सावधान रहें! लेनिन पर हमला भारत को कमजोर करने की साज़िश है... बैंक घोटाले पर नज़र रखो !

हेगडेवार, दीनदयाल उपाध्याय और गोलवलकर का स्वाधीनता से लेकर आज तक क्या योगदान है ? .... लेनिन ने स्वाधीनता संग्राम के दौरान भारत की जनता और यहां के स्वाधीनता सेनानियों की जमकर मदद की......

जगदीश्वर चतुर्वेदी

आधुनिक स्वतंत्र भारत के निर्माण में सोवियत संघ की बुनियादी भूमिका रही है, आजादी की लडाई में वह हमारा सबसे मजबूत मित्र राष्ट्र था। इस मित्रता की नींव लेनिन, स्टालिन आदि ने रखी। आरएसएस और उनके भोंपू आपके अज्ञान का दुरूपयोग कर रहे हैं। सावधान रहें! लेनिन पर हमला भारत को कमजोर करने की साज़िश है।

दिल्ली में CGO कॉम्प्लेक्स में युवा आंदोलन कर रहे हैं बहुत बडा घपला हुआ है। यह और किसी के शासन में नहीं मोदीजी के शासन में हुआ है। मोदी सरकार को रंगे हाथों पकड़ा है युवाओं ने। आश्चर्य आपकी उन पर नजर ही नहीं है।

भूल जाओ बैंक घोटाला, माला जपो लेनिन लेनिन !

बैंक घोटाले पर नज़र रखो ! मोदी सरकार इस पर सारे देश में नंगी होनी चाहिए। 39000 हजार करोड़ रुपए की लूट हुई है।

हेगडेवार, दीनदयाल उपाध्याय और गोलवलकर का स्वाधीनता से लेकर आज तक क्या योगदान है ?

त्रिपुरा में कम्युनिस्टों ने आतंकियों और घुसपैठियों का सफाया किया, राज्य शांति मार्ग पर लौटा, भाजपा ने उनसे समझौता किया और अब वहां अशांति का शंखनाद फूंक दिया है। याद करें कश्मीर में भाजपा ने यही हथकंडा अपनाया वहां आजतक शांति नहीं लौटी है।

चयन बहुत साफ है -लेनिन,आम्बेडकर और पेरियार! तीनों की मूर्तियाँ तोडने वाले भाजपा के लोग हैं। इन तीन नेताओं से भाजपा-आरएसएस नफरत करते हैं। इस नफरत को पढ़ो और सोचो किस तरह हिंदुत्ववादियों के यहां मरजीवड़े तैयार किए जा रहे हैं।

फासिज्म की पहली प्रयोगशाला त्रिपुरा

कल खबर आई कि त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति बुलडोज़र चलाकर गिराई गई। यह निंदनीय और फासिस्ट घटना है। लेनिन का भारत से गहरा संबंध रहा है। लेनिन ने स्वाधीनता संग्राम के दौरान भारत की जनता और यहां के स्वाधीनता सेनानियों की जमकर मदद की, भारत की पहली विदेश में बनी सरकार को उस समय मान्यता दी जिस समय दुनिया में कोई हमारे साथ न था।

मोदी एंड कंपनी के पीछे पूरी फासिस्ट मशीनरी जमीनी स्तर पर काम कर रही है। भाजपा के किसी भी नेता की बंगाल या दूसरे किसी भी राज्य में कम्युनिस्टों ने कभी मूर्ति नहीं गिराई उलटे बंगाल में संघी नेताओं की मूर्तियाँ तो लगवाईं।

सवाल यह है ये मूर्तियाँ क्यों लगाते हैं ? लेनिन -मार्क्स-माओ आदि की मूर्ति क्यों लगाते हैं ? क्योंकि इन नेताओं के विचारों और आचरण से हजारों लाखों लोग प्रेरणा लेते हैं ये नेता आज भी कम्युनिस्टों के सम्माननीय नेता हैं और कम्युनिस्ट पार्टियाँ वैध ढंग से काम कर रही हैं। जनता के जनादेश के बाद सरकार बनाकर या नगरपालिका या पंचायत चुनाव जीतकर काम करती रही हैं। इसलिए जब वे लेनिन की मूर्ति गिरा रहे थे तो जनादेश, जनाकांक्षा और संविधान की सीधे अवहेलना कर रहे हैं।

लेनिन की मूर्ति यदि सामान्य मूर्ति है और उसका कोई अर्थ नहीं है तो फिर उसको बुलडोज़र से गिराने की जरूरत क्यों पडी ? वे जानते हैं कि वे जब लेनिन की मूर्ति गिरा रहे थे तो असल में त्रिपुरा की शांतिकामी - क्रांतिकारी जनता के सपनों को तोड़ रहे थे, लेनिन असाधारण क्रांतिकारी थे, उनसे हमारे देश के अनेक विचारक-स्वाधीनता सेनानी और क्रांतिकारी गहरे प्रभावित थे। लेनिन ने किताबी क्रांति को वास्तविक क्रांति में साकार किया। लेनिन पर चला बुलडोज़र सारे देश के कम्युनिस्टों के लिए खुली चुनौती है कि वे अब खुलकर जनता में जाएं और बताएँ फासिज्म की पहली प्रयोगशाला त्रिपुरा होने जा रहा है।

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(जगदीश्वर चतुर्वेदी की एफबी टिप्पणियों का समुच्चय)

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