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भय भूख और भ्रष्टाचार से जूझ रही दुनिया से साइबर फिरौती और अच्छे दिन के तीन साल
भय, भूख और भ्रष्टाचार से जूझ रही दुनिया से साइबर फिरौती और अच्छे दिन के तीन साल

मोदीजी ने इन तीन सालों में एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं की, जिसमें पत्रकारों को स्वतंत्र होकर सवाल पूछने की छूट मिलती.. वैसे राजनीति से अब देश की न...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-26 12:09:33
बदल रहे हैं निजाम तो बदल रही अपने नेताओं के प्रति लोगों की निगाहें भी
बदल रहे हैं निजाम तो बदल रही अपने नेताओं के प्रति लोगों की निगाहें भी

एक ओर निजाम बदल रहे हैं, दूसरी ओर अपने नेताओं के प्रति लोगों की निगाहें बदल रही हैं।

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-05-18 17:58:31
आखिर क्यों कश्मीर लगातार सुलग रहा है युवा नाराज क्यों हैं लोकतंत्र हारता हुआ क्यों दिख रहा है
आखिर क्यों कश्मीर लगातार सुलग रहा है? युवा नाराज क्यों हैं? लोकतंत्र हारता हुआ क्यों दिख रहा है?

मदारी मंच पर आकर नये करतब दिखाता है, तमाशा देखता है मुल्क औ ताली बजाता है.. कभी मैं सोचता हूँ कि ये साजिश खत्म कब होगी, कोई चीखता है न कोई हल्...

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-04-19 16:24:42
क्या ईवीएम के जरिए भी धांधली की जा सकती है
क्या ईवीएम के जरिए भी धांधली की जा सकती है?

जो सवाल मायावती और अरविंद केजरीवाल ने उठाए हैं, क्या वे महज़ हार की खीझ है, या उनमें दम भी है? अखिलेश यादव ने भी कहा है कि जब बात उठी है तो जांच ...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-03-21 16:00:14
युद्ध और फसाद की बातें करना कितना आसान और अमन के लिए खड़ा होना कितना चुनौतीपूर्ण
युद्ध और फसाद की बातें करना कितना आसान और अमन के लिए खड़ा होना कितना चुनौतीपूर्ण

युद्ध फसाद की बातें करना कितना आसानऔर अमन के साथ, अमन के लिए खड़ा होना कितना चुनौतीपूर्ण है। एक साल पहले JNU में देशद्रोह देशप्रेम का जो अनावश्य...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-03-07 22:05:20
नया इक रिश्ता पैदा क्यूं करें हम बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूं करें हम
नया इक रिश्ता पैदा क्यूं करें हम, बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूं करें हम

बेशक अपनी जीत पर भाजपा जश्न मनाए, लेकिन याद रखे कि… मैं ये मानता हूं मेरे दिए, तिरी आंधियों ने बुझा दिए मगर एक जुगनू हवाओं में, अभी रौशनी क...

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-02-27 07:11:37
लहजे में बदजुबानी चेहरे पे नक़ाब लिए फिरते हैं
लहजे में बदजुबानी, चेहरे पे नक़ाब लिए फिरते हैं

मोदी विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। लोकसभा में उन्होंने उत्तराखंड में आए भूकंप का जिक्र राहुल गांधी के भूकंप संबंधी बयान का मजाक उड़ाने के लिए किय...

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-02-12 23:12:03
मौसम की मिसाल दूँ या नाम लूँ तुम्हारा कोई पूछ बैठा है बदलना किसको कहते हैं
मौसम की मिसाल दूँ या नाम लूँ तुम्हारा, कोई पूछ बैठा है बदलना किसको कहते हैं

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की दस्तक होते ही दलबदल के लिए सभी दलों के दरवाजे खुल गए हैं। युद्ध और प्रेम की तरह अब राजनीति में भी सब कुछ संभ...

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-01-31 14:09:56
मुझे मंज़ूर गर तर्क-ए-तअल्लुक है रज़ा तेरी मगर टूटेगा रिश्ता दर्द का आहिस्ता आहिस्ता
चमक सूरज की नहीं मेरे किरदार की है खबर ये आसमाँ के अखबार की है
चमक सूरज की नहीं मेरे किरदार की है, खबर ये आसमाँ के अखबार की है

चमक सूरज की नहीं मेरे किरदार की है, खबर ये आसमाँ के अखबार की है मैं चलूँ तो मेरे संग कारवाँ चले, बात गुरूर की नहीं, ऐतबार की है

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-01-17 23:24:12