देश कभी हत्यारों से न तो बनता है और चलता है, लोकतंत्र को हम कत्लघर में तब्दील होने नहीं देंगे

मोदी जनसंघर्षों की बजाय मीडिया प्रौपेगैंडा से निकले पीएम हैं। मीडियानिर्मित नेता हमेशा जनता के साथ गद्दारी करते हैं। लोकतंत्र को हम कत्लघर में तब्दील होने नहीं देंगे।...

हाइलाइट्स

हत्यारों के बल पर कत्लघर चलते हैं, लोकतंत्र को हम कत्लघर में तब्दील होने नहीं देंगे। लोकतंत्र के विकास में क़ातिलों, दंगाईयों और नागपुरिया बटुकसंघ का कोई योगदान नहीं है। जो लोग इनके खिलाफ लड़ रहे हैं, आलोचना लिख रहे हैं उनके साथ सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक एकजुट होकर प्रतिवाद करें।

 

जगदीश्वर चतुर्वेदी

मीडिया माफिया दौलत वसूली करके संघ के लिए मीडिया गुंडई कर रहा है। दौलत वसूली करके सभ्यता की हिमायत संभव नहीं।

हम हर स्तर पर मोदी-आरएसएस के पक्ष में खड़े हत्यारे गिरोहों और लोकतांत्रिक लोगों की हत्या के लिए सुपारी लेने और देने वालों के खिलाफ हैं। देश कभी हत्यारों से न तो बनता है और चलता है। हत्यारों के बल पर कत्लघर चलते हैं, लोकतंत्र को हम कत्लघर में तब्दील होने नहीं देंगे। लोकतंत्र के विकास में क़ातिलों, दंगाईयों और नागपुरिया बटुकसंघ का कोई योगदान नहीं है। जो लोग इनके खिलाफ लड़ रहे हैं, आलोचना लिख रहे हैं उनके साथ सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक एकजुट होकर प्रतिवाद करें।

मोदी सरकार आने के बाद विनाश की चक्की आम आदमी को निरंतर पीस रही है। हर आदमी तबाह पड़ा है। आम लोगों के सुंदर सपनों को मोदी फैंटेसी के बहाने प्लेग के हवाले कर दिया गया है। प्लेग में पड़ी जनता से सवाल किया जा रहा है बताओ कोई विकल्प है मोदी का ? फैंटेसी के प्लेग से पीड़ित जनता के पास इसका कोई सटीक जवाब नहीं है। लेकिन जो लोग मोदी फैंटेसी से बाहर हैं वे तो समझें कि साम्प्रदायिकता के खिलाफ हर हालत में एकजुट हों।

मोदी जनसंघर्षों की बजाय मीडिया प्रौपेगैंडा से निकले पीएम हैं, इसलिए उनकी औऱ मीडिया की कोई सामाजिक जवाबदेही नहीं है, संविधान के प्रति जवाबदेही नहीं है, वे संसद नहीं जाते, वायदे भूल गए हैं, उलटे उन्होंने जनता को ठगा, लूटा औऱ ऱोजगार से वंचित किया है। जनता का एक वर्ग चाहता है कि मोदी का विकल्प मीडिया पैदा कर दे। मोदी जब तक लूट औऱ दमन के लिए प्रासंगिक बने रहेंगे मीडिया उनको नचाता रहेगा।

कहने का आशय यह कि मीडियाजनित विकल्प तो मोदी से भी खराब होगा।

मैं खुश हूं कि राहुल गांधी मीडियानिर्मित नेता नहीं हैं। मीडियानिर्मित नेता हमेशा जनता के साथ गद्दारी करते हैं। विकल्प वही जो टीवी टॉक शो की बजाय जनसंघर्षों से निकले।

सोशल मीडिया पर जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक कुल 17 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है। यह रिपोर्ट काफी हैरान करने वाली है। इस सूची में पत्रकार गौरी लंकेश का भी नाम शामिल है।

सोशल मीडिया पर एक यूजर द्वारा जारी इस लिस्ट में वर्ष 2013 से लेकर 2017 तक पत्रकारों हुई हत्याओं का लिस्ट है। लिस्ट के मुताबिक, वर्ष 2013 से अब तक कुल 22 पत्रकारों को मौत के घाट उतार दिया गया है।

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