मार्क्सवादी होने या कम्यूनिस्ट होने के नाम मे मत फंसिए, सबसे पहले जागरूक समझदार सम्वेदनशील इंसान होना जरूरी है

गरीब वंचित सताए हुए के प्रति हमदर्दी अपने भीतर खोजिए। अत्याचार अन्याय के कारणों में जाइये। धीरे धीरे मार्क्सवाद आप तक चलकर खुद आ जायेगा...

आलोक वाजपेयी

मार्क्सवाद क्या है कैसे जानें?

चूंकि पिछले कुछ समय से किसी भी तर्कशील को वामपंथी या कम्युनिस्ट कहके गरियाने का चलन बढा है तो इसमें बहुत से वो लोग भी गाली खा जा रहे हैं जिन्होंने कभी मार्क्स का नाम भी नही सुना या बिल्कुल भी मार्क्सवाद नही पढ़ा।

ऐसे लोगों में अक्सर मार्क्स ,कम्युनिज़्म,वामपंथ के प्रति जिज्ञासा जाग जाती है कि आखिर ये भूत क्या है जो जिसका टैग हमे केवल बुद्धि तर्क की बात करने पर लगा दिया जा रहा है। वो अब मार्क्स आदि को जानना चाहते हैं और किताबें पूछते हैं।

मेरे लिए किसी को भी किताबें सुझाना बहुत असमंजस का काम है। बिना किसी से रूबरू हुए ,उसकी अब तक कि पढ़ाई लिखाई जाने , किताबें सुझाना ठीक नही लगता। जैसे कक्षा 8 के छात्र को सीधे MA का कोर्स देना केवल बौद्धिकता दिखाना है।

मेरा सुझाव यह है कि आपको मार्क्सवाद की सैद्धांतिक किताबों या दो चार चौपतिया पढ़कर खुद को उलझाने की जरूरत नही। इससे आपका दिमाग कुछ साफ नही होगा।

आप पहले इतिहास पढिये। भारतीय इतिहास खासकर और विश्व इतिहास भी। साहित्य भी पढिये। असुविधाजनक सवालों से जूझिये। गरीब वंचित सताए हुए के प्रति हमदर्दी अपने भीतर खोजिए। अत्याचार अन्याय के कारणों में जाइये। धीरे धीरे मार्क्सवाद आप तक चलकर खुद आ जायेगा।

मार्क्सवादी होने या कंम्यूनिस्ट होने के नाम मे मत फंसिए। सबसे पहले जागरूक समझदार सम्वेदनशील इंसान होना जरूरी है। फिर आगे की बात आगे देखी जाएगी।

 

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