ट्राम्बे पुलिस स्टेशन में हिंसा, पुलिस इस घटना में सीधे शामिल थी : तथ्यान्वेषण रपट

-मीता तरानी

सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसायटी एंड सेक्युलरिज़्म (सीएसएसएस) ने मुंबई के गोवंडी इलाके के चीता कैम्प क्षेत्र में 18 मार्च, 2017 को हुई हिंसा की एक घटना की जांच की। इस घटना में एक भीड़ ने ट्राम्बे पुलिस थाने पर हमला कर वहां तोड़फोड़ की थी। सेंटर की जांच टीम में छह पूर्व व वर्तमान इंटर्न शामिल थे। ये थे चिरांशू अरोरा, बोधिका दारोकर, प्रणय गोलचा, अंकिता कार, आसिफ खान और मीता तरानी।

दल ने 8 और 11 मई को दो बार घटनास्थल का दौरा किया। इस दौरान, टीम के सदस्यों ने उन लोगों से बातचीत की जो हमले और उसके बाद हुई घटनाओं में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल थे। हमने ट्राम्बे पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर, कुछ फेरी वालों और सड़क पर सामान बेचने वालों से भी बातचीत की। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों और एफआईआर में आरोपी बनाए गए व्यक्तियों के परिजनों से भी हमने उनका पक्ष जाना।

ऐसा आरोपित है कि 18 मार्च, 2017 को चीता कैम्प के निवासी अरविंद चिनवा ने एक इस्लामिक धार्मिक स्थल का विकृत किया हुआ चित्र फेसबुक पर अपलोड किया। इससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसके बाद इसी चित्र को वाट्सएप के ज़रिए प्रसारित किया गया। चीता कैम्प के कुछ मुस्लिम निवासियों ने पुलिस थाने पहुंचकर यह मांग की कि चिनवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उसी रात कुछ लोगों ने ट्राम्बे पुलिस स्टेशन पर हमला बोला दिया। उन्होंने खाली बोतलें और फुटपाथ में लगाए जाने वाले पत्थर के ब्लॉक थाने के प्रांगण में फेंके। पुलिस की एक जीप को भी आग के हवाले कर दिया गया।

पुलिस ने भीड़ को तितरबितर करने के लिए पहले अश्रु गैस के गोले फोड़े और फिर लाठी चार्ज किया। सुबह तक इलाके में शांति स्थापित हो गई। पुलिस ने इस हिंसा के सिलसिले में अनेक लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। उस समय ट्राम्बे पुलिस थाने के सीनियर इंस्पेक्टर अन्ना साहब सोनूर थे। उनका अब स्थानांतरण हो गया है और उनके स्थान पर सीनियर इंस्पेक्टर सुनील गांवकर पदस्थ हो गए हैं। घटना के बारे में कई चीज़ें निर्विवाद हैं परंतु कई मामलों में अलग-अलग बातें भी कही जा रही हैं।

अरविंद चिनवा ने हम लोगों से बातचीत करने से इंकार कर दिया परंतु हमले के आरोपियों में से एक का कहना था कि चिनवा की मां ने इस आधार पर उसके खिलाफ शिकायत वापस लेने का अनुरोध उन लोगों से किया था, कि चिनवा का फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था। इसके विपरीत, वहां सड़कों पर छोटा-मोटा सामान बेचने वालों का कहना था कि जब चीता कैम्प के मुस्लिम रहवासियों ने चिनवा से यह पूछा कि उसने वह चित्र क्यों अपलोड किया तो उसने न केवल यह स्वीकार किया कि उसने ही वह चित्र अपलोड किया था वरन उसने उसके लिए कोई पछतावा न दिखाते हुए चित्र को अपने फेसबुक अकाउंट से हटाने से इंकार कर दिया। बहरहाल, पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और जांच से ही यह पता चलेगा कि चिनवा ने जानबूझकर वह चित्र अपलोड किया था या उसका अकाउंट हैक कर लिया गया था।

मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग, जो एफआईआर में आरोपियों के सगे-संबंधी हैं, का कहना था कि पुलिस ने पहले यह कहते हुए चिनवा के खिलाफ रपट लिखने से इंकार कर दिया था कि यह साइबर क्राइम का मामला है और उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता। कुछ हाकरों की यह राय थी कि चूंकि एफआईआर दायर नहीं की गई इसलिए भीड़ ने हिंसा की। पुलिस द्वारा हमलावरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में यह कहा गया है कि 18 मार्च को रात 11 बजे चिनवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

एफआईआर के अनुसार, रात 11 बजे पुलिस थाने के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई। चिनवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी एक प्रति शिकायतकर्ताओं श्री ख्वाजा खान और श्री अहमद अली द्वारा भीड़ को दिखाई गई। इसके बाद भीड़ बिखर गई और लोग थाने से निकलकर चीता कैम्प के नज़दीक दीनदयाल उपाध्याय मैदान में इकट्ठा हो गए। रात लगभग 12:40 बजे भीड़ ने मैदान से पुलिस थाने की तरफ बढ़ना शुरू किया और वहां पहुंचकर थाने पर हमला कर दिया। एफआईआर के अनुसार, भीड़ का इरादा ‘‘पुलिस अधिकारियों को घातक चोटें पहुंचाना था’’। उन्होंने पत्थर के ब्लॉक, कांच की खाली बोतलें और आग के जलते हुए गोले थाने पर फेंके। एफआईआर के अनुसार, कम से कम तीन सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और सात कमरों में तोड़फोड़ की गई।

जब हमने एफआईआर में आरोपी बनाए गए लोगों के परिजनों से बातचीत की तो उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर में गलत तथ्य वर्णित किए गए हैं। उनके अनुसार, एफआईआर में यह कहा गया है कि लगभग 11 बजे श्री ख्वाजा खान, श्री अहमद अली, श्री अय्यूब अली, श्री शाहनवाज़ शेख व श्री जब्बली मोहम्मद हुसैन भीड़ के साथ पुलिस थाने में घुस गए। उनके अनुसार वहां कोई भीड़ नहीं थी बल्कि केवल 15-20 लोग थे, जिनमें से अधिकांश 14-15 साल के लड़के थे। ये लोग वहां पर चिनवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने गए थे। चिनवा को पुलिस ने उसकी सुरक्षा के लिए हिरासत में ले लिया था।

जब इन लोगों ने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा तो पुलिस ने ऐसा करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि यह मामला साइबर सेल के क्षेत्राधिकार में है। इसके बाद भी वे लोग थाने में रूके रहे ताकि पुलिस को इस बात के लिए राज़ी कर सकें कि वो चिनवा के खिलाफ प्रकरण दर्ज करे। वहां लोगों को इकट्ठा देखकर अपने काम से वापस लौट रहे अन्य लोग वहां रूकने लगे और धीरे-धीरे भीड़ का आकार बड़ा हो गया।

आरोपियों के परिवारों के अनुसार, ज्योंहि श्री जब्बली ने भीड़ को एफआईआर की कॉपी दिखाई, लोग शांतिपूर्वक अपने घरों को वापस चले गए। यह लगभग आधी रात की बात है। उनका कहना था कि जिस भीड़ ने थाने पर रात एक बजे के बाद हमला किया, उसमें चीता कैम्प का कोई निवासी शामिल नहीं था। वे लोग बैंगनवाड़ी और शिवाजीनगर नामक निकट के क्षेत्रों से थे।

हमने जब ट्राम्बे पुलिस थाने के सीनियर इंस्पेक्टर सुनील गांवकर से बात की तो उन्होंने हमें घटनाक्रम बताया परंतु वे बहुत विस्तार से चीजें बताने के लिए तैयार नहीं थे। जब हम दूसरी बार थाने पहुंचे तब वहां के सभी पुलिसकर्मी व्यस्त थे क्योंकि इलाके में अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की जा रही थीं। पुलिस इंस्पेक्टर का कहना था कि चिनवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भी लोगों ने पुलिस थाने से जाने से इंकार कर दिया। हमने उनसे पूछा कि क्या पुलिस ने समुदाय के बुजुर्गों को बुलाकर भीड़ को समझाने के लिए अनुरोध किया था, जैसा कि पुलिस सामान्यतः ऐसे मामलों में करती है। इंस्पेक्टर का कहना था कि पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं को बुलवाया था और उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश भी की परंतु लोग नहीं माने। वे लोग चिनवा को उन्हें सौंपे जाने की मांग पर अड़े हुए थे।

हमले के बाद पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के संबंध में कई प्रश्न उठाए जा रहे हैं। उर्दू दैनिक ‘इंकलाब’ के संपादक श्री आसिम जलाल ने कहा कि उनकी यह राय है कि इस मामले में पुलिस को जांच नहीं करना चाहिए क्योंकि वह भी इस घटना में एक पक्ष है। यही बात कुछ आरोपियों के परिवारजनों ने भी कही। ऐसा कहा जा रहा है कि पुलिस ने दबाव में आकर बिना मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किए एक समुदाय विशेष के सदस्यों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दायर कर लिए हैं।

इस समुदाय के कुछ सदस्यों का कहना है कि पुलिस की मिलीभगत से यह हमला हुआ और इसके लिए क्षेत्र के वर्तमान पार्षद श्री शाहनवाज़ शेख के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की मदद ली गई। इन लोगों का कहना था कि हमलावर चीता कैम्प के नहीं थे बल्कि नजदीकी बैंगनवाड़ी और शिवाजीनगर इलाकों से वहां पहुंचे थे।

हमसे अलग लोगों ने इतनी अलग-अलग तरह की बाते कहीं की सच और झूठ का पता लगाना बड़ा मुश्किल हो गया। हमले के मामले में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में कहीं यह नहीं कहा गया है कि पुलिस ने समुदाय के प्रभावशाली सदस्यों को बुलाकर उनसे भीड़ को समझाइश देने को कहा। उलटे उन्हें एफआईआर में आरोपी बनाया गया है। यह हो सकता है कि पुलिस ने मौका पाकर समुदाय के कुछ सदस्यों के साथ अपनी पुरानी दुश्मनी का बदला लिया हो। यह भी संभव है कि पुलिस ने दबाव में आकर ये प्रकरण दर्ज किए हों क्योंकि थाने पर हमले के बाद उसके लिए यह दिखाना आवश्यक था कि उसने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की है। पुलिस थानों पर हमले को पुलिस हमेशा बहुत गंभीरता से लेती है।

भीड़ ने अचानक थाने पर हमला क्यों कर दिया, इसके बारे में अलग-अलग बातें कही जा रही हैं। पुलिस का कहना था कि भीड़ ‘कानून को अपने हाथ में लेने’ का प्रयास कर रही थी। वे लोग यह चाहते थे कि चिनवा को उन्हें सौंप दिया जाए ताकि वे उसे सबक सिखा सकें। पुलिस किसी भी हालत में चिनवा को भीड़ के हवाले नहीं कर सकती थी क्योंकि ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ होता वरन इससे चिनवा की हत्या का भी डर था। इलाके के अधिकांश रहवासियों ने हमें बताया कि चीता कैम्प लंबे समय से बहुत शांत इलाका रहा है जहां दोनों समुदायों के लोग प्रेमपूर्वक एक-दूसरे के साथ रहते आए हैं। पिछले कुछ सालों से वहां तनाव बढ़ा है और इसका कारण आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन का वहां बढ़ता प्रभाव है। इसी के चलते मजलिस के उम्मीदवार शाहनवाज़ शेख पिछली बार वहां से पार्षद चुने गए। उन्हें भी एफआईआर में आरोपी बनाया गया है। यह भी हो सकता है कि शाहनवाज़ ने राजनीतिक लाभ पाने के लिए भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया हो।

इस घटना का स्थानीय रहवासियों की रोज़ाना की ज़िंदगी पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। पुलिस अब सभी दुकानों को रात 10 बजे बंद करवा देती है जिससे व्यवसाय प्रभावित हुआ है। सड़क पर सामान बेचने वालों को हटा दिया गया है। रहवासियों का कहना है कि जहां बार देर रात तक खुले रहते हैं वहीं सामान्य दुकानों को बंद करवा दिया जाता है और अगर कोई दुकान 10 बजे रात के बाद खुली पाई जाती है तो दुकानदार पर जुर्माना लगाया जाता है। लोगों के मन में एक-दूसरे के प्रति संदेह का भाव उत्पन्न हो गया है। जिन युवकों के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं उनके माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के बारे में चिंतित हैं। हमारे देश में न्याय प्रणाली इतनी धीमी गति से काम करती है कि लोगों के दोषी या निर्दोष साबित होने में बरसों लग जाते हैं।

निष्कर्ष

जांच दल के निम्न निष्कर्ष हैं:

1. पुलिस ने अरविंद चिनवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और इसकी प्रति पुलिस थाने के बाहर जमा भीड़ को दिखाई गई थी।

2. अलग-अलग समूहों द्वारा घटना के विवरण में कई असमानताएं हैं। परंतु जो सबसे चिंताजनक है वह यह है कि पुलिस भी घटनाक्रम का ठीक-ठीक विवरण नहीं दे पा रही है।

3. पुलिस ने समुदाय के प्रभावशाली सदस्यों को भीड़ को समझाने के लिए बुलवाया था और उनसे यह कहा था कि वे लोगों से कहें कि वे शांतिपूर्वक अपने-अपने घर लौट जाएं।

4. ऐसा लगता है कि जांच के दौरान पुलिस ने ज़रूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

5. इलाके में कई वर्षों से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ रहा है। आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन की इलाके में सक्रियता बढ़ने के बाद से साम्प्रदायिक तनाव में वृद्धि हुई है।

6. इलाके में व्याप्त सांप्रदायिक तनाव और हाल में सम्पन्न चुनावों से उपजी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी हमले के पीछे हो सकती है।

सिफारिशें

जांच दल निम्न सिफारिशें करता हैः

1. घटना की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा करवाई जानी चाहिए क्योंकि पुलिस इस घटना में सीधे शामिल थी इसलिए उससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

2. किसी भी इलाके में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने पर पुलिस को तुरंत एहतियाती कदम उठाने चाहिए। उसे कोई घटना होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। पुलिस को ऐसे मामलो में पूर्ण निष्पक्षता से व्यवहार करना चाहिए।

3. इलाके के एक शांति समिति का गठन किया जाना चाहिए जिसमें बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों समुदायों के प्रभावीशाली सदस्य और बुजुर्ग शामिल हों।

4. इंटरनेट का उपयोग सांप्रदायिक घृणा फैलाने के लिए किया जाना बहुत आम हो गया है। इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। (मूल अंग्रेजी से अमरीश हरदेनिया द्वारा अनुदित)

 

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