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संघ परिवार के पास साहित्यकार नहीं हैं तो हमारे पास कितने साहित्यकार बचे हैं शिक्षा व्यवस्था आखिर क्या है
संघ परिवार के पास साहित्यकार नहीं हैं तो हमारे पास कितने साहित्यकार बचे हैं? शिक्षा व्यवस्था आखिर क्या है?

समूचा मीडिया केसरिया हो गया है। कांग्रेस जमाने के नर्म हिंदुत्व वाले मानवतावादी साहित्यकार और संस्कृतिकर्म भी हिंदुत्व की विचारधारा को पुष्ट करते...

पलाश विश्वास
2017-07-16 22:24:42
अच्छे दिन  खेती की तरह आईटी सेक्टर में भी खुदकुशी का मौसम
अच्छे दिन : खेती की तरह आईटी सेक्टर में भी खुदकुशी का मौसम

गोरक्षा समय में पहले करोड़ नौकरियां पैदा करने के सुनहले दिनों के ख्वाब दिखाये गये और अब जीएसटी के जरिये रोजगार सृजन की बात की जा रही है।

पलाश विश्वास
2017-07-14 23:54:39
आखिरकार दार्जिलिंग को कश्मीर बनाने पर तुले क्यों है देश चलाने वाले लोग
आखिरकार दार्जिलिंग को कश्मीर बनाने पर तुले क्यों है देश चलाने वाले लोग?

बशीरहाट में बाहरी और विदेशियों के व्यापक दंगा भड़काने की साजिश अब बेनकाब हो गयी है। हिंदुत्व के कारपोरेट एजंडा से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताक...

पलाश विश्वास
2017-07-11 19:46:23
बंगाल के बेकाबू हालात राष्ट्रीय सुरक्षा एकता और अखडंता के लिए बेहद खतरनाक चीनी हस्तक्षेप से बिगड़ सकते हैं हालात
बंगाल के बेकाबू हालात राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखडंता के लिए बेहद खतरनाक, चीनी हस्तक्षेप से बिगड़ सकते हैं हालात

​​​​​​​इजराइल से दोस्ती की प्रतिक्रिया में इस्लामी कट्टरपंथी भी अब हर मायने में गोरक्षकों के बराबर खतरनाक... अमन चैन के लिए साझा चूल्हे की विर...

पलाश विश्वास
2017-07-10 08:33:49
घुमक्कड़ छायाकार प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए
घुमक्कड़ छायाकार, प्रसिद्ध यायावर कमल जोशी अपने घर में पंखे से लटके मिले, भयंकर त्रासदी हम तमाम लोगों के लिए!

वे नैनीताल छोड़ने के बाद पूरी तरह यायावरी जीवन जी रहे थे और उनकी हर तस्वीर में मुकम्मल पहाड़ नजर आता था। दुर्गम पहाड़ों के पहाड़ से भी मुश्किल ज...

पलाश विश्वास
2017-07-03 22:31:36
ढाई युद्ध लड़ने की तैयारी राष्ट्रहित में या कारपोरेट हित में
ढाई युद्ध लड़ने की तैयारी राष्ट्रहित में या कारपोरेट हित में?

रक्षा क्षेत्र के विनिवेश के बाद युद्ध से किन कंपनियों को फायदा कि प्रधान स्वयंसेवक और विदेश मंत्री की जगह वित्तमंत्री चीन को करारा जबाव देने लगे?

पलाश विश्वास
2017-06-30 15:56:04
प्रधान स्वयंसेवक और महाबलि ट्रंप के मिलन से भारत को क्या मिला और अमेरिका को क्या
प्रधान स्वयंसेवक और महाबलि ट्रंप के मिलन से भारत को क्या मिला और अमेरिका को क्या?

हिंदुस्तान की सरजमीं पर बीफ के शक में दंगा, बेगुनाहों का कत्लेआम तो क्या, विदेश में बीफ खाने वालों का आलिंगन गर्मजोशी है और मुस्कान को छू भर लें ...

पलाश विश्वास
2017-06-28 22:44:59
अब चाहे दलित उम्मीदवार भी विपक्ष कोई खड़ा कर दें देश का पहला केसरिया राष्ट्रपति बनना तय
अब चाहे दलित उम्मीदवार भी विपक्ष कोई खड़ा कर दें, देश का पहला केसरिया राष्ट्रपति बनना तय

​​​​​​​हिंदुत्व के एजंडे के मुकाबले गजब का दलित एजंडा है। जिससे समूचा विपक्ष तितर बितर है... दलितों की परवाह विपक्ष को पहले थी तो उसने संघ परिवार...

पलाश विश्वास
2017-06-21 22:45:55
ओबीसी प्रधानमंत्री के बाद दलित राष्ट्रपति का हिंदुत्व दांव मुकाबले में धर्मनिरपेक्ष विपक्ष चारों खाने चित्त
ओबीसी प्रधानमंत्री के बाद दलित राष्ट्रपति का हिंदुत्व दांव, मुकाबले में धर्मनिरपेक्ष विपक्ष चारों खाने चित्त!

विचारधारा की इतनी परवाह थी तो संसद में आर्थिक सुधारों या आधार पर विपक्ष कैसे सहमत होता रहा। कहना होगा कि मोदी की निरंकुश सत्ता में विपक्ष की भी ह...

पलाश विश्वास
2017-06-21 22:54:00
रेलवे स्टेशन बेचने के बाद मोदी जी किसानों के किडनी भी बेचेंगे  इसी तरह सुनहले दिन आयेंगे
रेलवे स्टेशन बेचने के बाद मोदी जी किसानों के किडनी भी बेचेंगे ! इसी तरह सुनहले दिन आयेंगे !

ऐसा हिंदू कारपोरेट राष्ट्र जो किसानों के बुनियादी हकहकूक से इंकार करता है। खेतिहर किसानों के दमन उत्पीड़न, दलितों और स्त्रियों बच्चों पर निर्मम अ...

पलाश विश्वास
2017-06-13 14:45:39
तो राजदीप सरदेसाई ने अपने यहां भी छापे का न्यौता देकर मीडिया का हिंदुत्व बोध उजागर कर दिया
तो राजदीप सरदेसाई ने अपने यहां भी छापे का न्यौता देकर मीडिया का हिंदुत्व बोध उजागर कर दिया !

प्रणय राय और बरखादत्त की वजह से हमेशा चर्चित और रवीश की वजह से देखने लायक एनडीटीवी पर कानून के राज के इस भयंकर जलवे से आपातकाल का अंधकार गहराने ल...

पलाश विश्वास
2017-06-05 15:28:42
हे राम यह सैन्य राष्ट्र में कारपोरेट नरबलि का समय
हे राम! यह सैन्य राष्ट्र में कारपोरेट नरबलि का समय !

हे राम! यह समय सैन्य राष्ट्र में कारपोरेट नरबलि का समय है और वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति का हिंदुत्व राष्ट्रवाद हमारे हिंदू मानस के कारपोरेट उपभोक्...

पलाश विश्वास
2017-06-01 23:33:48
निरंकुश जनसंहार ही राष्ट्रवाद की नई संस्कृति वतन सेना के हवाले up-बंगाल में भी हालात तेजी से कश्मीर जैसे बन रहे
निरंकुश जनसंहार ही राष्ट्रवाद की नई संस्कृति, वतन सेना के हवाले! UP-बंगाल में भी हालात तेजी से कश्मीर जैसे बन रहे

UP जीतने के बाद वहां मध्ययुगीन सामंती अंध युग में जिस तरह दलितों,  अल्पसंख्यकों,  स्त्रियों के खिलाफ युद्ध जारी है, उससे बाकी देश में युद्ध क्षेत...

पलाश विश्वास
2017-05-25 16:55:01
अच्छे दिन  जनसंख्या सफाये के लिए इससे बेहतर राजकाज और राजधर्म नहीं हो सकता
अच्छे दिन : जनसंख्या सफाये के लिए इससे बेहतर राजकाज और राजधर्म नहीं हो सकता

पृथ्वी विनाश के कगार पर है। इस पृथ्वी को बचाने के लिए मनुष्यता को बचाना बेहद जरूरी है। राजकाज, राजनय और अर्थव्यवस्था ग्लोबल शैतानी दुश्चक्र की रं...

पलाश विश्वास
2017-05-29 13:00:01
ये अच्छे दिन आपको मुबारक हम अपने बच्चों के कटे हुए हाथों और पांवों का हम क्या करेंगे
ये अच्छे दिन आपको मुबारक हम अपने बच्चों के कटे हुए हाथों और पांवों का हम क्या करेंगे?

रोजगार सृजन हो नहीं रहा है डिजिटल इंडिया की मुक्तबाजार व्यवस्था में रोजगार और आजीविका दोनों खत्म हो रहे हैं। आज भी युवा रोजगार की तलाश में यहां ...

पलाश विश्वास
2017-05-19 10:21:08
अस्मिता राजनीति को खत्म किये बिना मजहबी सियासत के शिंकजे से आम जनता को रिहा नहीं कर सकते
अस्मिता राजनीति को खत्म किये बिना मजहबी सियासत के शिंकजे से आम जनता को रिहा नहीं कर सकते

सत्ता रंगभेदी है और फासिस्ट है। यह सत्ता भी निरंकुश है जो दमन और उत्पीड़न के साथ साथ रंगभेदी नरसंहार के तहत आम जनता को कुचलने से परहेज नहीं कर...

पलाश विश्वास
2017-05-15 23:47:03
जब मेहनतकशों के हकहकूक भी खत्म हैं तो मई दिवस की रस्म अदायगी का क्या मतलब
जब मेहनतकशों के हकहकूक भी खत्म हैं तो मई दिवस की रस्म अदायगी का क्या मतलब?

जब मजदूर आंदोलन हैं ही नहीं, जब मेहनतकशों के हकहकूक भी खत्म हैं तो मई दिवस की रस्म अदायगी का क्या मतलब? सरकार अब मैनेजर की भूमिका में है हरियाण...

पलाश विश्वास
2017-05-01 18:55:09
दस दिगंत भूस्खलन जारी ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी चौड़ी नहीं
दस दिगंत भूस्खलन जारी... ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी चौड़ी नहीं

ज़िंदगी जी लेने के बाद नई जिंदगी की शुरुआत मौत के बाद होती है और मौत के बाद कितनी लंबी जिंदगी किसी को मिलती है, मेरे ख्याल से कामयाबी की असल कसौट...

पलाश विश्वास
2017-04-29 18:55:37