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​​​​​​​खेतों में जहर  आंकड़ों में सिमटकर रह जाएं यवतमाल की मौतें
​​​​​​​खेतों में जहर : आंकड़ों में सिमटकर रह जाएं यवतमाल की मौतें

पिछले 16 साल में महाराष्ट्र के विदर्भ में तकरीबन 14,000 किसानों ने आत्महत्या की है. कीटनाशक के इस्तेमाल से कई मजदूरों और किसानों की मौत हुई है. अ...

इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
2017-10-20 15:38:52
जानलेवा योजना  मुंबई में 23 रेल यात्रियों की मौत से क्या शहरी विकास के योजनाकार कुछ सबक लेंगे
जानलेवा योजना : मुंबई में 23 रेल यात्रियों की मौत से क्या शहरी विकास के योजनाकार कुछ सबक लेंगे?

लोकल ट्रेनों के नेटवर्क पर हर रोज 10 लोगों की मौत होती है. 2016 में 3,202 लोगों की मौत हुई और 3,363 लोग घायल हुए. इस साल दुर्घटनाओं में मरने वालो...

इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
2017-10-16 10:54:42
क्यों गौरी जिंदा है स्वतंत्र प्रेस की वास्तविक भूमिका के लिए हमें संघर्ष करना चाहिए
क्यों गौरी जिंदा है? स्वतंत्र प्रेस की वास्तविक भूमिका के लिए हमें संघर्ष करना चाहिए

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अक्सर मीडिया को झूठा कहते हैं. भारत में भी यह काम मई, 2014 से चल रहा है जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने. पत्रकारों की हत...

इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
2017-10-14 23:04:19
बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बाद तीन साल की मोदी सरकार के पास दिखाने के लिए कुछ खास नहीं
बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बाद तीन साल की मोदी सरकार के पास दिखाने के लिए कुछ खास नहीं

सरकारी खर्चे में कटौती करके और रोजगार सृजन के उपाय नहीं करके मांग को और खराब स्थिति में पहुंचा दिया गया. इसके बाद सरकार ने नोटबंदी करके स्थिति और...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-10-10 09:47:20
बुलंद आवाज bhu की छात्राओं की
बुलंद आवाज BHU की छात्राओं की

छात्राओं की सुरक्षा की चिंता को उनके खिलाफ हथियार नहीं बनाया जा सकता. महिलाओं के लिए असुरक्षित समझे जाने वाले दिल्ली में स्थापित JNU यह दिखाता है...

इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
2017-10-08 22:25:08
सरदार सरोवर बांध का सच  मोदी की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बांध में मंदिरों ने पैसा नहीं लगाया
सरदार सरोवर बांध का सच : मोदी की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा, बांध में मंदिरों ने पैसा नहीं लगाया

सरदार सरोवर बांध ऐसे विकास का प्रतीक है जो न्याय और टिकाऊ विकास की अवधारण पर आधारित नहीं है

इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
2017-10-02 14:27:43
भाजपा के सुधार के एजेंडे में ग्रामीण भारत कभी शामिल रहा ही नहीं
भाजपा के सुधार के एजेंडे में ग्रामीण भारत कभी शामिल रहा ही नहीं

जीएसटी की वजह से खेती की लागत बढ़ गई है. हालांकि इन मसलों पर भाजपा लोगों के समर्थन का दावा करती है लेकिन जमीनी हालात ऐसे हैं जिनसे स्थिति पलट सकती है.

इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
2017-10-02 13:16:11