संवेदनाओं का कब्रिस्तान बन गई है हमारी बुतपरस्त-मुर्दा परस्त अंतरात्मा

सम्मानित नरभक्षी पशुओं को जो जंगल में नहीं शहर के संभ्रांत बस्तियों में रहते हैं...

ईश मिश्र

ईश मिश्र

तीन दर्जन अनाथ बच्चियों को बंधक बना कर

भरती कर दिया जाता है

सरकारी वित्तपोषित बलात्कार गृह में

और परोसी जाती हैं बोटी-बोटी

सम्मानित नरभक्षी पशुओं को

जो जंगल में नहीं

शहर के संभ्रांत बस्तियों में रहते हैं

कोई सम्मानित जिला जज होता है

कोई समाजसेवक कोई नेताजी

लेकिन नहीं उबल पड़ता देश

नहीं होती किसी के सीने में जलन

उठता नहीं किसी की आंखों में तूफान

लगता है हमारी बुतपरस्त-मुर्दा परस्त अंतरात्मा

संवेदनाओं का कब्रिस्तान बन गई है।

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।