मोदीजी, आपका हश्र भी आपातकालीन इंदिरा जैसा होगा!!

लालक़िले की प्राचीर से आज मोदीजी का भाषण सुनकर यही लगा चलो देश निश्चिंत हुआ देश में मोदी शासन में बहुत तरक्की हुई है। देश बुलंदियों को छू रहा है। कोई संकट नहीं, मौतें नहीं, किसानों की आत्महत्या नहीं, ...

जगदीश्वर चतुर्वेदी

इंदिरा गांधी को पांच साल का कार्यकाल पसंद नहीं था यही वजह है आपातकाल में संविधान संशोधन करके संसद का कार्यकाल पांच साल की बजाय सात साल कर दिया। यही बीमारी मोदीजी को हो गयी है वे बार-बार 2022 की बात करते हैं जबकि चुने गए हैं 2019 तक के लिए! जाहिर है हश्र भी आपातकालीन इंदिरा जैसा होगा!!

मोदीजी, आपको गलतफहमी यह है कि आठ साल के लिए चुना गया है। मौजूदा सरकार 2022 तक के लिए नहीं 2019 तक के लिए चुनी गई है।

लालक़िले की प्राचीर से आज मोदीजी का भाषण सुनकर यही लगा चलो देश निश्चिंत हुआ देश में मोदी शासन में बहुत तरक्की हुई है। देश बुलंदियों को छू रहा है। कोई संकट नहीं, मौतें नहीं, किसानों की आत्महत्या नहीं, दहेज हत्या और स्त्री उत्पीड़न नहीं, आईटी और औद्योगिक जगत में कोई संकट नहीं, बेकारी नहीं, साम्प्रदायिक हिंसाचार नहीं! सब कुछ अमन-चैन में बदल चुका है। देश को बस संकल्पों की जरूरत थी! संकल्पों का अभाव था, मोदीजी ने देश को संकल्पों से भर दिया।

भारतीय फासिज्म से लड़ने की प्रतिज्ञा करो

15 अगस्त पर भारतीय फासिज्म से लड़ने की प्रतिज्ञा करो,फासिज्म को समझो और समझाओ,विभ्रमों से बाहर निकलो।

आरएसएस के सत्तारुढ होने के बाद हम सबकी चुनौतियां और राजनीतिक लक्ष्य बदल गए हैं, बदले समय को मोदीमोह से बाहर निकलकर देखो, रौरव नरक नजर आएगा। आतंक और भय का वातावरण दिखाई देगा। मीडिया का चूरन बनता नजर आएगा। मीडिया का मालिक गुलाम नजर आएगा, मीडिया कर्मी गुलाम का गुलाम नजर आएगा।

हम सबके अंदर राष्ट्रप्रेम है, हम सब राष्ट्र को खुशहाल और संप्रभु राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं लेकिन आरएसएस मंडली सारे देश को वंदे मातरम् और तिरंगे झंडा फहराने की आड़ में फासिज्म के जाल में फंसाकर बंधक बनाकर रखना चाहती है।

आरएसएस और उसके बमबटुक सारी जिंदगी तिरंगे झंड़े, संविधान, कांग्रेस नेताओं, संविधान के मूल लक्ष्यों और उद्देश्यों का विरोध करते रहे हैं, आज ये लोग केन्द्र और राज्यों में सत्ता में हैं, केन्द्र का समूचा तंत्र उनके हाथ में है, वे हर स्तर पर सरकारी मशीनरी को प्रदूषित कर रहे हैं।पेशेवर गुणवत्ता, अकादमिक - प्रशासनिक क्षमता आदि को उन्होंने आरएसएस के तमगे के नीचे दफन कर दिया है, ऐसा देश में पहले कभी नहीं हुआ।

मोदीमोह यानी फासिज्म का मोह

आरएसएस के डफर लोगों को सत्ता के सभी महत्वपूर्ण पदों पर बिठा दिया गया है। चुन-चुनकर योग्य लोगों को अपमानित किया जा रहा है, सरेआम उत्पीडन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया सारे देश में चल रही है। लोकतंत्र तो अब दूर की कौड़ी है, हम सबको अस्तित्व बचाने के संघर्ष में झोंक दिया गया है। मुश्किल यहां पर है कि शिक्षितों का बहुत बड़ा तबका मोदीमोह में डूबा हुआ है। मोदीमोह यानी फासिज्म का मोह।

(फेसबुक टिप्पणियों का समुच्चय)

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