आरएसएस और मोदी सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ी

नोटबंदी ने कितना नुकसान पहुँचाया इसका अभी सटीक हिसाब पेश करना संभव नहीं है लेकिन यह सच है कि नोटबंदी को आरएसएस की सहमति और आदेश से ही मोदी सरकार ने लागू किया...

जगदीश्वर चतुर्वेदी

आरएसएस का विगत तीन सालों में सबसे बड़ा योगदान है भारत की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना। नोटबंदी ने कितना नुकसान पहुँचाया इसका अभी सटीक हिसाब पेश करना संभव नहीं है लेकिन यह सच है कि नोटबंदी को आरएसएस की सहमति और आदेश से ही मोदी सरकार ने लागू किया, इसके कारण लाखों मजदूरों की नौकरी चली गयी, लाखों छोटे उद्योग-धंधे बंद हो गए। वहीं दूसरी ओर गऊ वध बंद करो के आंदोलन ने लाखों लोगों की रोटी-रोजी छीन ली और किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया। चूंकि मोदी सरकार सीधे आरएसएस के नियंत्रण में काम कर रही है और नीतियों के मामले में संघ ही इस सरकार का माई-बाप है, इसलिए मोदी सरकार की भूमिका पर बातें करते समय आरएसएस की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

हाल ही में दूरसंचार के जो आंकड़े आए हैं वे और भी चौंकाने वाले हैं। आज के बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार में किरण राठी की ´दूरसंचार बेदम,  सरकार की कमाई भी होगी कम´ शीर्षक से महत्वपूर्ण रिपोर्ट है। यह रिपोर्ट बताती है कि मोदी सरकार ने अपनी गलत नीतियों के कारण किस तरह की तबाही मचा रखी है।

मजेदार बात यह है अन्यत्र किसी मीडिया में अभी ये आंकड़े सामने नहीं आए हैं।

अखबार ने लिखा है ´दूरसंचार विभाग ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अनुमानित 47, 305 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने में असमर्थता जताई है। विभाग ने वित्त मंत्रालय से इसे घटाकर 29, 524 करोड़ रुपये करने को कहा है,  जो पहले के अनुमानित लक्ष्य से करीब 40 फीसदी कम है।´

यानी मोदी के आने के पहले तक दूरसंचार में आय की जो गति थी वह उलटी दिशा में चली गयी है।

´पिछली तीन तिमाहियों से दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों का राजस्व लगातार गिरा है,  जिससे लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम शुल्क में भी कमी आई है। ये कंपनियां अपने राजस्व का 8 फीसदी लाइसेंस शुल्क के तौर पर और 3 से 6 फीसदी स्पेक्ट्रम शुल्क के तौर पर सरकार को देती हैं। पत्र में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही की तुलना में चौथी तिमाही में लाइसेंस शुल्क 25 फीसदी घट गया है। तीसरी तिमाही में इससे 3, 450 करोड़ रुपये आए थे,  लेकिन चौथी तिमाही में यह घटकर 2, 686 करोड़ रुपये रह गया। दूरसंचार उद्योग का कुल राजस्व वित्त वर्ष 2015-16 में 2.36 लाख करोड़ रुपये था,  जो पिछले वित्त वर्ष में 26, 000 करोड़ रुपये घटकर 2.10 लाख करोड़ रुपये रह गया।´

दूरसंचार में मच रही तबाही इस बात की गवाह है कि मोदी सरकार अर्थनीति के मोर्चे पर पूरी तरह फेल रही है। यह हिंदू राष्ट्रवाद की सबसे बड़ी असफलता ही कही जाएगी।

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