हिंदू हृदय सम्राटों की एकता एससी/एसटी पर कहर बरपा रही है, सरकार से जुड़े निजी गुंडा संगठनों को खुली छूट दे दी गई है

आज जब हिन्दू हृदय सम्राटों की गुंडागर्दी चरम पर है तो सपा, बसपा, काँग्रेस जैसे संगठनों का पूंछ दबाकर बिल में घुसे रहना आश्चर्यचकित करता है।...

सत्येंद्र पीएस

चन्द्रशेखर रावण और उनके भीम संगठन के बारे में मुझे बहुत जानकारी नहीं है। उस संगठन के बारे में इसी वजह से कुछ नहीं लिखता क्योंकि उनकी आइडियोलॉजी क्या है, फंडिंग क्या है, मकसद क्या है, उसके बारे में कुछ नहीं जानता।

एक बात साफ है कि सरकार ने चन्द्रशेखर और उससे जुड़े संगठन के लोगों पर अत्याचार की इंतहा कर दी है। सरकार तो गुंडागर्दी कर ही रही है, उसने जेल तोड़कर भागे औऱ सांसद फूलन देवी के हत्यारे को पेरोल पर छोड़ दिया है जो खुलेआम गुंडागर्दी कर रहा है। शेर सिंह को हिन्दू हृदय सम्राट बताया जा रहा है और यूपी के मुख्यमंत्री जोगी ठाकुर भी हिन्दू हृदय सम्राट हैं।

इन हिंदू हृदय सम्राटों की एकता एससी एसटी पर कहर बरपा रही है। सरकारी अमला तो उत्पीड़न कर ही रहा है, सरकार से जुड़े निजी गुंडा संगठनों को भी खुली छूट दे दी गई है।

दिलचस्प है कि अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ अगर कोई हथियार भी उठाता (ध्यान रहे कि भीम आर्मी केवल नाम है, वो हथियारबंद संगठन नहीं) तब भी काँग्रेस उसके साथ खड़ी होती थी। भगत सिंह की पैरबी करने वालों में जवाहरलाल नेहरू और आसफ अली थे। उसी तरह जब आजाद हिंद फौज के 17,000 विद्रोहियों के खिलाफ मुकदमा चला तो कांग्रेस की डिफेंस टीम में सर तेज बहादुर सप्रू के नेतृत्व में मुल्क के उस समय के कई नामी-गिरामी वकील भूलाभाई देसाई, सर दिलीप सिंह, आसफ अली, पं॰ जवाहरलाल नेहरू, बख्शी सर टेकचंद, कैलाशनाथ काटजू, जुगलकिशोर खन्ना, सुल्तान यार खान, राय बहादुर बद्रीदास, पी.एस. सेन, रघुनंदन सरन आदि शामिल थे जो खुद इन सेनानियों का मुकदमा लड़ने के लिए आगे आए थे।

इन संगठनों से कांग्रेस का वैचारिक मतभेद था तब भी वो सरकारी गुंडागर्दी के खिलाफ खड़े होते थे।

आज जब हिन्दू हृदय सम्राटों की गुंडागर्दी चरम पर है तो सपा, बसपा, काँग्रेस जैसे संगठनों का पूंछ दबाकर बिल में घुसे रहना आश्चर्य चकित करता है।

सत्येंद्र पीएस की एफबी टिप्पणी

 

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।