पकौड़ा फार्मूला उन्हें हिन्दुस्तान से उधार लेना होगा।

मोदी के 'न्यू इंडिया' की तरह इमरान का 'नया पाकिस्तान'

मोदी के 'न्यू इंडिया' की तरह इमरान भी 'नया पाकिस्तान' बनाना चाहते हैं। नये पाकिस्तान में नौकरियों के अवसर सीमेंट, स्टील, पेंट, वुुडवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य, हाउसिंग, आईटी, पर्यटन, अक्षय ऊर्जा व अधोसंरचना के क्षेत्र में दिख रहे हैं। इमरान की पार्टी, 'पाकिस्तान तहरीके इंसाफ ' (पीटीआई) की आर्थिक टीम इसके विजन डॉक्यूमेंट बनाने में लग गई है। आतंक की फैक्ट्री कहे जाने वाले पाकिस्तान में अच्छे दिन लाना उतना आसान है?

विगत सात माह में पाकिस्तानी रुपया, डॉलर के मुकाबले 22 फीसद नीचे गिरा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की उधारी पर जो ब्याज दर है, वह पिछले छह महीने में 7.5 प्रतिशत पर पहुंच चुका है। वर्ल्ड बैंक ने अपने हाथ टाइट कर रखे हैं। इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) वर्ल्ड बैंक की ऐसी संस्था है, जो अधोसंरचना के वास्ते 1. 25 फीसदी ब्याज पर कजर् देती है। पाकिस्तान को आईडीए से 968 मिलियन डॉलर का लोन चाहिए था, मगर उसे 506.6 मिलियन डॉलर का कजर् मिला है।

गिल्गिट-बाल्टिस्तान में नीलम-झेलम नदी पर बांध बनाने को लेकर सबसे पहली आपत्ति भारत की थी। सामरिक रूप से संवेदनशील व विवादित इलाके को चाइना-पाकिस्तान इकॉनामिक कॉरीडोर (सीपीईसी) के अंतर्गत ले आना ही आपत्ति की सबसे बड़ी वजह थी। नवंबर 2008 में दाइमेर-भाषा हाइड्रो प्रोजेक्ट के वास्ते 12.6 अरब डॉलर ऋण विश्व बैंक से लेना था। वर्ल्ड बैंक ने कहा कि भारत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना यह संभव नहीं है। पाकिस्तान इस पर चुप लगा गया। वर्ल्ड बैंक ने एक बार फिर याद दिलाया है कि आप भारत से 'एनओसी' लें। अब इमरान खान इस संवेदनशील विषय पर कैसे आगे बढ़ते हैं, उसका इंतजार सबको है।

वैसे पाकिस्तान का नया निजाम इसमें आगे बढ़ता है, तो उसे चीन की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। एक बात तो माननी होगी कि इमरान खान चीन की 'राइट च्वाइस बेबी' नहीं रहे हैं। शी चिनपिंग ब्रिक्स बैठक में हैं, मगर उनकी ओर से शुक्रवार शाम तक कोई बधाई संदेश नहीं पहुंचा है। अलबत्ता, चीन का सरकारी पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' में एक लेख के जरिये संदेश दिया गया है कि पाकिस्तान में सबसे पहले राजनीतिक स्थिरता आवश्यक है। इस लेख में चीनी चिंता 'चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर' को लेकर साफ दिखी है। इमरान खान ने एक भाषण में कह दिया था कि हम इस 'कॉरीडोर' में पारदर्शिता चाहेंगे। यानी, 62 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट में अब तक जो कुछ हुआ, पारदर्शी नहीं था। मगर, इसका अर्थ यह भी नहीं कि इमरान खान को चीन का कंधा नहीं चाहिए।

इमरान की अर्थनीति को आगे बढ़ाएंगे क्या डोनाल्ड ट्रंप

बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और फाटा में रोजगार के अवसर पाकिस्तान का नया निजाम कैसे ढूंढ पायेगा? यह सबसे बड़ा सवाल है। चुनाव के दौरान सबसे बड़ा आत्मघाती विस्फोट और हत्याएं इन्हीं इलाकों में हुई हैं। ये इलाके अमेरिकी-अफगान रणनीति के एपीसेंटर भी रहे हैं। क्या डोनाल्ड ट्रंप, इमरान की अर्थनीति को आगे बढ़ाएंगे, या अपने पुराने रंग में नये निजाम को रंगेंगे? पूरी पिक्चर अभी बाकी है। इमरान ने बयान दिया है, 'अमेरिका वन वे कूटनीति करता रहा है। यानी, जो कुछ हो उसके तरीके से हो। अब हम दोतरफा हितों की बात करेंगे। आपको फायदा चाहिए, तो हमें भी उसका लाभ मिलना चाहिए।' अब पता नहीं दोनों में होशियार कौन है!

ट्रंप ने पहली जनवरी 2018 को को ट्वीट किया था, '15 वर्षों में अमेरिका नेता मूर्खों की तरह 33 अरब डॉलर पाकिस्तान को खैरात में दे चुके थे। बदले में ये अफगानिस्तान में छिपे आतंकियों को सेफ पैसेज देते रहे।'

ट्रंप के इस ट्वीट से साफ हुआ था कि व्हाइट हाउस ने पाक जनरलों को जूते में दाल बांटने पर रोक लगा रखी है। शुक्रवार को इमरान खान ने जो कहा, उसमें बहुत तरह के संकेत हैं। फिर भी ट्रंप प्रशासन जल्दी में नहीं लगता। अफगानिस्तान में अक्टूबर 2018 में आम चुनाव के परिणाम के बाद सबकुछ तय होगा। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय अनुदान लेना बंद कर देगा, और बिल्कुल आत्मनिर्भर हो जाएगा, ऐसा अलादीन का चिराग अभी इमरान खान के हाथ नहीं लगा है।

इस चुनाव में सारी बाजी किसी की पलटी है, तो मियां नवाज शरीफ की। बेटी समेत गिरफ्तारी देने के पीछे भी उनकी रणनीति यही थी कि लोग भावुक होकर उनकी पार्टी के नेताओं को संसद में दोबारा से भेज देंगे, और भ्रष्टाचार भूल जाएंगे। पीएमएल (नवाज) दूसरे और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को तीसरे नंबर पर आने के बाद निकट भविष्य में स्थिति दिखती नहीं कि जोड़-तोड़ के सरकार बना लें। सिंध में पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो अपनी मांद में हारे, तो पंजाब में नवाज शरीफ की कमर ही टूट गई। पंजाब में इमरान अपनी पकड़ गहरी करेंगे। तो क्या कभी नवाज शरीफ जेल से रिहा भी हो पाएंगे? साहेब, बीबी, और गुलाम के इतने बुरे दिन आ सकते हैं, विरासत की सियासत करने वालों ने सोचा न था!

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