हस्तक्षेप > स्तम्भ > समय संवाद
क्या हम सचमुच गाँधी का देश हैं  हथियारबंद पुलिस के साए में रोहिंग्या समुदाय के समर्थन में उपवास
क्या हम सचमुच गाँधी का देश हैं : हथियारबंद पुलिस के साए में रोहिंग्या समुदाय के समर्थन में उपवास

इन्हें नवउदारवादी लूट में अपना हिस्सा बरकरार रखना है. अगर 2019 में मोदी फिर जीत जाते हैं तो ये खुलेआम आरएसएस को कहेंगे हम बाँट कर खाने को तैयार ह...

डॉ. प्रेम सिंह
2017-09-17 15:37:40
संविधान-विरोधी तत्व सत्ता छोड़ो रैली
'संविधान-विरोधी तत्व सत्ता छोड़ो' रैली

50वीं सालगिरह 9 अगस्त 1992 को पड़ी. यह वह समय था जब संविधान की मूल संकल्पना के बरखिलाफ देश में नवसाम्राज्यवाद का दरवाजा खोलने वाली नई आर्थिक नीतिय...

डॉ. प्रेम सिंह
2017-08-06 08:47:11
big breaking - नीतीश कुमार और शरद यादव  क्या बिछड़ेगी जोड़ी
Big breaking - नीतीश कुमार और शरद यादव : क्या बिछड़ेगी जोड़ी!

नीतीश कुमार ने मोदी-शाह की जोड़ी (भाजपा में वह आंतरिक लोकतंत्र नहीं बचा जिसके लिए वह कांग्रेस के बरक्स जानी जाती थी) के साथ जो भी डील की, उसका उन...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-07-30 15:46:29
सत्ता के सेकुलर  2002 में भी नीतीश मोदी के साथ ही थे
सत्ता के सेकुलर : 2002 में भी नीतीश मोदी के साथ ही थे

​​​​​​​'परजीवी और अवसरवादी' नेता हैं नीतीश

अतिथि लेखक
2017-07-28 08:25:43
जब तक rss-bjp का नफरत फैलाने का अभियान चलेगा भारत चीन के सामने नहीं खड़ा हो सकता
जब तक RSS-BJP का नफरत फैलाने का अभियान चलेगा भारत चीन के सामने नहीं खड़ा हो सकता

वर्तमान मोदी सरकार की आक्रामक कश्मीर नीति उसे चीन से टकराव तक ले गई है। चीन भारत की चारों ओर से घेराबंदी करता जा रहा है

डॉ. प्रेम सिंह
2017-07-18 23:01:51
रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के निहितार्थ  संघ को संविधान को तोड़ने-मरोड़ने में सुविधा होगी
रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के निहितार्थ : संघ को संविधान को तोड़ने-मरोड़ने में सुविधा होगी

जिस तरह हिंदू-राष्ट्र नवउदारवाद के पेट में फलता-फूलता है, ज्यादातर दलित और पिछड़े बुद्धिजीवी नवउदारवादी व्यवस्था के भीतर ही अपनी सत्ता कायम करने क...

डॉ. प्रेम सिंह
2017-07-05 17:08:20
नवउदारवादी नीतियों के समर्थक भीड़ हत्याएं नहीं रोक सकते
नवउदारवादी नीतियों के समर्थक भीड़ हत्याएं नहीं रोक सकते

नवउदारवादी नीतियों के समर्थक, चाहे वे नेता हों या सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट, भीड़ हत्याएं नहीं रोक सकते. साम्प्रदायिकता शुरू से ही पूंजीवादी कब्जे ...

डॉ. प्रेम सिंह
2017-07-03 11:51:44
संविधान नहीं नवउदारवाद का अभिरक्षक राष्ट्रपति
संविधान नहीं नवउदारवाद का अभिरक्षक राष्ट्रपति

राष्ट्रपति का चुनाव भी उसी अंधी दौड़ की भेंट चढ़ चुका है। राष्ट्रपति संविधान का अभिरक्षक कहलाता है, लेकिन पूरी चर्चा में वह नवउदारवाद के अभिरक्षक क...

डॉ. प्रेम सिंह
2017-06-20 17:19:38
सेज पूंजीवादी साम्राज्यवाद के तरकस से निकला एक और तीर जिसे भारत माता की छाती बेधने के लिए चलाया
सेज पूंजीवादी साम्राज्यवाद के तरकस से निकला एक और तीर, जिसे भारत माता की छाती बेधने के लिए चलाया

जमीन लेंगे ... और जान भी...जमीन हथियाने वालों में छोटे-बड़े बिल्डरों से लेकर देशी-विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। भारत की सरकारें उनके दला...

डॉ. प्रेम सिंह
2017-06-12 22:09:41
कारपोरेट पालिटिक्‍स का दौर है घटियापन और बढ़ेगा
कारपोरेट पालिटिक्‍स का दौर है, घटियापन और बढ़ेगा

कारपोरेट पालिटिक्‍स का दौर है, घटियापन और बढ़ेगा यह तानाशाही की तरफ ले जाने वाला रास्‍ता है साम्राज्‍यवाद से बड़ा कोई फासीवाद नहीं

अतिथि लेखक
2017-06-27 22:44:47