हस्तक्षेप > स्तम्भ > पलाश विश्वास का रोज़नामा
मुनाफे की इस पत्रकारिता में मिशन तो क्या ईमानदारी भी बची नहीं संपादक और पत्रकार बाजार के एजेंट में तब्दील
मुनाफे की इस पत्रकारिता में मिशन तो क्या ईमानदारी भी बची नहीं, संपादक और पत्रकार बाजार के एजेंट में तब्दील

संपादक और पत्रकार बाजार के एजंट में तब्दील होते जा रहे हैं और जनता के विरुद्ध नरसंहारी अश्वमेध अभियान के वे सिपाहसालार भी बनते जा रहे हैं। सच छुप...

पलाश विश्वास
2018-05-27 12:13:05
मारे जाने वाले लोगों के लिए सबसे पहले संवेदना और सहानुभूति हत्यारे ही व्यक्त करते हैं
मारे जाने वाले लोगों के लिए सबसे पहले संवेदना और सहानुभूति हत्यारे ही व्यक्त करते हैं

सांकेतिक मौकापरस्त विरोध संघ परिवार का और कारपोरेट राज में हिस्सेदारी, पूंजीवादी विकल्प है और देश को एक गैस चैंबर से निकालकर दूसरे गैस चैंबर में ...

पलाश विश्वास
2018-05-25 23:42:37
रवींद्रनाथ टैगोर की लोक विरासत पर मोदी सरकार का हमला  किसी को देशिकोत्तम न देने का प्रधानमंत्री का फतवा
रवींद्रनाथ टैगोर की लोक विरासत पर मोदी सरकार का हमला,  किसी को देशिकोत्तम न देने का प्रधानमंत्री का फतवा

फासीवादी निरंकुश सत्ता की नजर में रवींद्रनाथ राष्ट्रद्रोही है और बाल गंगाधर तिलक से लेकर शहीदेआजम भगतसिंह तक सारे स्वतंत्रता सेनानी आतंकवादी। रवी...

पलाश विश्वास
2018-05-22 12:12:46
लोग कहते हैं कि जो उदितराज हैं वही हमारा रामराज है पर मामला कनफर्म नहीं
लोग कहते हैं कि जो उदितराज हैं, वही हमारा रामराज है, पर मामला कनफर्म नहीं

​​​​​​​लू और काल बैशाखी के मध्य तैंतीस साल बाद एक मुलाकात! दलित मूलनिवासी आंदोलन को छोटी-छोटी मामूली सामाजिक घटनाओं से कुछ सबक लेना चाहिए

पलाश विश्वास
2018-05-21 18:50:04
भारत के जनविरोधी कुलीन वाम नेतृत्व को उखाड़ फेंकना सबसे जरूरी
भारत के जनविरोधी कुलीन वाम नेतृत्व को उखाड़ फेंकना सबसे जरूरी

सिर्फ वंचितों को ही नहीं,  बल्कि समूची हिंदी पट्टी को नजरअंदाज करते हुए वामपंथियों ने भारत में मनुस्मृति राज बहाल करने में सबसे कारगर भूमिका निभाई

पलाश विश्वास
2018-05-20 14:15:29
पंचायत चुनाव में आदिवासियों के साथ छोड़ने के बाद बंगाल में वामपंथ की वापसी अब असंभव
पंचायत चुनाव में आदिवासियों के साथ छोड़ने के बाद बंगाल में वामपंथ की वापसी अब असंभव

अब इस महाभारत में मेरी हालत कवच कुंडल खोने के बाद कर्ण जैसी है। कुरुक्षेत्र में मारे जाने के लिए नियतिबद्ध क्योंकि नियति नियंता कृष्ण मेरे विरुद्...

पलाश विश्वास
2018-05-20 11:57:09
सबसे ज्यादा खतरनाक है आदिवासियों का व्यापक भगवाकरण
सबसे ज्यादा खतरनाक है आदिवासियों का व्यापक भगवाकरण

उत्तर बंगाल में भाजपा को बची हुई सीटों में ज्यादातर मिली हैं और कई जिलों में तो पंचायत समितियों में विपक्ष का पूरा सफाया होने के बावजूद भाजपा को ...

पलाश विश्वास
2018-05-18 08:54:39
अंधा युग कभी खत्म नहीं हुआ  सिर्फ दो ही तरह के लोग हैं धृतराष्ट्र या फिर अश्वत्थामा
अंधा युग कभी खत्म नहीं हुआ : सिर्फ दो ही तरह के लोग हैं, धृतराष्ट्र या फिर अश्वत्थामा

वंश ध्वंस के महाभारत के यथार्थ के सच का सामना करने से इंकार करती हुई आंखों में पट्टी। हर आम नागरिक अश्वत्थामा की तरह जख्मी, अभिशप्त।

पलाश विश्वास
2018-05-16 10:00:41
यह जनादेश नहीं मुक्त बाजार का वर्गीय जाति वर्चस्व है
यह जनादेश नहीं, मुक्त बाजार का वर्गीय जाति वर्चस्व है

मुक्तबाजार का विकल्प मनुस्मृति राज है और अरबपतियों की सत्ता का तख्ता पलटने के लिए चुनावी राजनीति फेल है

पलाश विश्वास
2018-05-15 14:45:19
वामदलों के सफाये के बिना भाजपा का बंगाल में ममता को हराना मुश्किल पर दीदी इस सच को इंकार कर आत्महत्या के लिए तुली हैं
वामदलों के सफाये के बिना भाजपा का बंगाल में ममता को हराना मुश्किल, पर दीदी इस सच को इंकार कर आत्महत्या के लिए तुली हैं

क्या सत्तालोलुप निरंकुश असुरक्षित ममता बनर्जी, जेल में कैद लालू प्रसाद और नेहरू गाधी वंश के भरोसे संघ परिवार की संस्थागत मनुस्मति व्यवस्था को बदल...

पलाश विश्वास
2018-05-13 13:56:37
अल्मोड़ा में पानी का एटीएम हिमालय क्षेत्र की जनता को धीमे जहर से मारा जा रहा है
अल्मोड़ा में पानी का एटीएम? हिमालय क्षेत्र की जनता को धीमे जहर से मारा जा रहा है!

उत्तराखंड अलग राज्य बनने से माफिया राज कायम है तो देहरादून का माफिया जब गैरसैण से पहाड़ और मैदान पर राज करेगा तो उनके विकास का मॉडल यही होगा।

पलाश विश्वास
2018-05-11 22:16:07
अफसोस शिवराम और महेंद्र नेह भी पार्टी से निकाल दिए गए और कामरेडों ने उन्हें सव्यसाची के साथ भुला दिया
अफसोस, शिवराम और महेंद्र नेह भी पार्टी से निकाल दिए गए और कामरेडों ने उन्हें सव्यसाची के साथ भुला दिया

शिवराम ने तब नुक्कड़ नाटक लिखे और खेले जब हिंदी में गुरशरणसिंह और सफदर हाशमी की कोई चर्चा नहीं थी। यहीं नहीं हिंदी में नुक्कड़ नाटक आंदोलन में शि...

हस्तक्षेप डेस्क
2018-05-11 00:54:54
अगर वामपंथ को वामपंथियों ने न हराया होता तो हिंदुत्व की राजनीति वैसे ही हाशिये पर होती जैसे आज वामपंथी हैं
अगर वामपंथ को वामपंथियों ने न हराया होता तो हिंदुत्व की राजनीति वैसे ही हाशिये पर होती जैसे आज वामपंथी हैं

लेफ्ट को नहीं लेफ्ट के कुलीन वर्चस्ववादी नेतृत्व को टार्गेट कर रहे

पलाश विश्वास
2018-05-09 14:35:14
झारखंड को लालखंड बनाना चाहते थे एके राय और उनकी सबसे बड़ी ताकत कोलियरी कामगार यूनियन थी
झारखंड को लालखंड बनाना चाहते थे एके राय और उनकी सबसे बड़ी ताकत कोलियरी कामगार यूनियन थी

महाश्वेता देवी के धनबाद के दो घनिष्ठ लोगः कामरेड एके राय और मैं

पलाश विश्वास
2018-05-08 21:33:50
पलायन रुकेगा नहीं और अब बाजार और सत्ता का माफिया गठजोड़ पहाड़ियों को पहाड़ से खदेड़ने वाला है आप क्या रोक सकेंगे
पलायन रुकेगा नहीं और अब बाजार और सत्ता का माफिया गठजोड़ पहाड़ियों को पहाड़ से खदेड़ने वाला है? आप क्या रोक सकेंगे?

तराई में शहरीकरण और औद्योगीकीकरण से कारपोरेट घरानों को ही एकतरफा फायदा हुआ। इसकी भारी कीमत किसानों को चुकानी पड़ी है तराई के किसान थोक भाव से अपन...

पलाश विश्वास
2018-05-07 13:51:14
साम्यवाद के बुनियादी लक्ष्य साम्यवादी विचारधारा और बाबासाहेब के जाति के विनाश के मिशन में कोई बुनियादी फर्क नहीं
स्वास्थ्य और चिकित्सा रोजगार और आजीविका बुनियादी जरुरतें और सेवाएं हमारे लिए कोई मुद्दा नहीं
स्वास्थ्य और चिकित्सा, रोजगार और आजीविका, बुनियादी जरुरतें और सेवाएं हमारे लिए कोई मुद्दा नहीं

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में किसी जिन्ना की तस्वीर को लेकर जितना घमासान है,उसके मुकाबले थोड़ा सा ध्यान प्रकृति और पर्यावरण, खेती और किसानों, ...

पलाश विश्वास
2018-05-04 13:43:33
बाजार के चमकते-दमकते चेहरों के मुकाबले किसी अशोक मित्र का क्या भाव
बाजार के चमकते-दमकते चेहरों के मुकाबले किसी अशोक मित्र का क्या भाव?

इतिहास के नाम पर हम मिथकों की च्रर्चा करते हैं। इतिहास लेखन हमारी विरासत नहीं है। इतिहास की चर्चा करने पर हम सीधे वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महा...

पलाश विश्वास
2018-05-03 21:40:58