अपने विद्यार्थियों के साथ अपराधियों की तरह क्यों बर्ताव कर रही है ये सरकार ?

क्या पुलिस बल से कुचली जा रही ऐसी ही युवा शक्ति का आह्वान प्रधानमंत्री ने अभी कुछ दिनों पहले विवेकानंद को याद करते हुए किया था...

हाइलाइट्स

क्या पुलिस बल से कुचली जा रही ऐसी ही युवा शक्ति का आह्वान प्रधानमंत्री ने अभी कुछ दिनों पहले विवेकानंद को याद करते हुए किया था?

सरकार अपने विद्यार्थियों के साथ अपराधियों की तरह क्यों बर्ताव कर रही है? आज जितना पुलिस बल #BHU  कैम्पस में उतारा गया, उसका आधा भी छेडख़ानी की घटनाओं को रोकने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता, तो आज छात्राओं को पढ़ाई छोड़कर आंदोलन के लिए उतरना नहीं पड़ता।

न्याय_सुरक्षा_आजादी_मांगे_आधी_आबादी

#HamariRai | न्याय_सुरक्षा_आजादी_मांगे_आधी_आबादी #BHU #unsafebhu

न्याय-सुरक्षा-आजादी, मांगे आधी आबादी, ऐसे नारों के साथ प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र की छात्राएं आंदोलनरत हैं। इन मांगों में ऐसा क्या आपत्तिजनक है कि इसके लिए विद्यार्थियों को पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं? जो पार्टी आधी आबादी पर आधा दर्जन नारे गढ़ कर सत्ता में आती है, क्या उससे अपने लिए सुरक्षा और आजादी की मांग करना गलत है?

यह महज संयोग है कि इस वक्त देश के बड़े हिस्से में नारी शक्ति का पर्व नवरात्र मनाया जा रहा है। लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि देवी की उपासना करने से लड़कियों, महिलाओं की स्थिति बदल जाती है। देश में महिलाओं के लिए खतरे और चुनौतियां दिन दूनी-रात चौगुनी गति से बढ़ रहे हैं, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय #unsafebhu में छात्राओं का आंदोलन इस बात की पुष्टि कर रहा है।

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बीते दिनों प्रधानमंत्री #नरेन्द्र_मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दो दिनों के प्रवास पर थे। इस दौरान उन्होंने गरीबों के लिए घर, बिजली की बुनियादी सहूलियत समेत कई घोषणाएं कीं। लेकिन बीएचयू #BHU की उन छात्राओं के लिए वे कुछ न कर सके, जो ज्यादा कुछ नहीं, केवल अपने लिए सुरक्षित माहौल चाह रही थीं।

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प्रधानमंत्री ने इन लड़कियों के लिए कोई घोषणा नहीं की, बल्कि वे तो इनसे मिलने का साहस भी शायद नहीं जुटा पाए और बीएचयू के सिंहद्वार पर बैठी लड़कियों से बचने के लिए रास्ता बदलकर दुर्गा और मानस मंदिर गए। अब सवाल उठना जायज है कि क्या छप्पन इंच की छाती वालों की हिम्मत ऐसी ही होती है? क्या हुआ #SelfieWithDaughter  #BetiBachaoBetiPadhao और बहुत हुआ नारी पर वार-अबकी बार मोदी सरकार जैसे जुमलों का?

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बीएचयू में पढऩे वाली छात्राओं की लंबे समय से शिकायत है कि उनके साथ छेडख़ानी होती है। इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से की गई तो जवाब मिला कि रात में या बेतुके टाइम पर निकलती ही क्यों हो? यहां की एक छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन के ऐसे रवैये और छेडख़ानी के विरोध में पिछले एक महीने से अपना सिर मुंडवा लिया है।

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पिछले गुरुवार एक छात्रा देर शाम जब अपने हास्टल जा रही थी तो कुछ युवकों ने उसके साथ न केवल छेडख़ानी की बल्कि नितांत अभद्र हरकतें कीं। वह किसी तरह बचकर हास्टल पहुंची। इस घटना से नाराज छात्राएं रात को ही विरोध के लिए बाहर निकल गईं, उन्हें किसी तरह मनाकर वापस भेजा गया, लेकिन अगली सुबह छात्राएं विश्वविद्यालय के सिंहद्वार पर आकर धरने पर बैठ गईं। वे कुलपति जी.सी.त्रिपाठी से मिलना चाहती थीं, लेकिन कुलपति की जगह आंदोलकारी छात्राओं को काबू में करने के लिए पुलिस बल तैनात हो गया।

पुलिस प्रशासन ने बल प्रयोग के साथ पानी और शौचालय तक पहुंचने के रास्ते रोकने जैसे तमाम हथकंडे अपनाए कि छात्रों को तितर-बितर किया जाए।

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#BHU की छात्राओं के साथ अन्य जगहों से भी लड़कियों ने आकर उनकी मांगों का समर्थन किया। छात्राएं भूख हड़ताल पर भी बैठीं, कि कुलपति आकर उनकी बात सुनें। लेकिन कुलपति धरनास्थल जाने तैयार नहीं हुए। उन्होंने त्रिवेणी हॉस्टल में धरना और आंदोलन से अलग हुई कुछ छात्राओं से मुलाकात कर सुरक्षा का भरोसा दिया। इस आश्वासन में कितनी सच्चाई और दम है, यह तो कहा नहीं जा सकता। फिलहाल यह नजर आ रहा है कि बीएचयू प्रशासन, उत्तरप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की संवदेनहीनता, अदूरदर्शिता के कारण ऐतिहासिक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में युद्ध जैसा माहौल बन गया है। हवाई फायरिंग, आंसू गैस, पथराव और एक के बाद एक बम धमाके, यह सब वहां हुआ। पुलिस बल ने छात्रों के हास्टल में दबिश दी। ऐसे हालात इससे पहले देश ने हैदराबाद विवि, जेएनयू, डीयू, गोरखपुर विश्वविद्यालय में देखे हैं।

क्या पुलिस बल से कुचली जा रही ऐसी ही युवा शक्ति का आह्वान प्रधानमंत्री ने अभी कुछ दिनों पहले विवेकानंद को याद करते हुए किया था?

सरकार अपने विद्यार्थियों के साथ अपराधियों की तरह क्यों बर्ताव कर रही है? आज जितना पुलिस बल #BHU  कैम्पस में उतारा गया, उसका आधा भी छेडख़ानी की घटनाओं को रोकने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता, तो आज छात्राओं को पढ़ाई छोड़कर आंदोलन के लिए उतरना नहीं पड़ता। इस देश में यूं भी लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा की राह आसान नहीं होती। उस पर भी बीएचयू जैसी घटनाओं से मां-बाप लड़कियों को बाहर पढऩे भेजने में कतराएंगे। लेकिन प्रदेश और देश की सरकार इतने दूर की बात शायद सोचना ही नहीं चाहती।

#RajeevRanjanSrivastava

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