भारत का प्रधानमंत्री इतना नीचे गिर कर ऐसी भाषा का प्रयोग कर सकता है ?

तुगलक पढ़ा-लिखा व्यक्ति था। हमारे प्रधानमंत्री की समस्या है कि उनकी पढ़ाई का प्रमाणपत्र भी संदिग्ध है। ऊपर से आशाराम बापू जैसे लोगों की संगत का उनका संस्कार!...

इतिहासकारों का कहना है तुगलक पढ़ा-लिखा व्यक्ति था। हमारे प्रधानमंत्री की समस्या है कि उनकी पढ़ाई का प्रमाणपत्र भी संदिग्ध है। ऊपर से आशाराम बापू जैसे लोगों की संगत का उनका संस्कार!

अरुण माहेश्वरी

‘नहीं, प्रधान मंत्री, ‘पीएम’ का अर्थ perpetual mocking (चिर मजाकिया) नहीं होता है ‘

यह आज के ‘टेलिग्राफ’ की सुर्खी है। यह कथन है पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। मनमोहन सिंह हैरान है कि “भारत का प्रधानमंत्री इतना नीचे गिर कर ऐसी भाषा का प्रयोग कर सकता है जो किसी प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देती है।”

उधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री पी. सी. सिद्दारमय्या ने तो प्रधानमंत्री मोदी पर 100 करोड़ रुपये का मानहानि का फौजदारी मुकदमा ठोकने का उन्हें नोटिश भेज दिया है। ‘टेलिग्राफ’ की इस खबर में मोदी की ‘संस्कारित’ भाषा के कई नमूने भी दिये गये हैं।

इसके अलावा चैनलों पर मोदी के भाषणों को देखने वाला हर कोई उनके लगभग विक्षिप्त और उन्मादित रूप को देख सकते में है। जिस प्रकार आशाराम बापू पागलों की तरह अश्लील मुद्राओं में मंच पर नाचा करता था, लगभग उसी प्रकार उछल-उछल कर, भांगड़ा नृत्य की मुद्राओं में एक प्रधानमंत्री को नारे लगाते हुए नाचते हुए देखना किसी के लिये भी अकल्पनीय है।

मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की थी, उसी समय सबको भारत के पागल बादशाह तुगलक की याद आई थी। लेकिन इतिहासकारों का कहना है कि तुगलक पढ़ा-लिखा व्यक्ति था। हमारे प्रधानमंत्री की समस्या है कि उनकी पढ़ाई का प्रमाणपत्र भी संदिग्ध है। ऊपर से आशाराम बापू जैसे लोगों की संगत का उनका संस्कार!

कर्नाटक के चुनावी मंचों पर अभी बदहवास मोदी के अवचेतन की ये नृत्य-मुद्राएं सचमुच चौकाने वाली हैं। इन्हें देख कर किसी का भी सर शर्म से झुक जायेगा।

कहते हैं - जैसी प्रजा, वैसा राजा। क्या सचमुच हम सब इस धरती पर सिर्फ पागलों की भीड़ बन कर रह गये हैं !

एफबी टिप्पणी 

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