बोफोर्स पर जेपीसी सही, तो राफेल पर ग़लत कैसे ?

राफेल डील 58 हज़ार करोड़ की है। बोफोर्स डील सिर्फ 1700 करोड़ की थी। जब बोफोर्स पर संयुक्त संसदीय समिति JPC बैठ सकती है तो राफेल में क्या परेशानी है मित्रों ? कांग्रेस ने ये अदा आप से सीखी है !...

पुष्परंजन
बोफोर्स पर जेपीसी सही, तो राफेल पर ग़लत कैसे ?

पुष्परंजन

ये है बोफोर्स तोप ! 1987 में 410 अदद बोफोर्स तोप के वास्ते भारत सरकार ने स्वीडेन को 28 करोड़ 50 लाख डॉलर अदा किये थे। उसी साल स्वीडेन के रेडियो ने खबर दी कि इसमें दलाली खायी गयी है। विपक्ष ने हल्ला मचाया तो अगस्त 1987 में वी. शंकरानंद की अध्यक्षता में जेपीसी गठित की गयी। 26 अप्रैल 1988 को इसकी रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी, तो विपक्ष ने यह कहते हुए बहिष्कार कर दिया था कि इसमें कांग्रेस सदस्य भरे पड़े हैं।

मई 1999 में कारगिल युद्ध छिड़ गया। इन बोफोर्स तोपों की वजह से कारगिल युद्ध में हमारे जवानों ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए। दुश्मन क्या, पूरी दुनिया को पता था कि बोफोर्स तोप की खूबियां, और उसकी मारक क्षमता कैसी है। भज मंडली का कहना है,

"JPC बैठने से राफेल में लगे हथियारों की गोपनीयता बाहर आ जाएगी।"

राफेल डील 58 हज़ार करोड़ की है। बोफोर्स डील सिर्फ 1700 करोड़ की थी। जब बोफोर्स पर संयुक्त संसदीय समिति JPC बैठ सकती है तो राफेल में क्या परेशानी है मित्रों ? कांग्रेस ने ये अदा आप से सीखी है !

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