अच्छे दिन : मोदी राज में भीड़ हत्या

भीड़-हत्या की आड़ में मोदी का षड़यंत्र : रमन सिंह ने तो गौवध करने वालों को लटकाने की बात कही थी। क्या अब रमन सिंह अपनी ही पार्टी के हरीश वर्मा को लटका पायेंगे...

हाइलाइट्स

दस साल में जो भीड़ द्वारा हत्या की गई है उसमें से 97 प्रतिशत नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ है। इस आंकड़े से स्पष्ट है कि मोदी जितना भी घड़ियाली आंसू बहा लें वे इसको रोक नहीं पा रहे हैं। बल्कि सच तो यह है कि उनकी सरकार व पुलिस इस तरह की घटनाओं में लिप्त हत्यारों को संरक्षण दे रही है।

 

दस साल में जो भीड़ द्वारा हत्या की गई हैं उसमें से 97 प्रतिशत नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में हुई हैं।

रमन सिंह ने तो गौवध करने वालों को लटकाने की बात कही थी। क्या अब रमन सिंह अपनी ही पार्टी के हरीश वर्मा को लटका पायेंगे

सुनील कुमार

‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘अच्छे दिन आयेंगे’, ‘बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार’, ‘भ्रष्टाचार मिटायेंगे, दागी सांसदों और विधायकों को जेल भेजेंगे’, ‘दो करोड़ हर साल रोजगार देंगे’ - जैसी जुमलेबाजी के साथ मोदी सरकार मई 2014 में सत्ता में आई। इसके सत्ता में आते ही आरएसएस के साथ जुड़े तमाम फासीवादी संगठनों को अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने और समाज में जहर घोलने की खुली छूट मिल गई।

इस सरकार के बनने के चंद दिन बाद ही पुणे में आईआईटी सेक्टर में नौकरी करने वाले मोहसिन सादिक शेख की हत्या ‘हिन्दू राष्ट्र सेना’ द्वारा कर दी गई, जिसको भीड़-हत्या का नाम दिया गया। मोहसिन शेख के हत्यारे को श्रीराम सेना के प्रमुख द्वारा हिन्दुत्व शौर्य पुरस्कार देने की घोषणा की गई। इस हत्या के बाद सोशल मीडिया पर मैसेज भेजा गया कि एक विकेट गिरा। 10 जून, 2014 को पुणे से बुलढाना परीक्षा देने गये मोहसिन मोहम्मद शेख पर जानलेवा हमला किया गया।

उसके बाद कभी गौवध, तो कभी बच्चा चोरी के आरोप में ‘भीड’ द्वारा हत्याएं की जा रही हैं। किसानों को गोली से, तो बच्चों को आक्सीजन आपूर्ति रोक कर मार दिया जाता है। बच्चियों के साथ छात्रावास में अधिकारियों की मौजूदगी में सिपाहियों द्वारा छेड़खानी की जा रही है। वहीं 15 अगस्त, 2017 के कार्यक्रम में शामिल नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म हो जाता है। कभी नोटबंदी के नाम पर जनता को लाईन में खड़ा कराया जाता है तो कभी जी.एस.टी. के नाम पर महंगाई थोप दी जा रही है और रोजगार छीन लिया जा रहा है।

सीमा के इधर भी हैं उधर भी हैं बर्बर धर्मरक्षक

रोजगार की मांग उठाने पर प्रधानमंत्री कहते हैं कि बेराजगार दलाल ही चिल्ला रहे हैं कि रोजगार नहीं है।

अपने वादे को निभाने में विफल रहने के बाद मोदी सरकार अंग्रेजों की ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति को अपनाते हुए जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का प्रयास कर रही है। सरकारी एजेंडे में लोगों की समस्याओं को छोड़ ‘गौवध’, ‘लव जेहाद’, ‘दलाल’, श्मसान और कब्रिस्तान की बातें हो रही हैं।

गाय की राजनीति

दुनिया का नम्बर एक बीफ निर्यातक भारत में गौवध के नाम पर काफी हत्याएं की जा चुकी हैं।

स्वघोषित ‘गौरक्षकों’ द्वारा की जा रही हत्याएं और मार-पीट से सबसे ज्यादा प्रभावित किसान हुए हैं। वह अपने बछड़ों या बूढ़ी गायों को छोड़ने पर विवश हैं जिसके कारण सड़क दुर्घटना और गौशालाओं में गायों की मरने की संख्या में काफी वृद्धि हो रही है। सबसे ज्यादा गायें भाजपा शासित राज्यों में मर रही हैं।

गौरक्षा : मोदी की शेर की सवारी से उतरने की छटपटाहट

सबसे ताजा घटना छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के शगुन गौशाला की है। यह गौशाला सरकार द्वारा वित्त पोषित रहा है, जहां से 200 गायों की मरने की खबर आ रही है।

शगुन गौशाला के अध्यक्ष हरीश वर्मा (जो भाजपा के नेता हैं और जामुल नगरपालिका के उपाध्यक्ष भी हैं) का कहना है कि सरकार द्वारा दो साल से इस गौशाला के लिए आर्थिक मद्द नहीं कराई जा रही है। इससे पहले भी अगस्त 2016 में कांकेर के कामधेनु गौशाला से 150 गायों की मरने की खबरें आई थीं।

छत्तीसगढ़ के बेमतरा जिले के फूलचंद एवं मयूरी गौशाला में गायों की मरने की खबरें आई हैं।

जुलाई-अगस्त, 2106 में राजस्थान के जयपुर स्थित हिंगोनिया गौशाला के 1500 गायों के मरने की खबर आई थी। इसी राज्य के उदयपुर के तितरडी सरकारी गौशाला में छह माह में 150 गायों की मरने की खबर है।

कश्मीर: खाकी, पत्थरबाजी और आशा की खून से सराबोर भूमि

राजस्थान के सिलहोर और जालोर जिले में भारी बारिश से 800 गायों की मरने की सूचना है। हरियाणा के कुरूक्षेत्र के सरकारी गौशाला में 25 गायें मर गईं। इन गौशालाओं में गायों की सभी मौतें बदइंतजामी और भूख-प्यास से हुई है।

राजस्थान सरकार तो गौरक्षा के नाम पर अलग से टैक्स तक वसूल रही है। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने तो गौवध करने वालों को लटकाने की बात कही थी। क्या अब रमन सिंह अपनी ही पार्टी के हरीश वर्मा को लटका पायेंगे? अभी वे स्वघोषित ‘गौरक्षक’ कहां हैं, जो कभी अखलाक तो कभी पहलू खान जैसे लोगों की हत्या कर देते हैं? इन हत्यारे गिरोहों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है। यहां अखलाक की हत्या के आरोपी की जेल में मृत्यु हो जाने के बाद उसके शव को तिरंगे में लपेट कर शहीद का दर्जा दिया जाता है, जिसमें केन्द्रीय मंत्री तक हिस्सेदारी करते हैं।

Protest against Mob Lynchings and the Role of Civil Society in Breaking the Silence

इसी तरह पहलू खान की हत्या के आरोपी विपिन यादव से साध्वी कमल दीदी पुलिस की मौजूदगी में मिलती हैं और कहती हैं कि ‘‘पूरा भारत तुम्हारे साथ है, हम अपने देश में ऐसा काम नहीं करेंगे तो कहां करेंगे।’’ साथ ही वे ऐलान करती हैं कि ‘‘आज के भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू तुम ही हो।’’

इस तरह सरकारी संरक्षण प्राप्त हत्यारों को हौसला अफजाई किया जाता है जिससे इन हत्यारों को हत्या करने की खुली लाइसेंस मिल जाती है और वे अपने आप को स्वघोषित ‘गौरक्षक’, ‘देशभक्त’ मान कर अपराध करते रहते हैं।

बंगाल के बेकाबू हालात राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखडंता के लिए बेहद खतरनाक, चीनी हस्तक्षेप से बिगड़ सकते हैं हालात

नरेन्द्र मोदी 6 अगस्त्, 2016 को कह चुके हैं कि ‘‘दिन में ये गौरक्षक बन कर घूमते हैं और रात में असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं।’’ उन्होंने राज्य सरकारों से कह दिया वे ऐसे लोगों के खिलाफ डोजियर तैयार कर कार्रवाई करें।

मोदी की इस घोषणा के बाद भी इस तरह के अपराध में कोई कमी नहीं आई है। इसी तरह का बयान उन्होंने ऊना में दलितों पर हो रहे हमले के दौरान दिया था, फिर भी दलितों पर हमले नहीं रूके।

In Bhopal: 'Not in My Name' protest against lynchings

29 जून, 2017 को नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार नहीं की जायेगी। उसी दिन झारखंड के रामगढ़ में मीट ले जा रहे वैन ड्राइबर की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। उसके बाद भैंस व्यापारियों को दिल्ली के पास बाहदुरगढ़ में पीटा गया। सरायकालेखां में भैंस चोरी के नाम पर एक मेट्रो कर्मचारी को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया, तो कालकाजी में भैंस ले जा रहे व्यापारियों के साथ मार-पीट की गई। मोदी के बयान की गम्भीरता क्या है हम इन घटनाओं से समझ सकते हैं।

इस तरह के अपराध केवल मुलसमानों तक ही सीमित नहीं हैं, इन अपराधियों के आगोश में कोई भी आ सकता है। ग्रेटर नोएडा में दान में मिली गाय को भूप सिंह व उनका भतीजा जय सिंह लेकर जा रहे थे। ‘गौरक्षकों’ ने उनको पकड़ कर पीटा, जिन्हें बाद में गम्भीर आवस्था में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। फरीदाबाद में हड्डी ले जा रही ठेकेदार की गाड़ी को जला दी गई और उनके साथ मार-पीट की गई, जबकि उनके पास सरकारी लाइसेंस मौजूद था। राजस्थान के बड़मेर में तामिलनाडु पशुपालन विभाग के अधिकारियों और डाक्टरों के साथ मार-पीट की गई।

जुनैद मेरा बेटा था वह उन सब का बेटा भी था जो वहां उपस्थित थे परंतु उन सबने उसे मरने दिया

इसी तरह बच्चा चोरी के आरोप में झारखंड में आठ लोगों की हत्या कर दी जाती है, जिनमें उत्तम कुमार वर्मा और गंगेश भी मरने वालों में शामिल हैं।

मुर्शिदाबाद जिले में मानसिक रोगी उतेवा बिवी को बच्चा चोर समझ कर भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार दिया जाता है। बाजार से ईद की खरीदारी कर के जा रहा जुनैद की ट्रेन में हत्या कर दी जाती है और ट्रेन में मौजूद लोग उसकी रक्षा नहीं कर पाते हैं।

पीएम का बोलना, पीएम की चुप

चोटी कटवा के नाम पर अगरा में दलित महिला बुर्जुग मानदेवी की पीट-पीट कर हत्या कर दी जाती है। इसी तरह की अफवाह में झारखंड के साहिबगंज जिले के मीरनगर क्षेत्र में चोटी कटवा गिरोह के नाम पर एक भीख मांगने वाली महिला की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई और दो लोगों को बुरी तरह से घायल कर दिया गया। राजस्थान के भरतपुर सीकरी में चोटी काटने के आरोप में एक व्यक्ति की पिटाई की गई। इस तरह की सरकारी संरक्षण प्राप्त ‘‘भीड़ हिंसा’’ बढ़ती रही तो किसी भी दिन हम, आप या हमारे, आपके परिवार का कोई भी इन अपराधियों के बलि का बकरा बन सकता है।

दस साल में जो भीड़ द्वारा हत्या की गई है उसमें से 97 प्रतिशत नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ है। इस आंकड़े से स्पष्ट है कि मोदी जितना भी घड़ियाली आंसू बहा लें वे इसको रोक नहीं पा रहे हैं। बल्कि सच तो यह है कि उनकी सरकार व पुलिस इस तरह की घटनाओं में लिप्त हत्यारों को संरक्षण दे रही है।

Not in my name : झारखंड का देवरी पूछ रहा है उस्मान का कुसूर क्या है

यूपी में योगी सरकार के आते ही ‘गैर कानूनी’ बूचड़खाने बंद कराने के नाम पर हमले बढ़ गये और बहुत सारे लोगों के रोजगार छिन लिये गये। चमड़ा उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ, जिसका सीधा असर यहां के दलित समुदाय और कमजोर तबकों पर पड़ा। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है, जो दूध न देने वाले या अनुपयोगी मवेशियों को बेचकर कुछ पैसा पा जाते थे। इन पैसों से वे दूध देने वाले या उपयोगी मवेशी खरीदते थे।

कैसी परंपराएं गढ़ रहे हैं हम ?

जो मवेशी गौशाला में नहीं जाती वह लवारिस हालत में घुमते हुए रोड एक्सिडेंट की शिकार हो जाती है जिसमें मनुष्य और मवेशी दोनों की भी जानें जाती हैं। अभी हाल में पंजाब सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि लवारिस मवेशियों के कारण हर तीन दिन में एक आदमी की जान जाती है। यही हालत हरियाणा की भी है।

भीड़-हत्या की आड़ में मोदी का षड़यंत्र

1) मोदी सरकार ने वादा किया था कि हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार मिलेगा लेकिन श्रम ब्युरो के सर्वे में निकला है कि 2015 और 2016 में 1.55 और 2.13 लाख रोजगार ही सृजित हुए हैं जबकि 2009 व 2010 में 10.06 और 8.65 लाख रोजगार सृजित हुए थे। इस आंकड़े के हिसाब से 2015 व 2016 में 74 फीसद कम रोजगार सृजित हुए हैं। सरकार इस तरह की भीड़-हत्या और लूट-पाट से आंखे बंद किए हुए है ताकि हमारा ध्यान रोजगार जैसे मुद्दे पर न जाय।

गौआतंकवाद : गाय के नाम पर भयावह हिंसा

2) जाति-धर्म के झगड़े से वोट बैंक में वृद्धि होती रहे।

3) अल्पसंख्यकों, दलितों और कमजोर तबकों को आर्थिक रूप से और कमजोर करने की साजिश चलती रहे।

Not in my name : नफरत वाली राजनीति के खिलाफ हर विरोध का स्वागत

हम सभी को इस तरह की घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करना होगा। हमें सरकार से ऐसे अपराधियों पर नकेल कसने की मांग करनी होगी। हमें सरकार को ‘‘अच्छे दिन’’ के वादों को याद दिलाना होगा कि हमें रोजगार कब मिलेगा, हमारे बच्चों के लिए उचित शिक्षा, स्वास्थ्य की व्यवस्था कब की जायेगी। महिलाओं को यह सरकार कब सम्मान दिलवायेगी। जब भी कोई महिला इस तरह की घटना का विरोध करती है तो उसको गंदी-गंदी गलियां दी जाती हैं, उसे रन्डी, वेश्या बोला जाता है। पुरुष जब विरोध करते हैं तो उसको देशद्रोही, हिन्दू विरोधी बता दिया जाता है।

#NotInMyName : इस इंसान (मोदी) की एक डेमोक्रेसी में कोई जगह नहीं

हमें संकल्प लेना होगा कि हम इस तरह की हिंसा को नहीं सहेंगे। हम जाति, धर्म के नाम पर बांटने वालों के खिलाफ एक होकर लड़ेंगे। हम समाज में भाई-चारे को बना कर रखेंगे, अपने आस-पड़ोस में इस तरह के अपराधिक लोगों के खिलाफ एकजुट होंगे और देश में होने वाले इस तरह की घटनाओं का विरोध करेंगे। हम फासीवादी राजनीति को खत्म कर एक नई भेदभाव रहित राजनीति का निर्माण करेंगे।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।