कैराना में हार से दहल उठा गोदी मीडिया, सपनों और उम्मीदों के टूटने का दर्द तुम क्या जानो जुमला बाबू !!

जुमला बाबू !! जनता सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है, पर धोखा और विश्वासघात नहीं !...

जुमला बाबू !! जनता सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है, पर धोखा और विश्वासघात नहीं !

लाल बहादुर सिंह

कैराना समेत देशव्यापी उपचुनावों में शर्मनाक पराजय से भाजपा नेतृत्व और गोदी मीडिया दहल उठा है। यह परसेप्शन तेजी से वायरल हो रहा है कि 2019 का खेल दरअसल ख़त्म हो चुका है , और अब यह ट्रेंड Irreversible है ! इसे बदलने और सच को झूठ से ढक देने के लिए स्पिनमास्टर्स रात दिन एक कर रहे हैं।

सबसे हास्यास्पद और बचकाना बहाना एक वैज्ञानिक तर्क की आड़ में पेश किया गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने "लंबी छलांग के लिए दो कदम पीछे हटना पड़ता है "!!!!...... मानों भाजपा खुद, स्वेच्छा से उपचुनाव हारी है ताकि 2019 जीत सके !

अरे भाई, लंबी कूद के खिलाड़ी की तरह आप खुद पीछे नहीं हटे हैं, बल्कि जनता ने आपको धकिया दिया है और उसमें आपका संतुलन बिगड़ गया है ! आप लंबी छलांग नहीं गड्ढे में गिरने जा रहे हैं !!

कहा जा रहा है कि कम मतदान की वजह से हारे। क्यों कम मतदान हुआ ? क्योंकि, भंगमोह नौजवानों और किसानों में अब और "मोदी...मोदी ...मोदी" करने का उत्साह नहीं बचा ! आपका आकर्षण ख़त्म हो गया है !

बहरहाल असली जो शातिर नैरेटिव गढ़ा जा रहा है, वह यह है कि उपचुनाव तो स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व के आधार पर लड़ा जाता है, 2019 में राष्ट्रीय मुद्दे होंगे और मोदीजी के नेतृत्व की कोई काट नहीं है।

फिर पूरे देश में "गाँव बंद" क्यों हो रहा है ?

अब यह एक सफ़ेद झूठ है। कैराना में साक्षात् मोदीजी उतर पड़े कुरुक्षेत्र में अपना एक्सप्रेसवे मार्का विकास का राष्ट्रीय मुद्दा लेकर। दंगों, पलायन, मुठभेड़, जिन्ना के माध्यम से चरम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का जो खतरनाक खेल खेला गया, वह स्थानीय मुद्दा था ? इन सारी साजिशों को धता बताते हुए जिन किसानों ने भाजपा को झूठ, धोखे और विश्वासघात की सजा दी, क्या उनका मरणांतक संकट कोई स्थानीय मुद्दा है ?? फिर पूरे देश में "गाँव बंद" क्यों हो रहा है ???, भाजपा को मजा चखाने के लिए जो नौजवान उठ खड़ा हुआ, उसे खुदकशी की ओर धकेलती बेरोजगारी की पीड़ा क्या स्थानीय मुद्दा है ????

ख़त्म हो गया है मोदी मैजिक

सच्चाई यह है कि मोदी मैजिक ख़त्म हो गया है, उसका अवशेष मात्रा बचा है ! राजस्थान, एम् पी, छत्तीशगढ़ इसकी ताबूत में आखिरी कील साबित होगा !

मोदी मैजिक जिन दो मजबूत स्तंभों पर टिका था, वे दोनों ध्वस्त हो गए।

पहला था बेहतरी और बदलाव का सब्जबाग दिखा कर जबर्दस्त आशावाद का संचार। दूसरा था ईमानदारी की गढ़ी गई मसीहाई छवि ( बेशक अन्तःधारा के बतौर "हिंदू हृदय सम्राट" की छवि तो हमेशा मौजूद रही ही)।

अब देश में किसी को इस सरकार से कोई बड़ी उम्मीद नहीं बची है, ( बेशक भक्तों को छोड़कर), चौतरफा निराशा का माहौल है।

बैंकों की लूट, नीरव मोदियों, राफेल डील से लेकर सर्वव्यापी सरकारी भ्रष्टाचार, जिनसे लोगों को रोज दो चार होना पड़ता है, जज की संदिग्ध मौत, चुनाव आयोग से लेकर न्यायपालिका तक तमाम संस्थाओं के दुरूपयोग, कर्नाटक में तार-तार सारी मर्यादाएं आदि ने मिलकर कारपोरेट मीडिया द्वारा गढ़ी भ्रष्टाचारविरोधी मसीहाई छवि का नकाब उतार दिया !

ख़त्म हो गया मोदी सरकार का इक़बाल

मोदी सरकार का इक़बाल ख़त्म हो गया, अब वह 2014 के अपने अवतार की बस परछाई है। विपक्षी एकता ने तो उनका वोट बढ़ाया है, लेकिन उससे महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा के अपने वोटों में लगातार गिरावट जारी है।

आज उनका नया नारा "साफ़ नीयत, सही विकास" एक तरह से अपनी विराट असफलता की ही आत्मस्वीकृति है। कहना चाहते हैं कि कुछ कर नहीं पाए लेकिन नीयत अच्छी है। पर नियत की कसौटी तो नीतियां हैं।

और वहां जनता समझ गई है कि आपकी एक ही नीति थी, "जनता के साथ का दिखावा, कारपोरेट के विकास पर अमल"!

जनता सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है, पर धोखा और विश्वासघात नहीं !

सपनों और उम्मीदों के टूटने का दर्द तुम क्या जानो जुमला बाबू !!

(लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

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