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ओबोर  क्या विश्व बिरादरी से अलग-थलग पड़ गया है भारत
ओबोर : क्या विश्व बिरादरी से अलग-थलग पड़ गया है भारत ?

​​​​​​​अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अधिकतर अध्येता हैरान हैं कि भारत ने शीर्ष सम्मेलन का बहिष्कार क्यों किया, एक तरफ से देखें तो लगता है कि इस बड़े म...

ललित सुरजन
2017-05-26 10:40:57
अच्छाजी बिलकिस बानो केस में पीड़िता के अमिकस क्यूरी हरीश साल्वे राष्ट्रवादियों के हैं
अच्छाजी! बिलकिस बानो केस में पीड़िता के अमिकस क्यूरी हरीश साल्वे राष्ट्रवादियों के हैं !

विपक्ष नवाज़ शरीफ से पूछ रहा है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी से कोई सीक्रेट डील हुई है? ऐसे बयानों का क्या अर्थ निकालें कि नवाज शरीफ ने जानबूझ कर यह...

अतिथि लेखक
2017-05-22 20:19:33
कम से कम इतना तो हम सीख लें कि पूंजीवादी व्यवस्था में सामाजिक संबंधों का क्या स्वरूप हो
कम से कम इतना तो हम सीख लें कि पूंजीवादी व्यवस्था में सामाजिक संबंधों का क्या स्वरूप हो

​​​​​​​समाजवादी समाज की रचना आज के भारत में तो एक दिवास्वप्न है, लेकिन पूंजीवादी व्यवस्था में सामाजिक संबंधों का क्या स्वरूप हो, कम से कम इतना तो...

ललित सुरजन
2017-05-12 23:36:19
राजनाथ सिंह जी हम बताते हैं – कौन महान है
राजनाथ सिंह जी, हम बताते हैं – कौन महान है

मेवाड़ के शासक को राणा नहीं महाराणा प्रताप कहा गया है, यानी उन्हें महान पहले से बताया जा रहा है, फिर भाजपा के मंत्री, नेता इस पर भ्रम क्यों फैला ...

अतिथि लेखक
2017-05-12 12:39:35
कैसे हल हो नक्सल समस्या
कैसे हल हो नक्सल समस्या?

How to solve Naxal problem, Naxal problem, Naxal, बस्तर में माओवाद, नक्सलवाद, बस्तर, माओवाद, नक्सलवाद

ललित सुरजन
2017-05-08 09:05:26
लग पाएगी रियल एस्टेट में धोखाधड़ी पर लगाम
लग पाएगी रियल एस्टेट में धोखाधड़ी पर लगाम!

अपना एक घर हो, हर किसी का सपना होता है। देश में रियल एस्टेट का कारोबार जिस तेजी से बढ़ा है उसी तेजी से ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी भी बढ़ी है। बिल्ड...

अतिथि लेखक
2017-05-01 10:21:34
न्यायपालिका का भी कुछ कम ‘योगदान’ नहीं अयोध्या मामला उलझाये रखने में
न्यायपालिका का भी कुछ कम ‘योगदान’ नहीं अयोध्या मामला उलझाये रखने में

मानना पड़ेगा कि बार-बार रुलाने वाली देश की थकाऊ, उबाऊ और अभिजात व अमीरपरस्त न्यायप्रणाली के प्रति देशवासियों में अभी भी गजब का विश्वास है।...

कृष्ण प्रताप सिंह
2017-05-01 10:11:09
सुषमा जी भारत एक नस्लवादी ही नहीं बल्कि वर्ग-विभक्त समाज है
सुषमा जी भारत एक नस्लवादी ही नहीं बल्कि वर्ग-विभक्त समाज है

जितनी छुआछूत, जितना अपने-पराए का बोध, जितना ‘हम’ और ‘वह’ का विभाजन भारतीय समाज में है, वह शायद दुनिया के किसी अन्य देश में नहीं है। हमारी वर्गभे...

ललित सुरजन
2017-04-24 09:40:01
क्या दलाई लामा बदल चुके हैं तिब्बत आंदोलन में सीआईए को अब दिलचस्पी क्यों नहीं
क्या दलाई लामा बदल चुके हैं? तिब्बत आंदोलन में सीआईए को अब दिलचस्पी क्यों नहीं?

राष्ट्रवादी मित्रों, इस देश में सिर्फ एक बार चीनी माल की बिक्री संपूर्ण रूप से बंद करा दीजिए। चीन इस आर्थिक झटके को झेल नहीं पायेगा!

पुष्परंजन
2017-04-09 22:43:58
मार्गदर्शक मंडल को ‘मूकदर्शक मंडल’ बना रखा है मोदी-शाह की जोड़ी ने
मार्गदर्शक मंडल को ‘मूकदर्शक मंडल’ बना रखा है मोदी-शाह की जोड़ी ने !

89 बसंत देख चुके आडवानी जी के साथ एकबार फिर मजाक करने की चेष्टा तो नहीं हो रही? वर्षों मीडिया उन्हें ‘पीएम इन वेटिंग’ कहके नवाजता रहा। क्या ‘प्रे...

पुष्परंजन
2017-03-25 23:47:01
मोदी मैजिक या मीडिया मैडनैस
मोदी मैजिक या मीडिया मैडनैस ?

कांग्रेस ने जो भी गलतियां कीं, उसकी सजा उसने देर-अबेर भुगती है। सवाल तो उससे पूछे जाएंगे जो सरकार चला रहा है। क्या अपने पागलपन में मीडिया इस बुन...

ललित सुरजन
2017-03-17 00:38:12
चुनाव 2017  कुछ नए दृश्य
चुनाव 2017 : कुछ नए दृश्य

क्या हम पाठकों को यह सलाह दें कि वे अखबार में छपी, टीवी पर दिखी और फेसबुक में लिखी किसी भी राजनैतिक बात पर बिना जांचे-समझे विश्वास न करें!!

ललित सुरजन
2017-02-17 13:36:29
ट्रंप महोदय जनता के बीच में दीवार खड़ी न कीजिए
ट्रंप महोदय जनता के बीच में दीवार खड़ी न कीजिए

दीवार खड़ी कीजिए, लेकिन धर्म और राज्य के बीच में, न कि जनता के बीच में... ट्रंप अत्यंत सफल व्यापारी तो हैं, लेकिन वे राष्ट्रपति कैसे बन गए !

ललित सुरजन
2017-02-02 23:52:58
महागठबंधन  कांग्रेस की ही खाट खड़ी कर दी राहुल गांधी ने
महागठबंधन : कांग्रेस की ही खाट खड़ी कर दी राहुल गांधी ने

ऐतिहासिक पार्टी का ‘सेकेंड इन कमांड’, इतना किंकर्तव्यविमूढ़ और ‘कन्फ्यूज़्ड’ क्यों है?

पुष्परंजन
2017-01-24 11:19:12
ऐसा नहीं है कि मीडिया में कभी कोई स्वर्णयुग था
ऐसा नहीं है कि मीडिया में कभी कोई स्वर्णयुग था

ऐसा नहीं है कि मीडिया में कभी कोई स्वर्णयुग था। ‘हमारे जमाने में ऐसा होता था’ जैसे उद्गार सिर्फ अपने मन को दिलासा देने के लिए व्यक्त किए जाते हैं।

ललित सुरजन
2017-01-17 23:56:08