साधारण मनुष्य की महानता का महाख्यान 1917 की अक्तूबर क्रांति

अक्तूबर क्रांति में मानव सभ्यता के इतिहास में पहली बार शासन अपने सिंहासन से उतरकर गरीब के घर पहुँचा था। गरीबों को उसने जीवन की वे तमाम चीजें दीं जिनका मानव सभ्यता सैकड़ों सालों से इंतजार कर रही थी।...

साधारण मनुष्य की महानता का महाख्यान 1917 की अक्तूबर क्रांति

सन् 1917 की अक्तूबर क्रांति के मौके पर - साधारण मनुष्य की महानता का महाख्यान

October Revolution of 1917

जगदीश्वर चतुर्वेदी

मैं निजी तौर पर जिस उमंग, उत्साह और वैचारिक गर्मजोशी के साथ दीपावली मनाता हूँ, दुर्गापूजा के सार्वजनिक समारोहों में शामिल होता हूँ। ठीक उसी उत्साह और उमंग के साथ मार्क्सवादियों और उदारमना लोगों के राजनीतिक -साहित्यिक जलसों में भी शामिल होता हूँ। मेरे अंदर जितना उत्साह होली को लेकर रहता है वही उत्साह 7 नवम्बर 1917 की अक्तूबर क्रांति को लेकर भी है।

सामाजिक सरोकारों में शिरकत और क्रांति

Social Concerns and the Revolution

आनंद और क्रांति के बीच, मनोरंजन और क्रांति के बीच, जीवंतता और क्रांति के बीच गहरा संबंध है। आप जितने जीवंत होंगे। बृहत्तर सामाजिक सरोकारों में जितना व्यापक शिरकत करेंगे। उतना ही ज्यादा क्रांतिकारी परिवर्तनों को मदद करेंगे। जीवन में जितना रस लेंगे, आनंद लेंगे, आराम करेंगे उतने ही क्रांति के करीब होंगे।

समाजवादी विचारों और सामाजिक क्रांति से हमारी दूरी बढ़ने का प्रधान कारण है सामाजिक जीवन और निजी जीवन से आनंद और सामाजिकता का उठ जाना। हम अब प्रायोजित आनंद में घिर गए हैं। स्वाभाविक आनंद को हम भूल ही गए हैं कि कैसे स्वाभाविक ढंग से आनंद और रस की सृष्टि की जाए। जीवन का नशा गायब हो गया है। जीवन में जो स्वाभाविक नशा है उसकी जगह हर मेले ठेले में दारू की बोतल आ गयी है। बिना बोतल के हमारे समाज में लोगों को नशा ही नहीं आता, आनंद के लिए उन्हें नशे की बोतल की जरूरत पड़ती है।

प्रायोजित आनंद के सामने हमने घुटने टेक दिए

आनंद, उत्सव, उमंग और जीवंतता के लिए दारू की बोतल का आना इस बात का संकेत है कि हमने प्रायोजित आनंद के सामने घुटने टेक दिए हैं। हमें देखना चाहिए विगत 70 सालों में भारत में दारू की खपत बढ़ी है या घटी है ? आंकड़े यही बताते हैं कि दारू की खपत बढ़ी है। इसका अर्थ है जीवन में स्वाभाविक आनंद घटा है। स्वाभाविक आनंद की बजाय प्रायोजित आनंद के सामने हमारा समर्पण इस बात का भी संकेत है कि हमें जश्न मनाने की तरकीब नहीं आती।

हमने जन्म तो लिया लेकिन खुशी और आनंद का पाठ नहीं पढ़ा। आनंद से कैसे रहे हैं। इसके लिए वैद्य, हकीम, योगी, बाबा, नेता आदि के उपदेशों या उसके योग शिविरों में जाने की जरूरत नहीं है। हमारी आसपास की जिन्दगी और बृहत्तर सामाजिक दुनिया के प्यार में आनंद छिपा है।

कब होता है जीवन में आनंद का ह्रास

When does the decline in happiness in life

जीवन में आनंद का ह्रास तब होता है जब स्वयं से प्यार करना बंद कर देते हैं, दूसरों से प्यार करना बंद कर देते, स्वार्थवश प्यार करने लगते हैं।

सोवियत क्रांति ने दुनिया को वास्तव अर्थों में प्यार करने का पाठ पढ़ाया

The Soviet Revolution taught the world how to love in real sense

मुझे सोवियत क्रांति इसलिए अच्छी लगती है कि उसने पहली बार सारी दुनिया को वास्तव अर्थों में प्यार करने का पाठ पढ़ाया। सोवियतों के साथ प्यार करना सिखाया। मजदूरों-किसानों को महान बनाया। शासक बनाया।

सोवियत अक्तूबर क्रांति इसलिए अच्छी लगती है कि मानव सभ्यता के इतिहास में पहली बार शासन अपने सिंहासन से उतरकर गरीब के घर पहुँचा था। गरीबों को उसने जीवन की वे तमाम चीजें दीं जिनका मानव सभ्यता सैकड़ों सालों से इंतजार कर रही थी।

सारी दुनिया में एक से बढ़कर एक शासक हुए हैं। बड़े यशस्वी और प्रतापी राजा हुए हैं, बड़े दानी राजा हुए हैं। लेकिन सोवियत क्रांति के बाद जिस तरह की शासन व्यवस्था का उदय हुआ और सोवियतों के काम ने सोवियत संघ और सारी दुनिया को बगैर किसी युद्ध, दबाव और दहशत के जिस तरह प्रभावित किया वैसा इतिहास में देखने को नहीं मिलता।

सोवियत संघ और उसके बाहर सारी दुनिया में क्रांति के विचार की चिंगारी कैसे फैली

Idea of revolution in the whole world outside the Soviet Union and beyond

आज हमारे पास इंटरनेट है, सैटेलाइट टीवी है, रेडियो है, प्रेस है, हवाई जहाज हैं, दुनिया की शानदार उपभोक्ता वस्तुओं का संसार है। खाते पीते घरों में वस्तुओं का ढेर लगा है। हम किसी भी चीज को आसानी से पा सकते हैं। बैंकों का समूह कर्ज देने के लिए हमारे दरवाजे पर खड़ा है। विचारों, सामाजिक सरोकारों और सामाजिक जिम्मेदारी के पैराडाइम से निकलकर हम वस्तुओं और भोग के महा समुद्र में डूबते-उतराते रहते हैं। आए दिन नामी-गिरामी लोगों को टीवी और मीडिया में देखते रहते हैं, उनके विचार सुनते रहते हैं, लेकिन हमें याद नहीं है कि इन नामी-गिरामी लोगों के विचारों का सारी दुनिया या भारतवर्ष पर कितना असर हो रहा है।

आज मीडिया है उनके जयकारे हैं, वे मीडिया के भोंपू हैं, और सुंदर-सुंदर एंकर से लेकर हीरोइनें हैं, जिनके पास एक भी सहेजने लायक विचार नहीं है। ये लोग सबके मिलकर उपभोग का वातावरण बना रहे हैं। जिस व्यक्ति को हम मीडिया में रोज देखते और सुनते हैं उसके विचारों का कोई असर नहीं हो रहा।

इसके विपरीत अक्तूबर क्रांति के समय न तो टीवी था, न रेडियो था, और न कोई खास प्रचार सामग्री थी वितरित करने लिए। इसके बावजूद सोवियत संघ और उसके बाहर सारी दुनिया में क्रांति के विचार की चिंगारी कैसे फैल गयी ?

कम्युनिस्टों का दल छोटा है, महत्व बड़ा है

The Communist Party is small, but its importance is big

आज जो लोग हिन्दुत्व की हिमायत कर रहे हैं और मार्क्सवाद पर हमले कर रहे हैं, वे जरा जवाब दें कि हिन्दुत्व का विचार आधुनिक प्रचार माध्यमों के जोर से नगाड़े बजाने के बावजूद भारत में मात्र 20-22 प्रतिशत लोगों को प्रभावित कर पाया है। भारत में कम्युनिस्ट संख्या में कम हैं, उनके पास बड़े संसाधन नहीं हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया आए दिन उन पर हमले करता रहता है। इसके बावजूद सामाजिक और राजनीतिक जीवन में कम्युनिस्टों का प्रभाव बहुत ज्यादा है। कम्युनिस्टों की राजनीतिक साख है। समाजवाद की प्रतिष्ठा है। उनका दल छोटा है। महत्व बड़ा है।

अक्तूबर क्रांति ने समाजवाद के विचार को महान बनाया। बगैर मीडिया समर्थन के समाजवाद के विचार को एक ही झटके में सारी दुनिया में संप्रेषित कर दिया। दूसरा महान कार्य यह किया कि पहली बार सारी दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि वंचित लोग,शोषित लोग शासन में आ सकते हैं।

सोवियत क्रांति के संदेश

Messages from the Soviet Revolution

सोवियत क्रांति के पहले यही मिथ था कि सत्ता हमेशा ताकतवर लोगों के हाथ में रहेगी चाहे जैसी भी शासन व्यवस्था आए। तीसरा संदेश यह था शासकों और जनता में बगैर किसी भेदभाव और असमानता के जी सकते हैं। शासकों और जनता के बीच के महा-अंतराल को अक्तूबर क्रांति ने धराशायी कर दिया था।

सात नवम्बर 1917 को सोवियत संघ में दुनिया की पहली समाजवादी क्रांति हुई। यह सामान्य सत्ता परिवर्तन नहीं था। यह महज एक देश का राजनीतिक मसला भी नहीं था। लेनिन, स्टालिन आदि मात्र एक देश के नेता भर नहीं थे। आज जिस तरह का घटिया प्रचार क्रांति विरोधी ,समाजवाद विरोधी ताकतें और कारपोरेट मीडिया कर रहा है उसे देखकर यही लगता है कि अक्तूबर क्रांति कोई खूंखार और बर्बर सत्ता परिवर्तन था। एक शासक की जगह दूसरे शासक का सत्ता संभालना था। जी नहीं।

सारी दुनिया को प्रभावित किया अक्तूबर क्रांति ने

The October Revolution Affected The Whole World

अक्तूबर क्रांति विश्व मानवता के इतिहास की विरल और मूलगामी सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों को जन्म देनी वाली विश्व की महान घटना थी। कहने के लिए अक्तूबर क्रांति सोवियत संघ में हुई थी लेकिन इसने सारी दुनिया को प्रभावित किया था। हमें गंभीरता के साथ इस सवाल पर विचार करना चाहिए कि ऐसा क्या हुआ इस क्रांति के साथ जिसने सारी दुनिया का राजनीतिक पैराडाइम ही बदल दिया।

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