एक सौ एक साल पहले जब दुनिया हिल उठी

फ़्रांसीसी क्रांति के बाद विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना 1917 में रूस की नवंबर क्रांति थी।...

एक सौ एक साल पहले जब दुनिया हिल उठी

फ़्रांसीसी क्रांति के बाद विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना 1917 में रूस की नवंबर क्रांति थी।

French Revolution & Russia's November Revolution

उज्ज्वल भट्टाचार्य

पहली बार विश्व इतिहास में एक राज्यसत्ता का जन्म हुआ, जिसने सारे सामाजिक साधनों का समूची आबादी के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार व जीवन की बुनियादी ज़रूरतों की ख़ातिर इस्तेमाल किया। जिसने इन्सानों के बीच बराबरी को अपना सिद्धान्त घोषित किया, जिसने हर देश की जनता की आज़ादी के समर्थन को अपनी विदेश नीति का लक्ष्य बनाया। जिसने युद्ध के निषेध व शांति की स्थापना को अपना राजकीय सिद्धांत घोषित किया। जिसने फ़ासीवादी दानव की हार में सबसे महत्वपूर्ण योगदान देते हुए मानवजाति को सर्वनाश से बचाया।

शुरू से ही सोवियत सत्ता को षड़यंत्रों का सामना करना पड़ा

लगभग 75 साल तक चलने के बाद यह प्रयोग विफल हो गया।

शुरू से ही इस प्रयोग को हर प्रकार के विरोध व षडयंत्र का सामना करना पड़ा। क्या इस सत्ता का पतन उस विरोध व षडयंत्रों का नतीजा था ?

सोवियत सत्ता के गठन के बाद उसे 14 देशों के हमले का सामना करना पड़ा। द्वितीय विश्वयुद्ध में फ़ासीवादी जर्मन सेना ने देश के विशाल भूभाग पर कब्ज़ा कर लिया। लेकिन प्रतिरोध सफल रहा। अंततः सोवियत संघ विजयी रहा।

जब इस सत्ता का पतन हुआ, तो वह विश्व की दो सबसे बड़ी सैनिक ताकतों में से एक थी। किसी की हिम्मत नहीं थी कि उस पर हमला किया जाय। वह अंदर से चरमराकर टूट गई।

समाजवाद के भविष्य में विश्वास का तकाज़ा है – उसकी ख़ातिर संघर्ष को आगे बढ़ाने का तकाज़ा है कि रूसी क्रांति, सोवियत समाजवाद के विकास व सोवियत संघ के पतन के कारणों पर गहराई से विचार किया जाय, उसके ऐतिहासिक महत्व और उसकी ख़ामियों को बेझिझक सामने लाया जाय।

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पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के विकल्प में समाजवाद की परिकल्पना

The idea of socialism in the substitution of capitalist production system

कामगार काम करता है, मालिक के हुक़्म पर। अपने काम के नतीजों पर उसका नहीं, मालिक का हक़ होता है। उसे पगार मिलती है, और उसके काम का बाक़ी फ़ायदा मुनाफ़े की शक्ल में मालिक का हो जाता है। अपने उत्पाद से अलगाव, और इसकी वजह से अपने काम से अलगाव।

अपने प्रारंभिक लेखन में ही मार्क्स ने पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली में इस अन्दरूनी टकराव को सामने लाया था। इसके विकल्प के रूप में समाजवाद की परिकल्पना पेश की गई, जिसमें काम और मालिकाने के बीच यह विरोध ख़त्म किया जाना था। इसका पहला प्रयोग रूसी क्रांति के बाद बने सोवियत संघ में किया गया। क्या यह विरोध दूर हुआ ?

अक्टूबर क्रांति के नारे

Slogans of the October Revolution

दो नारों के साथ अक्टूबर क्रांति की शुरूआत हुई। ये थे शांति और ज़मीन के सवाल। नवस्थापित क्रांतिकारी सत्ता ने पहले विश्वयुद्ध में अपने देश की भागीदारी समाप्त कर दी। देश के अंदर ज़ार समर्थक ह्वाइट गार्ड से लड़ाई जारी थी, और 14 देशों ने रूस पर हमला बोल दिया। दोनों मोर्चों पर अंततः क्रांतिकारी सत्ता की जीत हुई।

किसानों में ज़मीन बांटी गई, उनके बेहतर प्रबंधन के लिये सहकारी फ़ार्म (कोलखोज़) बनाए गए। इसके साथ-साथ राजकीय फ़ार्म (सोवखोज़) भी बनाए गए। औद्योगिक उत्पादन में सामाजिक, यानी राजकीय स्वामित्व का सिद्धांत लागू किया गया। एक देश में समाजवाद के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए उद्योग व कृषि में निजी मालिकाने के आधार को ख़त्म किया गया।

दो कदम आगे एक कदम पीछे

Two steps forward, one step back

तस्वीर का दूसरा पहलू : उथलपुथल के इस दौर में क्रांति से पहले अनाज का निर्यात करने वाले रूस में भारी खाद्याभाव हो गया। औद्योगिक उत्पादन गिरने लगा। जल्द ही पता लगा कि क्रांतिकारी भावना काफ़ी नहीं है, हर क़ीमत पर आर्थिक विकास को प्राथमिकता देनी पड़ेगी। नई आर्थिक नीति (नेप) लाई गई, जिसमें पूंजीवादी उत्पादन के कई तत्व शामिल थे।

नवंबर 1917 November, 1917 में शांति और ज़मीन के सवाल पर क्रांति हुई। एक देश में समाजवाद के सिद्धांत Theories of socialism के साथ एक क़दम आगे बढ़कर समाजवाद का एजेंडा स्थापित किया गया। फिर नई आर्थिक नीति या नेप के साथ दो क़दम पीछे हटा गया।

इस पूरी प्रक्रिया में एक बात को लगातार वरीयता दी गई : राज्य व समाज में बोलशेविक पार्टी के वर्चस्व को बढ़ाया जाता रहा। अन्य दल विलुप्त होते गए या उन्हें दबा दिया गया। क्रांतिकारी सत्ता के खिलाफ़ हथियार उठाने वालों को तो हथियारों से कुचला गया, लेकिन अन्य विरोधियों से राजनीतिक तरीकों से निपटा गया। इस दौर में विरोधियों पर दमनचक्र नहीं चलाया गया।

लेकिन पूंजीवादी अलगाव के स्थान पर एक दूसरा अलगाव पैदा हो रहा था, विकसित हो रहा था। उत्पादन प्रणाली व प्रशासन को नई सत्ता की नौकरशाही की जकड़ में लाना, उस नौकरशाही को पार्टी की जकड़ में लाना, पार्टी को शीर्ष नेतृत्व की जकड़ में लाना। किसानों को ज़मीन दी गई, लेकिन सहकारिता व उस पर प्रशासनिक जकड़ के ज़रिये व्यवहारतः वह ज़मीन फिर से छीन ली गई। यह प्रक्रिया लेनिन के नेतृत्व में ही शुरू हो चुकी थी। यह स्तालिनवाद का आधार था।

लेनिन के जीवनकाल में ही स्तालिन पार्टी के महासचिव बने। अब तक यह पद राजनीतिक पद नहीं, प्रशासनिक पद हुआ करता था। अब पोलिट ब्यूरो के वर्चस्व के स्थान पर महासचिव व उनके अधीन नौकरशाही के वर्चस्व का दौर शुरू हुआ।

लेनिन की मृत्यु

Lenin's death

जनवरी, 1924 में लेनिन की मौत हो गई। 1928 तक क्रांति का नेतृत्व करने वाले पोलिट ब्यूरो के (दो के अलावा) सभी सदस्यों का सफ़ाया किया जा चुका था।

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