6 दिसम्बर : स्वतंत्र भारत का कलंकमय दिन

नेटमित्र आस्था के नशे में डूबे हैं उन्हें अब राममंदिर दे ही दिया जाए और एक राम मंदिर नहीं सारे देश को राम मंदिर में तब्दील कर दिया जाए।...

6 दिसम्बर : स्वतंत्र भारत का कलंकमय दिन

December 6: The scandalous day of independent India

राममंदिर में डूबे मित्र !!

जगदीश्वर चतुर्वेदी

आज 6दिसम्बर है। यह स्वतंत्र भारत का कलंकमय दिन है। आज के ही दिन 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई गई। जब यह मस्जिद गिराई गई तो मसजिद गिराने वालों ने एक ऐतिहासिक मसजिद को नष्ट किया, हमारे देश के संविधान और कानून की अवमानना की। इसके अलावा उस दिन अकेले अयोध्या में 14 मुसलमान मारे गए, 267 घर जलाए गए या तोड़े गए, 19मजार और मदरसों को क्षतिग्रस्त किया गया, 4500 मुसलमानों को अयोध्या छोड़कर भागना पड़ा। इसके अलावा देश के विभिन्न इलाकों में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क उठी। दुखद यह है कि जिन संगठनों ने यह सब काण्ड किया उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

हमारे अनेक नेटमित्र आज राममंदिर की आस्था में डूबे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि वे राम-राम जपते-जपते इस भवसागर को आसानी से पार कर जाएंगे। आस्था को इन लोगों ने तर्क, विज्ञान, आधुनिक न्याय, संविधान आदि सबसे ऊपर स्थान दिया है।

आस्था के आधार पर आम लोगों को बेबकूफ बनाने में लगा है संघ परिवार

संघ परिवार आस्था के आधार पर आम लोगों को बेबकूफ बनाने में लगा है, मेरे नेटमित्र आस्था के नशे में डूबे हैं उन्हें अब राममंदिर दे ही दिया जाए और एक राम मंदिर नहीं सारे देश को राम मंदिर में तब्दील कर दिया जाए।

देश की सारी जनता से कहा जाए कि वह अपने घर, इमारत, स्कूल, कॉलेज-विश्वविद्यालय, न्यायालय, विज्ञान की प्रयोगशालाएं आदि सबको राम मंदिर में तब्दील कर दे। जनता सड़कों पर रहे, खुले आसमान के नीचे रहे। हम सबके घरों को भव्य राम मंदिरों में रूपान्तरित कर दिया जाए।

संघ परिवार और रामभक्तों को इस देश में प्रत्येक इमारत को भव्य राम मंदिर में रूपान्तरित करने का जिम्मा दे दिया जाए। सारा देश राम का है और रामभक्तों का है। राम और राम भक्तों को तो भारत में सिर्फ राममंदिर चाहिए चाहे उसके लिए कोई भी कीमत देनी पड़े। वे बच्चों की तरह राम लेंगे -राम लेंगे की रट लगाए हुए हैं। हम चाहते हैं कि इस प्रस्ताव पर सभी रामभक्त गंभीरता से सोचकर जबाब दें कि देश की सभी इमारतों को भव्य राम मंदिर में रूपान्तरित क्यों न कर दिया जाए।

हम अब न कुछ पैदा करेंगे, न ज्ञान की बातें करेंगे, न रेशनल बातें करेंगे, न विज्ञान की चर्चा करेंगे, हम न पढ़ेंगे ओर न लिखेंगे। इंटरनेट, टीवी,रेडियो आदि का धंधा भी बंद कर दिया जाए सिर्फ राम धुन होगी, राम की इमेज होगी। अधिक से अधिक सरसंघचालक के कुछ अमरवचन होंगे जिन्हें हम सुनेंगे और धन्य हो धन्य हो, कहेंगे। आस्था में राम हैं। सारे वातावरण में राम हैं। यह देश राम का है और राम के अलावा इस देश में किसी भी देवी-देवता और मनुष्य की आस्था का कोई महत्व नहीं होगा। राम के प्रति आस्था के खिलाफ कोई अगर जुबान खोलेगा तो उसका वध होगा। राम हमारी राष्ट्रीय आस्था के प्रतीक हैं अब आगे से हम राम का ही उत्पादन और पुनरूत्पादन करेंगे।

राम घरों में रहेंगे मनुष्यों घरों के बाहर रहेगें। वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, वकीलों, न्यायाधीशों, अध्यापकों, आस्तिकों-नास्तिकों, नागरिकों और सभी किस्म के पेशवर लोगों को उनके धंधे से हटा दिया जाएगा अब आगे से हम सिर्फ आस्था खाएंगे, आस्था पीएंगे आस्था में जीएंगे। अब इस देश में सिर्फ रामभक्त रहेंगे। जो रामभक्त नहीं हैं वे अपने लिए अन्य देश खोज लें और हमारे राम जो भारत के बाहर अन्य देशों में चले गए हैं वहां से हम सभी राम मूर्तियों को ले आएंगे। राम को हम विदेश में नहीं रहने देंगे।

गुस्ताखी देखो कि जब एकबार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महाज्ञानी पुरातत्व विशेषज्ञों ने बता दिया और उस पर लखनऊ न्यायालय के न्यायसंपन्न न्यायाधीशों ने मुहर लगा दी कि राम का जन्म कहां हुआ था तो इस बात को तो दुनिया की अब तक की सबसे महान खोज मान लिया जाना चाहिए और जो लोग नहीं मान रहे हैं उनकी व्यवस्था वैसे ही की जाए जैसी रामजी ने राक्षसों की की थी।

हमें खुश होना चाहिए कि हमारा देश सिर्फ राम का है यहां राम और रामभक्तों के अलावा किसी की नहीं चलेगी। हमारे यहां संसद, अदालत, संविधान और उसमें प्रदत्त नागरिक अधिकारों का अब कोई महत्व नहीं है, अब राम हमारे देश में जन्म ले चुके हैं और हमें उन सैंकड़ों-हजारों किताबों को आग के हवाले कर देना है जो राम के विभिन्न किस्म के रूपों की चर्चा करती हैं। उन विद्वानों को रामभक्तों की कैद में ड़ाल देना है जो राम को नहीं मानते, रामजन्म को नहीं मानते।

अयोध्या को तो अब रामभक्त एकदम स्वर्ग बनाकर छोडेंगे और भारत को रामराज्य और स्वर्गलोक। हम चाहते हैं कि रामभक्त और संघ जल्द से जल्द मिशन राम मंदिर को सारे राष्ट्र में साकार करें। हो सके तो रातों -रात रामजी से मिलकर सभी इमारतों को राममंदिर में तब्दील करा दें। जब देश राम और देशवासी राम के तो किसी तर्क, विवेक, विज्ञान, न्याय आदि के आधार पर सोचना नहीं चाहिए।

जय श्री राम।

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