उत्तर प्रदेश : असफल रहा योगी का पहला बजट, काम पर भारी पड़े राम

यह बजट केन्द्रीकरण के तरफ भी एक इशारा है।  ...

मंजूर अली 

उत्तर प्रदेश में विकास के आधार पर ऐतिहासिक जीत दर्ज़ करने के बाद भाजपा का यह पहला बजट था। माल और सेवा कर बिल पास होना तथा चौदहवां वित्त आयोग के मंज़ूर सिफारिशें के सन्दर्भ में देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य के बजट से काफी उम्मीदें थी। खासकर, चौदहवां वित्त आयोग का  केंद्रीय कर में 42 फीसदी राज्यांश करने का फैसला अहम् था।  इससे यह उम्मीद लगायी गयी थीं कि राज्य सरकारें अपने तरीके से इन पैसों को खर्च करेंगी। सामाजिक क्षेत्र में ज्यादा खर्च किया जायेगा।  पिछड़े एवं कमजोर तबके के पक्ष में बजट बनाये जायेंगे। मूलतः राज्य सरकार की स्वायत्ता बरक़रार रखना था।  इस बजट ने यह मौका खो दिया।  

इस साल प्रदेश का कुल खर्च रु. 3.84 लाख करोड़ का है, जो कि पिछले साल के मुक़ाबले रु. 38,000 करोड़ ज्यादा है। और वित्तीय घाटा रु. 9,755 करोड़ का है। लेकिन राजस्व ज्यादा या कम, खर्च उम्दा है की नहीं, से भी ज्यादा महत्वपूर्ण रहा बजट की प्रस्तुति, रंग, सन्देश और दिशा। पहला, भाजपा में केंद्र सरकार का अनुसरण करते हुए, प्रदेश वित्त मंत्री बजट भाषण को एक नई दिशा में ले जाते हुए दिखे - जैसे कि अगले साल का बजट अनुमान पेश करने के अलावा अपनी उपलब्धियों की गिनती करवाना। स्वच्छता शपथ इतनों को दिलाई गयी, रोमिओ स्क़ॉड बना, एंटी-भूमाफिआ स्क़ॉड के काम को गिनवाया गया। यह सरकार के उपलब्धियां गिनने का मौका कम एवं बजट अनुमान पर बहस का ज्यादा था।

दूसरी अहम् बात, इस साल का बजट सरकार और पार्टी की विचारधारा की चासनी में लिपटी नज़र आयी। 

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने भगवान राम का उद्गार करते हुए अपनी पार्टी की उनके प्रति प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक महानता को पूरे सदन के सामने रखा और उसे संजोने के लिए धनराशि भी आबंटित की। मसलन, स्वदेश दर्शन योजना के लिए रु. 1240 करोड़, प्रसाद योजना के लिए रु. 800 करोड़, वाराणसी में सांस्कृतिक केंद्र के लिए रु. 200 करोड़, प्रदेश में हेलीकाप्टर से पर्यटन के लिए रु. 25 करोड़, विंध्यांचल में पर्यटन विकास के लिए रु. 10 करोड़, रामायण कॉन्क्लेव के लिए रु. 3 करोड़, कैलाश मानसरोवर भवन के लिए रु. 20 करोड़, अर्ध-कुम्भ मेला की तैयारी के लिए रु. 500 करोड़ की राशि दी गयी। लगभग कुल राशि रु. 2800 करोड़ है। इसके तुलना में पांच शहर में मेट्रो की शुरुवात करने के लिए मात्र रु. 288 करोड़ आबंटित किये गए। यहाँ राम, काम पर भारी पड़ते हुए दिखे।  

तीसरी बात, सरकार अल्पसंख्यकों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृति के बढ़ाने को हाईलाइट  कर रही है।  लेकिन, समुचित रूप में, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कुल बजट का तक़रीबन 19 प्रतिसत कटौती की गयी है। 2016-17 (BE) में कुल आबंटन रु. 3056 करोड़ था, जो इस साल घटकर रु. 2475.6 करोड़ है। यानि की रु. 580.4 करोड़ कम। कौशल विकास और रोजगार प्रशिक्षण योजना को कोई भी धन राशि मुहैया नहीं कराइ गयी है।  मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत मात्र रु. 345.2 करोड़ दिया गया है जो पिछले साल के मुक़ाबले रु. 135 करोड़ कम है।   

चौथा, राज्य सरकार ने अपनी योजनाओं को सुदृढ़ करने के बजाय केंद्रीय योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रिय ग्रामीण पेयजल योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे योजनाओं में पैसा ज्यादा आबंटित किया गया है। इंदिरा आवास योजना, जिसका नाम अब प्रधानमंत्री आवास योजना है, को 2017-18 (BE) में रु. 3510 करोड़ दिया गया है। केवल स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में रु. 3230 करोड़ धनराशि आबंटित है। लेकिन, राज्य सरकारी योजनाएं जैसे की, लोहिया आवास योजना को 2016-17 (BE) में रु. 1360 करोड़ की तुलना में इस साल मात्र रु. 330 करोड़ दिया गया।  समाजवादी पेंशन योजना में इस साल कोई भी आबंटन नहीं किया गया। जबकि, पिछले साल तक रु. 2308.9 करोड़ का अनुदान मिला था।    

कुल मिलाकर सरकार ने यह बजट अपने वोट बैंक तो ध्यान में रखकर किया है।  इसका सन्देश यह है कि 2019 जब लोग वोट डालने जायें तो उन्हीं योजनाओं के बारे में सोचे जो केंद्र द्वारा पोषित हैं और राज्य उन्हें कार्यान्वित कर रहा है।  इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार मात्र कार्यान्वयन एजेंसी बनकर रह जाएगी।  जैसा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा यह प्रचारित किया गया था कि अखिलेश जो विकास कर रहे हैं वो मोदी जी का पैसा है, अगर मोदी जी पैसा नहीं देते तो "काम कैसे बोलता"। 

हमें मालूम होना चाहिए कि राज्य सरकार के पास अपना राजस्व होता है, अपनी प्लानिंग होती है जिसमे उन्हें स्वायत्ता रहती है काम करने की।  यह बजट केन्द्रीकरण के तरफ भी एक इशारा है।  

मंजूर अली 

एडवाइजर,

 इंस्टिट्यूट ऑफ़ पॉलिसी स्टडीज एंड एडवोकेसी 

नई दिल्ली

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