ज्ञान के मामले में भारत के पिछड़ेपन के लिए शिक्षक भी कम जिम्मेदार नहीं

अधिकांश प्रोफेसरों का हाल यह है कि वे न्यूनतम अकादमिक स्तर का शोध प्रविधि के मामले में ख्याल नहीं करते।...

जगदीश्वर चतुर्वेदी

विश्वविद्यालयों के हिंदी विभागों में क्या शोध की स्वतंत्रता है ?अधिकांश प्रोफेसरों का हाल यह है कि वे न्यूनतम अकादमिक स्तर का शोध प्रविधि के मामले में ख्याल नहीं करते। यदि कोई छात्र उनके साथ रिसर्च करता है तो विषय की स्वतंत्रता से लेकर काम करने की स्वतंत्रता तक बाधाएं खड़ी करते हैं, नियंत्रण में रखते हैं।

फेसबुक पर जो लोग आए दिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का राग अलापते रहते हैं वे जरा हिंदी और अन्य विभागों में शोध की स्वतंत्रता के सवालों पर खुलकर अपने विचार व्यक्त करें, बिना किसी व्यक्ति को केन्द्र में रखे, उन दिक्कतों को सामने लाएं जो शोध की स्वतंत्रता को बाधित किए हुए हैं।

विश्वविद्यालयों में शोध का स्तर बहुत खराब है, इस मामले में नामी विश्वविद्यालयों से लेकर अनामी विश्वविद्यालयों तक समग्र वातावरण शोध विरोधी है।

अधिकांश शिक्षकों की दिलचस्पी रिसर्च में कम और अन्य कामों में ज्यादा रहती है, इसके चलते अकादमिक वातावरण बुरी तरह प्रभावित होता है।

अब आप जरा उन शिक्षकों को करीब से देखें जो मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री के इर्दगिर्द घूमते रहते हैं, उन शिक्षकों का अकादमिक रिकॉर्ड देखें तो पाएंगे कि वे न तो समय पर क्लास लेते हैं, न विषय की तैयारी करते हैं, अधिकांश समय तिकड़मों और मंत्रीजी के कृपापात्र बनने में खर्च करते हैं। इनके अलावा एकवर्ग वह भी है जो तथाकथित आंदोलनकारी है, हमेशा आंदोलनों और राजनीतिक प्रचार कार्य में तल्लीन रहता है, इनका भी पठन-पाठन-अनुसंधान से तीन-तेरह का संबंध है। ऐसी स्थिति में राजनेताओं की नजर में जो शिक्षक आए दिन सामने आते रहते हैं वे ही आदर्श शिक्षक होते हैं जबकि वे लोग कभी शिक्षा की न्यूनतम जिम्मेदारियां नहीं निभाते, वे कभी अपने ज्ञान के स्तर को ऊँचा उठाने का प्रयास नहीं करते, वे ज्ञान की जिस अवस्था में नौकरी में दाखिल होते हैं, दस-बीस साल नौकरी करके वैसे ही या पहले से भी खराब ज्ञानी होकर काम करते रहते हैं, न पढ़ना और न पढ़ाना, न रिसर्च करना और न ठीक से रिसर्च कराना।यही इनका मूल लक्ष्य रहता है।रिसर्च के नाम पर थेकड़ियां लगाने में ये लोग तल्लीन रहते हैं। भारत के ज्ञान के मामले में पिछड़ेपन के लिए ये लोग काफी हद तक जिम्मेदार हैं।

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