आरोपमुक्त नहीं मोदी, लंबी श्रंखला है आरोपों की

इतिहास के अज्ञान के आरोप हैं। फर्जी डिग्री के आरोप हैं। संसद तक में झूठ बोलने के आरोप हैं। असभ्य और स्तरहीन भाषा के आरोप हैं। अय्याश जीवनशैली के आरोप हैं। ...

आरोपमुक्त नहीं हैं नरेंद्र मोदी, लंबी श्रंखला है आरोपों की

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

कमाल है कि कुछ लोग चार साल के तजुर्बे के बाद भी कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी का विकल्प इसलिए नहीं कि उस खुद पर कोई दाग नहीं है ! अपने अज्ञान और अनुभवहीनता के चलते, अपनी मूर्खता और धूर्तता के चलते, 'नोटबंदी' जैसी महापीड़ा में भारतीयों को झोंकने वाले इस राजनेता पर अपने चहेते उद्योगपतियों को अपार लाभ पहुंचाने का सीधे सीधे अनगिनत आरोप हैं। उनके चहेते राजनेताओं यथा गडकरी और शाह की औलादों को मालामाल करने के आरोप हैं। महाभ्रष्ट लोगों को मुख्यमंत्री बनाये रखने के आरोप हैं। सर्वत्र व्याप्त भ्रष्टाचार से ऑंखें मूंदे रखने के आरोप हैं। अपनी छवि बनाये रखने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई का अकूत धन विज्ञापनों पर खर्च करने का आरोप है। चुनावों में साम्प्रदायिकता फ़ैलाने के लिए घटिया स्तर के भाषणों का आरोप है। न्यायपालिका को प्रभाव में लेने का आरोप है। अपनी ही पार्टी के सांसदों को गुलामों और तावेदारों की तरह ट्रीट करने के आरोप हैं। लोकतान्त्रिक मानमर्यादाओं को तारतार करके सांसदों विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप हैं। देश भर में राष्ट्रीय एकता अखंडता की दुश्मन अलगाववादी पार्टियों से तालमेल के आरोप हैं। इतिहास के अज्ञान के आरोप हैं। फर्जी डिग्री के आरोप हैं। संसद तक में झूठ बोलने के आरोप हैं। असभ्य और स्तरहीन भाषा के आरोप हैं। अय्याश जीवनशैली के आरोप हैं। मीडिया का इतना दुरूपयोग करने के आरोप हैं कि उसकी साख जाती रही। यह फहरिस्त लंबी हो सकती है। बाकी मित्रगण खुद जोड़ें।

'संघ मुक्त भारत' के लिए 'संघ मुक्त कांग्रेस' जरूरी है। कांग्रेस को यथाशीघ्र सतह से शिखर तक संघ मुक्त होना चाहिए और 'संघ मुक्त भारत' का नारा देना चाहिए। संघियों के 'कांग्रेस मुक्त भारत' नारे का कांग्रेस इसी तरह प्रतिरोध कर सकती है ।

कांग्रेस ने राष्ट्रपिता की हत्या के बाद संघ को कुछ वक्त के लिये प्रतिबंधित तो किया, उसे सदा के लिए समाप्त करने की राजनैतिक जिम्मेदारी नहीं निवाही। कांग्रेस अगर ऐसा नहीं कर सकी तो इसलिए कि कांग्रेस खुद संघ मुक्त नहीं थी। गांधीजी को मारकर नेहरू को संघी विचारधारा ने कमजोर किया। इससे पहले ही, बॉम्बे और बिहार में कांग्रेस अपने क्रमशः पारसी और मुसलमान नेताओं को फकत इसलिए मुख्यमंत्री नहीं बना पाई कि 'कांग्रेस के संघी' बंटवारे की पृष्ठभूमि से ही सक्रिय और सशक्त हो रहे थे। मौलाना आज़ाद ने 'इंडिया विन्स फ्रीडम' में कई खुलासे किए हैं।

(मधुवन दत्त चतुर्वेदी की एफबी टिप्पणियों के संपादित अंश)

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