भाजपा के ख़िलाफ़ व्यापक मोर्चा वक़्त की ज़रूरत

पांच साल पूरा होने के पहले ही सामने आ गया मोदी सरकार का असली चेहरा... मोदी ने संसद को जोकरबाजी का अड्डा बना दिया......

अतिथि लेखक
हाइलाइट्स

भाजपा के ख़िलाफ़ व्यापक मोर्चा बनाना और आंदोलनात्मक गतिविधियां शुरू करना वक़्त की ज़रूरत है। सिर्फ़ एका के बल पर ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मात दी जा सकती है। भूलना नहीं होगा कि ये फासीवादी संगठन है। यह देश विरोधी है, जन विरोधी है। भाजपा बड़े पूंजीपतियों की रखैल पार्टी है। इसका देश और जनता से कोई लगाव नहीं है। इसका सत्ता में बना रहना देश के लिए बड़ा ख़तरा है।

पांच साल पूरा होने के पहले ही सामने आ गया मोदी सरकार का असली चेहरा

मोदी ने संसद को जोकरबाजी का अड्डा बना दिया

गोडसे-भक्त को भी मजबूरी में महात्मा की समाधि पर जाना पड़ता है

मनोज कुमार झा

लोकसभा चुनाव होने में अब साल भर का समय रह गया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोदी सरकार का असली चेहरा पांच साल पूरा होने के पहले ही सामने आ चुका है। यद्यपि आरएसएस के चरित्र को जानने वालों के लिए यह पहले से ही साफ था कि मोदी सत्ता में आते ही क्या गुल खिलाएंगे। सत्ता में आने के पहले ही इस आदमी ने ‘चाय बेचने वाले’ की अपनी हास्यास्पद छवि बनाई और अनपढ़ वोटरों को गुमराह किया। अमेरिका और दूसरे देशों में जाकर वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच मजमा लगाया और जमूरे की तरह उछल-उछलकर-कूद-कूद कर अनाप-शाप बातें की और देश की प्रतिष्ठा पर आघात पहुंचाया। पूरी तरह अशिक्षित और सभ्यता के संस्कारों से दूर इस व्यक्ति ने विदेशों में विरोधी दलों, खासकर कांग्रेस के उन बड़े नेताओं के ख़िलाफ़ ज़हर उगला जिनकी काफी प्रतिष्ठा है। आजकल यह व्यक्ति पं. जवाहरलाल नेहरू पर प्रहार करने में लगा है, जो विश्व के बड़े नेताओं में शुमार हैं और जिन्हें पूरी दुनिया सम्मान देती है। यह महात्मा गांधी पर भी प्रहार करने से बाज नहीं आता, पर इसे पता है कि महात्मा के ख़िलाफ़ एक शब्द बोलना भी आत्मघाती होगा। महात्मा गांधी देश ही नहीं, विदेशों में भी ऋषितुल्य माने जाते हैं। कोई भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष और नेता भारत आता है तो वह महात्मा की समाधि राजघाट पर मत्था टेकने अवश्य जाता है। इस गोडसे-भक्त को भी मजबूरी में महात्मा की समाधि पर जाना पड़ता है, पर महात्मा के हत्यारों की पूजा करने वाले जब उनकी समाधि पर जाते हैं तो वह स्थल अपवित्र हो जाता है।

बहरहाल, जब तक यह प्रधानमंत्री की गद्दी पर काबिज़ रहता है, महात्मा की समाधि को अपवित्र होने से रोका नहीं जा सकता। मोदी ने सत्ता में आने के बाद हर लोकतंत्रीय परम्परा को ठुकराया है, उनकी अवहेलना की है। इसने संसद को जोकरबाजी का अड्डा बना दिया है। आत्मसम्मान से हीन यह व्यक्ति किसी भी तरह देश का प्रधानमंत्री बनने के काबिल नहीं था, पर विडम्बनापूर्ण परिस्थितियों की वजह से इस गद्दी पर बैठ गया।

सत्ता में रहने के चार सालों के दौरान ही इसकी मूर्खतापूर्ण नीतियों की वजह से अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई। कोई भी सेक्टर ऐसा नहीं है जिसमें ग्रोथ दिखाई पड़ता हो। कृषि, उद्योग, छोटे और घरेलू उद्योग, दूकानदारी चाहे बड़ी हो या छोटी, सब में इतनी गिरावट आई है जितनी अब तक के इतिहास में कभी भी नहीं आई थी। बेरोजगारी में जितनी बढ़ोत्तरी आज हुई है, पहले कभी नहीं हुई थी। ऊपर से यह शख्स बेरोजगारों के जख़्मों पर नमक छिड़कते हुए पकौड़े बेचने की सलाह दे रहा है। इसकी कोई नीति नहीं है। जो नीति है वह लूट की है और देश को रसातल में ले जाने वाली है। जनता के पैसे से जिस सार्वजनिक सेक्टर को दशकों में खड़ा किया गया था और जो आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़ा हुआ है, उसे आनन-फानन में बेचने की तैयारियां चल रही हैं। बैंकों का ढांचा पूरी चरमरा गया है और उनके निजीकरण की तैयारियां चल रही हैं। नोटबंदी-जीएसटी से अर्थव्यवस्था में भूचाल ला दिया। इस व्यक्ति के लिए देश का मतलब सिर्फ़ अंबानी और अडानी है। स्वच्छता अभियान, नमामि गंगा और इस तरह की तमाम मूर्खतापूर्ण योजनाओं से इसने पब्लिक को बुरी तरह बेवकूफ बनाया है और अभी भी यही सोच रहा है कि भाषणबाजी व अंबानी-अडानी के पैसों के सहारे अगला आम चुनाव भी जीत लूंगा। इसके अलावा साम्प्रदायिक मुद्दों के आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण में संघी माहिर हैं ही। यह काम यह शुरू से करता आया है। कहीं हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा खड़ा करेगा को तहीं जातीय मुद्दों को खड़ा कर हिंसा भड़काएगा और अपनी गोटी लाल करेगा। लेकिन अगले साल होने वाले चुनावों में इसके लिए ऐसा करना बहुत आसान नहीं होगा। फिर भी संघ परिवार के गुंडे उत्पात तो जमकर मचाएंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।

बहरहाल, एक बात जो चिंतनीय है, वह यह कि आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए संघ विरोधी दलों की जो तैयारियां शुरू होनी चाहिए थी, वो दिखाई नहीं पड़ रही हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में भाजपा का आना बहुत ही अनिश्चित लग रहा है। जनता में भारी असंतोष है। राजस्थान में हुए उपचुनावों के परिणाम से इस बात के संकेत मिले हैं कि भाजपा को कैसी जद्दोजहद का सामना करना पड़ सकता है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि भाजपा और मोदी के विकल्प को तौर पर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में कांग्रेस ही दिखाई पड़ रही है। राहुल गांधी ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है और उनके भाषणों और नीतियों में भी परिपक्वता दिखाई पड़ रही है। लेकिन यह भी सच है कि संघियों का मुकाबला अकेले कांग्रेस के लिए कर पाना कठिन होगा

मोदी के शासन के दौर में देश बहुत ही विपत्ति की स्थिति में पड़ गया है। अब तक जो क्षति हुई है, वह हर क्षेत्र में हुई है। मज़दूरों और मेहनतकशों की तो छोड़िए, निम्न मध्यमवर्गीय लोगों के जीवन पर भी ख़तरा मंडरा रहा है। सरकारी तो छोड़ें, निजी और कॉरपोरेट क्षेत्रों में भी नौकरियां खत्म हो रही हैं। बड़े पैमाने पर छंटनी का दौर जारी है। मोदी के सत्ता में आने के बाद ही कॉरपोरेट बेलगाम होने लगा था और आज तो हालत ये है कि नियुक्ति से लेकर कर्मचारियों को हटाने तक में कॉरपोरेट सेक्टर में किसी नियम का पालन नहीं हो रहा है। लगता है, कॉरपोरेट भी चाय और पकौड़ों की दूकान के ढर्रे पर ही चल रह है। ऐसी स्थिति में यदि भाजपा कहीं दोबारा सत्ता में आ गई तो मोदी और अमित शाह जो देशी-विदेशी पूंजीखोरों का अब तक सबसे बड़ा पैरोकार है, देश को बेचने में कोई देर करने वाला नहीं है।

ऐसे भीषण संकट काल में भाजपा विरोधी तमाम दलों को एकजुट होकर एक व्यापक मोर्चा बनाने की तैयारी करनी चाहिए थी, जो अभी दिखाई नहीं पड़ रही है। कुछ क्षेत्रीय दल तो मोदी के पाले में पहले ही जा चुके हैं, पर समाजवादी दल, राजद, बीजद, तृणमूल कांग्रेस, बसपा और वामपंथी दलों को अभी आपसी मतभेदों और अंतर्विरोधों को अलग छोड़ एक व्यापक मोर्चा बना कर इस सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलनात्मक गतिविधियों में उतरना चाहिए और आम चुनाव में इसे हराने की साझा रणनीति बनानी चाहिए। जब सभी विरोधी दल एकजुट होकर मैदान में उतरेंगे तो जनता को भी बल मिलेगा, अन्यथा वह भी हताशा की स्थिति में चली जाएगी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वामपंथी दल इस दिशा में कुछ भी नहीं सोच रहे।

भाजपा के ख़िलाफ़ व्यापक मोर्चा बनाना और आंदोलनात्मक गतिविधियां शुरू करना वक़्त की ज़रूरत है। सिर्फ़ एका के बल पर ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मात दी जा सकती है। भूलना नहीं होगा कि ये फासीवादी  संगठन है। यह देश विरोधी है, जन विरोधी है। भाजपा बड़े पूंजीपतियों की रखैल पार्टी है। इसका देश और जनता से कोई लगाव नहीं है। इसका सत्ता में बना रहना देश के लिए बड़ा ख़तरा है।

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