चप्पा चप्पा येदुइरप्पा : आप क्या सोचते हैं, सुप्रीम कोर्ट इन्हें मुख्यमंत्री बनने से रोक सकता है?

लोकायुक्त ने अपनी जांच में पाया था कि मुख्यमंत्री स्वयं भी अवैध खनन गतिविधियों में लिप्त थे। लोकायुक्त की रिपोर्ट में औरों के साथ उनका नाम भी था।...

आशुतोष कुमार

श्री येदुइरप्पा को राजगद्दी मुबारक़।

श्री येदुइरप्पा पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं। लेकिन सन 2010 में उन्हें इस पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तेइस दिन जेल में काटने पड़े थे।

लोकायुक्त ने अपनी जांच में पाया था कि मुख्यमंत्री स्वयं भी अवैध खनन गतिविधियों में लिप्त थे। लोकायुक्त की रिपोर्ट में औरों के साथ उनका नाम भी था।

बाद में ऊंची अदालतों ने उन्हें बरी कर दिया। इसलिए नहीं कि आरोप झूठे पाए गए थे।

बल्कि इसलिए कि लोकायुक्त द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए समुचित इजाज़त नहीं ली गई थी!

कर्नाटक खनन माफिया का स्वर्ग कहा जाता है। इससे जुड़े रेड्डी बंधु आज बीजेपी के प्रमुख नेतागण हैं।राजनीति में पैसे की कीमत होती है। पैसा नैतिकता बघारने से नहीं मिलता।

येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री रहते ऐसे कई प्रशासनिक फैसले किए, जिनसे जे एस डब्लयू स्टील को बहुत कमाई हुई। उनसे वसूले जानेवाले 877 करोड़ सीधे माफ कर दिए गए।

सरकारी खानों से सस्ता कच्चा लोहा मुहैया किया गया।यहां तक कि कच्चे लोहे के निर्यात पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया जिससे कि उसकी कीमत न बढ़े और जेएसडब्ल्यू स्टील को सस्ता कच्चा लोहा मिलता रहे।

इसके बदले येदुइरप्पा के बेटे और उनके पारिवारिक ट्रस्ट के खाते में चालीस करोड़ रुपए सीधे जमा करवाए गए। इन सब के दस्तावेजी प्रमाण मौज़ूद हैं। सीधा रुपैया यहां था।

उन्ही प्रमाणों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को उनके खिलाफ मुकदमा दाखिल करने का हुक्म दिया था। यह मुकदमा ठोस सबूतों के साथ कायम हुआ था।

लेकिन बाद में सीबीआइ अदालत ने ही उसे खारिज़ कर दिया। क्यों ख़ारिज कर दिया, यह कोई पूछने की बात है?

यह साबित था कि जेएसडब्ल्यू स्टील ने पैसे जमा कराए। मुख्यमंत्री के बेटे के खाते में जमा कराए। यह साबित था कि मुख्यमंत्री के फैसलों के कारण कम्पनी ने मोटी कमाई की। लेकिन यह साबित नहीं हुआ इन दोनों घटनाओं में कोई सम्बंध था!!

आप क्या सोचते हैं, सुप्रीम कोर्ट इन्हें मुख्यमंत्री बनने से रोक सकता है?

चप्पा चप्पा

येदुइरप्पा

आशुतोष कुमार की एफबी टिप्पणी

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