चौंक गए न, फोटो शॉप्ट्ड नहीं है ये तस्वीर, मीडिया नहीं दिखाएगा ये ख़बर, गूंजे मोहब्बत के स्वर

देखिये ऋचायें और आयतें किस तरह गलबहियां कर रही हैं। आज के समय प्यारे-प्यारे इन मासूमों की तस्वीर फिल्मी लग सकती है। जबकि ऐसा हरगिज़ नहीं। ये ऑरिजनल फ़ोटो है...

देखिये ऋचायें और आयतें किस तरह गलबहियां कर रही हैं।

सैयद शहरोज़ क़मर

आज के समय प्यारे-प्यारे इन मासूमों की तस्वीर फिल्मी लग सकती है। जबकि ऐसा हरगिज़ नहीं। ये ऑरिजनल फ़ोटो है, बिना किसी फ़ोटो शॉप की कारीगरी के। तब रमज़ान का चांद दिखने से पहले ही उसकी चांदनी हिमालय की तराई में बसे ऋषि-मुनियों की शरणस्थली में रौशन हो गई थी। अध्यात्म और दीन की अलौकिक छटा। बात ऋषिकेश की है। जहां मदरसा और गुरुकुल के छात्रों ने साथ-साथ वेद और क़ुरआन का पाठ किया। देखिये ऋचायें और आयतें किस तरह गलबहियां कर रही हैं।

इसी 15 मई को देहरादून मदरसा के छात्र परमार्थ निकेतन के गुरुकुल पहुंचे। ऋषिकुमारों ने गले मिलकर उनका अभिनंदन किया। छात्रों ने मिलकर देश भक्ति गीत गाए। ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम नेकी पर चलें और बदी से टलें के अलावा इतनी शक्ति हमें देना दाता मन का विश्वास कमज़ोर हो ना जैसे गीत भी अरदास की तरह गुंजायमाम किया।

मौके पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा, मदरसा चल कर मठ, आश्रम और गुरुकुल आए और मठ चलकर मदरसों तक पहुंचे, तभी हम भावी पीढ़ियों को एकता के संस्कार दे सकेंगे। हम एक दूसरे को जाने-समझें। कहीं कोई नफरत न रहे, बस मोहब्बत के स्वर गूंजते रहें। हम सब के हृदयों में। आज की यह मदरसे से मठ की यात्रा शान्ति और सद्भाव स्थापित करने की ओर पहला कदम है।

सैयद शहरोज़ क़मर की एफबी टिप्पणी

 

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