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सब कुछ निजी हैं तो धर्म और धर्मस्थल क्यों सार्वजनिक हैं वहां राष्ट्र और राजनीति की भूमिका क्यों होनी चाहिए
सब कुछ निजी हैं तो धर्म और धर्मस्थल क्यों सार्वजनिक हैं? वहां राष्ट्र और राजनीति की भूमिका क्यों होनी चाहिए?

भूमंडलीकरण के दौर में भी इस महादेश के नागरिक उसी दंगाई मानसिकता के शिकंजे में हैं, जिससे उन्हें रिहा करने की कोई सूरत नहीं बची। तभी से विस्थापन क...

पलाश विश्वास
2017-11-22 14:03:44
खोज रहा हूं खोया हुआ गांव मैदान पहाड़ अपना खेत। अपनी माटी।
खोज रहा हूं खोया हुआ गांव, मैदान, पहाड़, अपना खेत। अपनी माटी।

सारे चेहरे कारपोरेट हैं।गांव,देहात,खेत खलिहान,पेड़ पहाड़ सबकुछ इस वक्त कारपोरेट।भाषा भी कारपोरेट।बोलियां भी कारपोरेट। सिर्फ बची है पहचान।धर...

पलाश विश्वास
2017-11-21 14:05:23
शंबूक हत्या सीता की अग्निपरीक्षा और उनका वनवास उत्तर कांड हटाकर संघ परिवार करेगा रामजी का शुद्धिकरण
शंबूक हत्या, सीता की अग्निपरीक्षा और उनका वनवास, उत्तर कांड हटाकर संघ परिवार करेगा रामजी का शुद्धिकरण !!!

त्ता की राजनीति के तहत रामकथा भी इतिहास संशोधन कार्यक्रम में शामिल है। साहित्य और कला की स्वतंत्रता तो प्रतिबंधित है ही। अब साहित्य और संस्कृति क...

पलाश विश्वास
2017-10-03 22:05:06
हिंदू राष्ट्र का यह धर्मोन्माद किसान आदिवासी स्त्री और दलितों के खिलाफ इसे हम सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ समझने की भूल कर रहे
हिंदू राष्ट्र का यह धर्मोन्माद किसान, आदिवासी, स्त्री और दलितों के खिलाफ इसे हम सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ समझने की भूल कर रहे

वंदेमातरम् की मातृभूमि अब विशुद्ध पितृभूमि है, जहां काबुलीवाला जैसा पिता कोई नहीं... रवींद्रनाथ प्रेमचंद से पहले शायद पहले भारतीय कहानीकार हैं, ज...

पलाश विश्वास
2017-09-24 22:50:03
विसर्जन  देवी नहीं है कहीं कोई देवी नहीं है देवता के नाम मनुष्यता खोता मनुष्य
विसर्जन : देवी नहीं है, कहीं कोई देवी नहीं है, देवता के नाम मनुष्यता खोता मनुष्य

मनुष्यता के खिलाफ पशुता का महोत्सव है यह धर्मोन्माद। देवी कहीं नही है। जो है वह मनुष्यता है। जो है वह सत्य और सुंदर है। जो है वह मनुष्य ...

पलाश विश्वास
2017-09-23 23:54:26
अंधेर नगरी में सत्यानाश फौजदार का राजकाज रवींद्र प्रेमचंद के बाद निशाने पर भारतेंदु
अंधेर नगरी में सत्यानाश फौजदार का राजकाज! रवींद्र प्रेमचंद के बाद निशाने पर भारतेंदु?

क्या वैदिकी सभ्यता का प्रतीक न होने की वजह से अशोक चक्र को भी हटा देंगे?

पलाश विश्वास
2017-09-18 23:09:20
नर्मदा बांध विरोधी आंदोलन के खिलाफ दैवी सत्ता का आवाहन हिटलर की आर्य विशुद्धता का सिद्धांत और नरहसंहार कार्यक्रम
नर्मदा बांध विरोधी आंदोलन के खिलाफ दैवी सत्ता का आवाहन, हिटलर की आर्य विशुद्धता का सिद्धांत और नरहसंहार कार्यक्रम

भारत के नस्ली राष्ट्रवादियों का हिटलर और जर्मनी के साथ नाभिनाल का संबंध रहा है.... हम मजहबी राजनीति में इस तरह जनसमुदायों को वोटबैंक राजनीति के त...

पलाश विश्वास
2017-09-17 23:41:52
राजसत्ता धर्मसत्ता राष्ट्रवाद और शरणार्थी समस्या के संदर्भ में रोहिंग्या मुसलमान और गुलामी की विरासत
राजसत्ता, धर्मसत्ता, राष्ट्रवाद और शरणार्थी समस्या के संदर्भ में रोहिंग्या मुसलमान और गुलामी की विरासत

भारत में राजसत्ता इसी नस्ली वर्चस्व के राष्ट्रवाद के कारण धर्मसत्ता में तब्दील है और यूरोप का मध्यकालीन बर्बर धर्मयुद्ध भारत के वर्तमान और भविष्य...

पलाश विश्वास
2017-09-17 22:35:00
महिमामंडन और चरित्रहनन के शिकार रवींद्रनाथ फासीवादी राष्ट्रवाद के निशाने पर रवींद्र नाथ शुरू से हैं
राष्ट्रवाद आस्था का नहीं राजनीति का मामला है इसीलिए दूध घी की नदियां अब खून की नदियों में तब्दील
राष्ट्रवाद आस्था का नहीं, राजनीति का मामला है इसीलिए दूध घी की नदियां अब खून की नदियों में तब्दील

नरसंहार संस्कृति का धर्म और राष्ट्रवाद दोनों कृषि और किसानों के खिलाफ, बोलियों, भाषाओं और संस्कृतियों की साझा विरासत के खिलाफ है। मुक्बाजार में ध...

पलाश विश्वास
2017-09-11 23:58:08
क्या यह हत्यारों का देश है गौरी लंकेश की हत्या के बाद 25 कन्नड़ द्रविड़ साहित्यकार निशाने पर
क्या यह हत्यारों का देश है? गौरी लंकेश की हत्या के बाद 25 कन्नड़, द्रविड़ साहित्यकार निशाने पर!

सत्य, अहिंसा और प्रेम का भारत तीर्थ अब हत्यारों का देश बन चुका है, जिसमें भारतवासी वही है जो हत्यारा है, बाकी कोई भारतवासी हैं ही नहीं।

पलाश विश्वास
2017-09-12 00:00:16
भारतमाता का दुर्गावतार नस्ली मनुस्मृति राष्ट्रवाद का प्रतीक है तो महिषासुर वध आदिवासी भूगोल का सच
भारतमाता का दुर्गावतार नस्ली मनुस्मृति राष्ट्रवाद का प्रतीक है तो महिषासुर वध आदिवासी भूगोल का सच

किसानों की अपनी जमीन छिन जाने के बारे में रवींद्र नाथ की लिखी कविता दो बीघा जमीन आज भी मुक्तबाजारी कारपोरेट हिंदुत्व की नरसंहारी संस्कृति का सच ह...

पलाश विश्वास
2017-09-03 23:39:09
सभ्यता का संकट  फर्जी तानाशाह बहुजन नायक नायिकाओं का सृजन और विसर्जन मनुस्मृति राजनीति की सोशल इंजीनियरिंग है
सभ्यता का संकट : फर्जी तानाशाह बहुजन नायक नायिकाओं का सृजन और विसर्जन मनुस्मृति राजनीति की सोशल इंजीनियरिंग है

बहुजनों की आस्था, उनके धर्म और उनके राजनीतिक स्वायत्ता के इन आंदोलनों को बाबा बाबियों के तानाशाह रंगीला दूल्हा दुल्हनों के हवाले करने की कारपोरेट...

पलाश विश्वास
2017-09-01 19:34:05
राम के नाम रामराज्य का स्वराज अब भगवा आतंकवाद में तब्दील है।
राम के नाम रामराज्य का स्वराज अब भगवा आतंकवाद में तब्दील है।

यह भारतीय इतिहास और भारतीय संस्कृति और भारतवर्ष की परिकल्पना के खिलाफ एक अक्षम्य युद्ध अपराध है।

पलाश विश्वास
2017-08-29 23:12:41
क्यों नस्ली नाजी फासीवाद के निशाने पर थे गांधी और टैगोर हिटलर समर्थक हिंदुत्ववादियों ने की थी टैगोर की हत्या की साजिश
क्यों नस्ली नाजी फासीवाद के निशाने पर थे गांधी और टैगोर? हिटलर समर्थक हिंदुत्ववादियों ने की थी टैगोर की हत्या की साजिश

हिटलर समर्थक हिंदुत्ववादियों ने 1916 में ही अमेरिका में रवींद्रनाथ की हत्या की साजिश की थी क्योंकि बौद्धमय भारत के मूल्य और आदर्श, बहुलता विवि...

पलाश विश्वास
2017-08-31 12:43:54
पुरखों के भारतवर्ष की हत्या कर रहा है डिजिटल हिंदू कारपोरेट सैन्य राष्ट्र
पुरखों के भारतवर्ष की हत्या कर रहा है डिजिटल हिंदू कारपोरेट सैन्य राष्ट्र!

कारपोरेट फंडिंग से चलने वाली राजनीति क्या कारपोरेट नस्ली वर्चस्व के डिजिटल इंडिया के खिलाफ नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हक में खड़े होने की हिम्...

पलाश विश्वास
2017-08-24 22:40:26
मजहबी सियासत के हिंदुत्व एजंडे से मिलेगी आजादी स्त्री को
मजहबी सियासत के हिंदुत्व एजंडे से मिलेगी आजादी स्त्री को?

सारा खेल मनुस्मृति के स्थाई बंदोबस्त को भारत के संविधान, कानून के राज और लोकतंत्र को खत्म करने के लिए चल रहा है तो समझा जा सकता है कि मजहबी सियास...

पलाश विश्वास
2017-08-24 00:03:00
समूचे रवींद्र साहित्य पर बौद्धमय भारत की अमिट छाप
समूचे रवींद्र साहित्य पर बौद्धमय भारत की अमिट छाप

समूचे रवींद्र साहित्य की दिशा और समूची रवींद्र रचनाधर्मिता,  उनकी जीवनदृष्टि पर उसी बौद्धमय भारत की अमिट छाप है। विस्थापन का शिकार है हिमालय और ह...

पलाश विश्वास
2017-08-21 17:12:42