NRC : अतिवादी संगठनों को हिंसा का लाइसेंस तो मिल ही गया, इतिहास की सबसे बड़ी मानव त्रासदी की भूमि भी तैयार

जिन 40 लाख लोगों को अब तक भारत का नागरिक नहीं माना गया है उनमें सेना के भूतपूर्व अधिकारी, कारगिल में शहीद जवान का परिवार, पूर्व विधायक, अध्यापक, पत्रकार शामिल हैं। इनमें लाखों बंगला भाषी हिंदू भी हैं...

NRC : अतिवादी संगठनों को हिंसा का लाइसेंस तो मिल ही गया, इतिहास की सबसे बड़ी मानव त्रासदी की भूमि भी तैयार

मसीहुद्दीन संजरी

केंद और असम भाजपा सरकारों की देखरेख में एनआरसी ने अपना काम पूरा कर लिया है। जिन चलीस लाख लोगों को अब तक भारत का नागरिक नहीं माना गया है उनमें सेना के भूतपूर्व अधिकारी, कारगिल में शहीद जवान का परिवार, पूर्व विधायक, अध्यापक, पत्रकार शामिल हैं। हद तो यह है कि एक ही परिवार के कुछ लोग नागरिक हैं और कुछ बंगलादेशी। इनमें लाखों बंगला भाषी हिंदू भी हैं लेकिन पिछले दरवाज़े से उन्हें नागरिकता देने की व्यवस्था की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस सिलसिले में सरकार से कोई कठोर कदम न उठाने को कहा है। लेकिन अतिवादी संगठनों को हिंसा का लाइसेंस तो मिल ही गया है। इतिहास की सबसे बड़ी मानव त्रासदी की भूमि तैयार है।

इन नागरिकों को शायद बंगलादेश भी नहीं अपनाए। ममता बनर्जी ने इन्हें बंगाल में बसाने की बात कही है। लेकिन क्या आज़ादी के बाद का यह सबसे बड़ा एकतरफा पलायन या विस्थापन संभव हो पाएगा? क्या इनकी नागरिकता छीन कर इन्हें पीढ़ियों तक कैम्पों में रखा जाएगा? क्या जर्मनी को भी पीछे छोड़ देने वाला इतिहास अपने को फिर दोहराएगा? यह सब भविष्य के गर्भ में है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की भूमिका इसमें अहम होगी हालांकि कि वह कुछ कर पाएगी इसमें संदेह है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब तक खामोश है। शायद उसकी भूमिका भी हितों की राजनीति ही तय करे।

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