अच्छे दिन : जिस फैज़ को भारत का एजेंट होने के आरोप में जेल हुई, हमने उसकी बेटी को बेइज्जत कर के बाहर कर दिया

सारी दुनिया जब मदर्स डे मनाया रही थी तब हमने अपनी एक बेटी को बेइज्जत कर के बाहर कर दिया और अपनी पीठ ठोंक रहे हैं कि 72 साल की यह 'लड़की' हमारी दुश्मन है इसके बटुए में एक कलम है और मुह में जुबान रखती है

चंचल
Updated on : 2018-05-14 14:24:36

कल सारी दुनिया जब मदर्स डे मनाया रही थी तब हमने अपनी एक बेटी को बेइज्जत कर के बाहर कर दिया

चंचल

मोनिजा जी।

अदब के साथ हम आपसे मुआफी मांग रहे हैं। इसलिए नही कि हम आपसे खौफ खाते हैं या आपके रुआब से सहमे हुए हैं। कल सारी दुनिया जब मदर्स डे मनाया रही थी तब हमने अपनी एक बेटी को बेइज्जत कर के बाहर कर दिया और अपनी पीठ ठोंक रहे हैं कि 72 साल की यह ' लड़की' हमारी दुश्मन है, इसके बटुए में एक कलम है और मुह में जुबान रखती है। अब आप सोचिए यह अकेली जान कितनी खतरनाक हो सकती है गो कf इसके पास न फौज है, न ही फौजी मिजाज है। यह जिस बाप की बेटी है उनका नाम दुनिया के रजिस्टर में दर्ज है फैज अहमद फैज। उस फैज के पास मजबूरों, मजलूमों, के लिए कुछ और था या नहीं पर हिम्मत देनेवाले अल्फाज थे, उन अल्फाजो ने फैज को किसी एक मुलका तक महदूद नही रखा, किसी एक घर के मुखिया के रूप में चार दीवारी में कैद नही किया किसी एक भाषा का मोहताज नहीं रहा, सीमाएं तोड़ कर, चारदीवारी भसका कर वह आजाद हो गया था। अनगिनत भाषाएं उसे अपनी गोद मे उठा लेती थी जब वह बोलता रहा कि बोल कि लव आजाद हैं तेरे। या लौहे अजल पर लिखा है। यह मोनिजा ' उसी' फैज की बेटी है।

जब हम 'उसी' को गाढ़ा करके बोल रहे हैं तब फैज की वह शख्सियत सामने आती है जिसे मुतवातिर पाकिस्तान की जेल दी गई और उस पर आरोप लगा भारत का एजेंट होने का। उस फैज की बेटी को कल जिस तरह वापस किया गया, हम उस रवायत पर शर्मिंदा हैं। न बुलाते। किसने जोर दिया था कि उसे बुलावो। मोनिजा को बुलाया गया। एयरपोर्ट पर भी कुछ नही हुआ। होटल जब पहुंचीं हैं तब उनसे होटल ने कहा आपका रूम कैंसिल कर दिया गया है। आयोजक महोदय आये और बेशर्मी से इतना भर कहे कि ऊपर से कहा गया है।

मोनिजा जी हम अपनी रवायत के टूट चुके फैसले पर शर्मिंदा हैं हमारा अतीत देखिए दुश्मन के भी प्रतिनिधि को कभी नकारने तक का रिवाज नहीं रहा है यहां तो हमने आपको बतौर मेहमान बुलाया था।

सुषमा जी ! हम आपकी घुटन समझ रहे हैं। हम आपसे वाकिफ हैं। ऊपर वाला अगर है कहीं तो आपको यह शक्ति दे कि आप जिस रवायत की हामी रही हैं उसी के बरख़िलाफ़ आपको चुप रहना पड़ रहा है।

(चंचल जी की एफबी टिप्पणी साभार)

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