रामचंद्र गुहा की नई किताब और किताबों की कीमत का सवाल

यह सच है कि हिंदी की किताबों की कम बिक्री उसकी कीमतों को प्रभावित करती है। लेकिन किताब की अधिक कीमत उसकी बिक्री को भी बाधित करती है। ...

रामचंद्र गुहा की नई किताब और किताबों की कीमत का सवाल

अरुण माहेश्वरी

रामचंद्र गुहा की चंद रोज पहले प्रकाशित किताब - Gandhi : the years that changed the world (1914-1948) अमेजोन से मंगाई। 1130 पन्नों की यह एक भारी-भरकम किताब है जिसमें निश्चित रूप से गुहा ने एक योग्य इतिहास लेखक का परिचय देते हुए चौंतीस साल के इस दुनिया के युगांतकारी कालखंड का बहुत ही पठनीय आख्यान रचा होगा। इस पर ठोस रूप में कोई भी चर्चा इसके पन्नों से गुजरने के बाद ही की जा सकती है। लेकिन अभी हमें इसकी चर्चा इसलिये जरूरी लगी क्योंकि इतनी मोटी, हार्ड बाउंड की इस ताजतरीन किताब की कीमत 999.00 रुपये है जो अमेजोन के माध्यम से हमें 689.00 रुपये में मिली है।

यह किताब अगर हिंदी में प्रकाशित होती तो आज के हिंदी के प्रमुख प्रकाशकों की मूल्य नीति के अनुसार इसकी कीमत किसी भी पाठक को 2000.00 से कम नहीं पड़ती। हम लोगों की ही 500-600 पन्नों की किताब का दाम हजार रुपया रखा जाता है।

इस पर प्रकाशक से चर्चा करने पर उनका पहला सवाल होता है कि आपकी किताब बिकती कितनी है ? और इस पहले सवाल पर ही यह चर्चा खत्म भी हो जाती है।

यह सच है कि हिंदी की किताबों की कम बिक्री उसकी कीमतों को प्रभावित करती है। लेकिन किताब की अधिक कीमत उसकी बिक्री को भी बाधित करती है। इसीलिये किताबों के बाजार को प्रसारित करने में प्रकाशकों से एक बड़ी भूमिका की स्वाभाविक अपेक्षा रहती है।

बांग्ला में भी हिंदी से काफी कम होती है किताबों की कीमत

बहरहाल, पाठक के लिये कीमत की इस बाधा को दूर करने के लिये हिंदी के कुछ प्रकाशकों ने पेपरबैक संस्करणों के प्रकाशन और उनकी कीमतों में काफी कटौती करने की तरह के सकारात्मक कदम उठाने शुरू किये हैं, जो बहुत स्वागतयोग्य हैं। अंग्रेजी की तरह ही बांग्ला में भी किताबों की कीमत हिंदी से काफी कम होती है।

हम चाहेंगे कि प्रकाशक इस बात पर भी विचार करें कि पेपरबैक और हार्डबाउंड किताबों की कीमतों में जो इतना बड़ा फर्क है, उसे खत्म किया जाए। यह फर्क किसी भी तर्क पर वाजिब नहीं लगता है, सिवाय इसके कि पुस्तकालयों में होने वाली खरीद के लिये प्रकाशक को काफी अतिरिक्त रकम घूस आदि के लिये चुकानी पड़ती है ! भ्रष्टाचार का प्रतिरोध करके इससे आराम से बचा जा सकता है।

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