गुंडई का राष्ट्रीयकरण : भीड़ के आपराधिक नेताओं को पहचानिए

ये कौन लोग हैं, जो गौ हत्या पे इतने वीभत्स हो जाते हैं कि एक अधिकारी और निरपराध इंसान को गोली मारने में शर्म नहीं करते. ये कौन हैं जो चैनलों पे बैठकर फर्जी खबरें चलाते हैं कि दंगा मुसलमानों के कारण .....

Vidya Bhushan Rawat
गुंडई का राष्ट्रीयकरण : भीड़ के आपराधिक नेताओं को पहचानिए

Identify Criminal Leaders of Bulandshahr Crowd

विद्या भूषण रावत

बुलंदशहर की हत्यारी भीड़ के नेताओं को पहचानिए. क्या जहर उगलते नेताओं और अफवाह फैलाने वाले भाड़े के दलालों का पर्दाफाश करने का नहीं है. ड्यूटी पे तैनात और अपने फ़र्ज़ निभा रहे पुलिस अधिकारी को क्रूरता से मार देने वाले लोगों की राजनीति की क्या पहचान नहीं होनी चाहिए. हम जानते है के पत्रकारिता का चोगा पहने अपराधी इस खबर में भी अपनी बदमाशियों से बाज़ नहीं आयेंगे. बुलंदशहर में अपराध की इस घटना का मुसलमानों या इजतिमा से कोई सम्बन्ध नहीं है और ये बात बुलंदशहर पुलिस खुद कह रही है. घटना बुलंदशहर शहर से करीब 40-45 किलोमीटर दूर की है जहां भीड़ ने गौ हत्या की बात को कह कर प्रदर्शन कर रही थी.

ये कौन लोग हैं, जो गौ हत्या पे इतने वीभत्स हो जाते हैं कि एक अधिकारी और निरपराध इंसान को गोली मारने में शर्म नहीं करते. ये कौन हैं जो चैनलों पे बैठकर फर्जी खबरें चलाते हैं कि दंगा मुसलमानों के कारण हुआ.

ये दंगा नहीं था. इस भीड़ की राजनीति को समझिये. उस पत्रकार की राजनीति को भी समझिये जो अपने चैनलों पर झूठ के पुलिंदे परोस रहे हैं.

क्या प्रेस कौंसिल को ऐसे अपराधियों के खिलाफ बोलना चाहिए या नहीं ?

Media system has now changed to Propaganda

सुबोध कुमार सिंह अपनी ड्यूटी पे तैनात थे. उनकी हत्या का वीडियो भयावह है. ये दिखा रहा है कैसे समाज में हत्या, हिंसा, वीभत्सता, बलात्कार का सामान्यीकरण किया जा रहा है. हम एक आपराधिक समाज बन रहे हैं. देश में ऐसे तत्व हावी हो चुके हैं जो अपराधी हैं और उन्हीं को नेतृत्व दिया जा रहा है. मीडिया तंत्र अब प्रोपेगंडा में बदल चुका है और झूठ को सच बनाया जा रहा है. पत्रकार दलाली की भूमिका में हैं और ज्ञान बाँट रहे हैं. उनकी डिमांड भी बहुत है. जब भी स्वतंत्र भारत में सभ्यता पे हमले और भारत को विभाजन करने वाली ताकतों पर कोई चर्चा होगी तो यहाँ के दलाल पत्रकारों और 'बुद्धिजीवियों' के नाम भी उसमें महत्वपूर्ण दंगाबाज लोगों में शामिल होंगे.

Police honestly investigate the murder of his official

उत्तर प्रदेश पुलिस को चाहिए कि इस घटना की पूरी तह में जाए. इस घटना को एक छोटी से आपराधिक घटना मान लेने से काम नहीं चलेगा. इसके पीछे की राजनीति और राजनीतिक लोगों के गिरेबान पकड़ने होंगे. इससे पहले के फिर कोई नया झूठ निकलकर ब्रेकिंग न्यूज़ किया जाए, पुलिस ईमानदारी से अपने अधिकारी की हत्या की जांच करे. वर्षों पहले एक अधिकारी की हत्या हुए थी प्रतापगढ़ जिले में और उसके तथाकथित हत्यारे आराम से घूम कर मंत्री भी बन गए और घटना को भुला दिया गया. आज पूरे प्रदेश में ऐसी घटनाओं को अंजाम देने की तैयारी है क्योंकि आपको चुनाव जीतना है और वो भी साम दाम दंड भेद से. ईवीएम् से, दंगा फसाद से, डरा धमका कर, मीडिया को पूर्णतः पंगु और दंडवत झुकाकर.

देश पर गंभीर संकट है. ऐसा संकट जब शासकों को शर्म नहीं के उनके अधिकारी मर रहे, आम इंसान लुट रहा है और पिट रहा है. जिस भीड़ को नोटबंदी, महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, भूमि सुधारों, भुखमरी, छुआछूत, महिला हिंसा के सवालों पर सड़क पर होना चाहिए था वो भीड़ अफवाहों पर दंगा करने और अधिकारियों को मार देने के लिए तैयार है.

आज गुंडई का राष्ट्रीयकरण हो गया है

आप अर्बन नक्सल करते रहिये. उन्हें गिरफ्तार करिए जिन्होंने कोई दंगा नहीं किया और संविधान को माना लेकिन जो गुंडे गाय के नाम पर लोगों को मार रहे है उन्हें आप देशभक्त और मरने पर शहीद बनाकर घूमिये. आज इसी गुंडई का राष्ट्रीयकरण हो गया है.

योगी आदित्यनाथ हैदराबाद में आग उगल रहे है. उत्तर प्रदेश में उन्होंने बहुत आग उगल दी. शहरों के नाम बदल रहे है. लोगों को देश से बाहर करने की धमकी दे रहे है, चौबीसों घंटे मंदिर मंदिर का जाप कर रहे है जैसे प्रदेश की सभी समस्याओं का हल मात्र मंदिर बनाकर हो जाएगा. देश पर के किसान जब दिल्ली में अपनी मांगो को लेकर दिल्ली में आये तो लम्पट उनको भाड़े के लोग कह रहे थे.

जब सुश्री मायावती ने बाबा साहब अंबेडकर और अन्य बहुजन क्रांतिकारियों की मूर्तियाँ लखनऊ में लगवाईं तो खर्चे का हवाला देकर उनकी बहुत निंदा की गयी लेकिन आज हिंदुत्व के मठाधीश मूर्तियों पर अरबों रुपये खर्च कर रहे हैं और अब कोई नहीं कह रहा कि ये आम जनता के पैसो की लूट है. कोई नहीं कह रहा है क्या इन मूर्तियों की इतनी रकम के पीछे भी कोई घोटाला है. कोई ये नहीं कह रहा कि ये चाइना में क्यों बन रही हैं भारत में क्या कलाकारों की कमी है ?

भीड़ की राजनीति को समझने की जरूरत है. भीड़ की आड़ में गुंडई, बदमाशी और अपराध को सही ठहराने की कोशिश संघ की राजनीति का हिस्सा है. भीड़ का नाम देकर बाबरी मस्जिद ढहाई गयी. समय समय पर उसे भीड़, या हिंदुत्व की भीड़ का नाम दिया जाता है और ये सब जरूरतों के हिसाब से होता है. जब कोर्ट में जाते है तो साफ़ मुकर जाते है लेकिन जब भीड़ को संबोधित करते है तो बाबरी मस्जिद तोड़ने की जिम्मेवारी लेते है.

देश के पत्रकारों को जो संविधान और धर्मनिरपेक्षता और पत्रकारिता के मूल्यों पे विश्वास करते है उन्हें अब साफ़ तौर पर खड़े होने की जरूरत है. उनके प्रोफेशन में अब अपराधी और गुंडे घुस आये है और उसकी अब सफाई की जरूरत है. राजनीति के नाम पर गुंडे देश को दंगों और घृणा की आग में धकेलने में भी कोई शर्मिंदगी नहीं महसूस करते. देश को ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा. यही लोग सोशल मीडिया को रेगुलेट कहने की बात कर रहे है लेकिन उन चैनलों को रेगुलेट करने की बात नहीं करते जो फर्जी खबरें बनाकर दिखा रहे है.

देश केवल संविधान की भावनाओं के आधार पर ही चल सकता है. पुलिस, मीडिया या राजनीति के लोग, सभी संविधान की सर्वोच्चता की बात कहकर ही बात आगे बढ़ सकती है. कोई हिंदू वादी नैतिकता नहीं, कोई इस्लामिक नैतिकता नहीं, कोई फिरकापरस्ती नहीं, मात्र संवैधानिक नैतिकता या मूल्य आगे किये जाए. धर्म आपके घर की वास्तु रहे. आप जिसे मानिए या न मानिए ये आपके व्यक्तिगत प्रश्न है. देश में सभी का हक़ है और कम से कम सत्ता में रहने वालों, प्रशासन के लोगों की नैतिकता तो संविधान की सर्वोच्चता को ही कायम रखना हो सकता है क्योंकि उसको छोड़ इस देश को कोई नहीं बचा सकता . देश में मंदिरों, मस्जिदों, गउशालाओं, चर्चों, गुरुद्वारों की कोई कमी नहीं और नहीं इनके सामने कोई पैसो का संकट. देश को आज अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहिए, बच्चों को समान शिक्षा, सबको घर, जन स्वास्थ्य, भूमि अधिकार, दलित आदिवासियों के हक़, पर्यावरण का संतुलन, साफ़ नदिया, साफ़ पानी, सुरक्षित और साफ़ खेती की जरूरत है. कृपया देश को भगवानों के मकड़जाल में मत फंसाइए. योगी आदित्यनाथ हो या कोई, जनता ने उन्हें मंदिर मस्जिद बनाने के लिए नहीं चुना. उन्हें प्रदेश को स्वच्छ और साफ़ प्रशासन के लिए चुना. मोदी जी को देश में रोजगार और सुशासन के लिए चुना. देश अभी भी आपसे वही आशा करता है,

गाय के नाम पर राजनीति करने वाले कृपया बताये के गाये क्यों मर रही है. गाय हमारी कृषि व्यवस्था का हिस्सा है. गाय पालने वाला किसान आज क्यों आत्महत्या कर रहा है. क्यों लोगों गाय नहीं पालना चाहते. गाय की राजनीति करने वालों ने कितने किसानों को बचाया. गाय पालने वाले आज दुखी है. क्या किया इस गौ माता सरकार ने. आज गाये सड़कों पर कूड़ा खा रही है. और उनके लिए कोई हॉस्पिटल नहीं है. उत्तर प्रदेश सरकार बताये के उसके पास कितने पशु चिकित्सक है जो गाय का ऑपरेशन कर सकते है ? कितने पशु अस्पताल है जिनमें सभी सुविधाएँ है. ये भी बताये, के प्रदेश में कितने स्थानों पर गौचर है. हाँ गउशालाओं की बात भी बताये के उनके हाल क्या है. उत्तर प्रदेश में कुल कितनी गउशालाएँ है और उनको सरकारी अनुदान कितना है और वो कितनी गायों की देखभाल करते है और उनके स्थिति कैसी है. योगी जी ये भी बताये के ये गउशालाएँ किनके नाम पर है और इनके नाम पर कितनी जमीन है. गाये के असली संरक्षक किसान है और वो मर रहे है लेकिन इस गौ माता अभियान का उद्देश्य गउशालाओं का धंधा मजबूत करना है ताकि बाद में बड़े सेठ इस पूरे अभियान की मदद से दूध की कंपनियां चलाये. गाय को किसान के हाथ से छुड़ाकर बड़े धंधेबाजों और सेठों को पहुंचाने के लिए ही ये अभियान है.

एक अधिकारी की हत्या दुखद है. वैसे ही एक निर्दोष की हत्या भी दुखद है. देश को नफ़रत की आग में झोंकने वालों से सावधान रहने की जरूरत है. सभी से अनुरोध है के शांति व्यवस्था रखे. अफवाहों से सावधान रहे और व्हाट्सएप के जरिये दंगा फैलाने की कोशिश करने वालों से सावधान. भीड़ की राजनीति, उसके नेताओं और उनके रिश्तों का पर्दाफाश करें. जब देश के सभी संवैधानिक तंत्र अपनी आस्था और निष्ठा संविधान में रखेंगे तभी ये देश सुरक्षित रह पायेगा.

विद्या भूषण रावत

दिसंबर 4, 2018

क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे

कृपया हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।