यह योगी सरकार द्वारा की गई संगठित हत्या है

हमारा सवाल है कि क्या योगी के जरिये उत्तर प्रदेश में हिटलर के आश्विच की तरह के मृत्यु शिविरों में सेना, पुलिस और पूरी नौकरशाही को लगा कर सामूहिक हत्या की तरह का कोई प्रयोग चलाया जा रहा है ?...

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हाइलाइट्स

हमारा सवाल है कि क्या योगी के जरिये उत्तर प्रदेश में हिटलर के आश्विच की तरह के मृत्यु शिविरों में सेना, पुलिस और पूरी नौकरशाही को लगा कर सामूहिक हत्या की तरह का कोई प्रयोग चलाया जा रहा है ?

 

अरुण माहेश्वरी

आज के 'टेलिग्राफ' में पीयूष श्रीवास्तव की रिपोर्ट (Police raj cry at hospital) अकल्पनीय और दिल को पूरी तरह से दहला देने वाली रिपोर्ट है। उत्तर प्रदेश किस प्रकार की एक हत्यारी गुंडा सरकार के हाथ में चला गया है, इसका प्रमाण है यह रिपोर्ट।

इसमें बताया गया है कि गोरखपुर के अस्पताल में बुधवार (9 अगस्त) के दिन जब रोगियों को आक्सीजन देना बंद किया गया, उसके पहले ही अस्पताल में बड़ी संख्या में पुलिस के लोग पहुंच गये थे और सभी रोगियों के परिजनों को खदेड़ कर फ़ौरन अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया। बाद में आक्सीजन बंद होने से जब बच्चों और अन्य रोगियों की मृत्यु का सिलसिला शुरू हुआ, आनन-फ़ानन में परिजनों को मृतकों की लाशें सौंप कर उन्हें फ़ौरन अस्पताल के परिसर से भाग जाने के लिये मजबूर किया गया। रिपोर्ट में यहाँ तक बताया गया है कि कुछ मृतकों के परिजनों को तो पुलिस वालों ने लाश के साथ फ़ौरन गोरखपुर शहर ही छोड़ कर चले जाने के लिये मजबूर किया।

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सिर्फ इतना ही नहीं, पीयूष श्रीवास्तव की रिपोर्ट यह भी बताती है कि इस कांड के लिये योगी ने अस्पताल के जिस प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को निलंबित किया है, उसे 'लखनऊ से यह आदेश' मिला था कि वह आक्सीजन के सप्लायर के बिल का भुगतान न करे, क्योंकि उसने सरकार को घूस के रुपये नहीं पहुँचाये हैं।

इस रिपोर्ट में रोगियों के कई परिजनों के साक्ष्य भी दिये गये है।

Police raj cry at hospital

हमारा सवाल है कि क्या योगी के जरिये उत्तर प्रदेश में हिटलर के आश्विच की तरह के मृत्यु शिविरों में सेना, पुलिस और पूरी नौकरशाही को लगा कर सामूहिक हत्या की तरह का कोई प्रयोग चलाया जा रहा है ?

यह मासूमों की इरादतन हत्या है

कल हमने एक पोस्ट में योगी की प्रशासनिक योग्यता पर सवाल उठाए थे। 'टेलिग्राफ' की इस रिपोर्ट के बाद तो कहना पड़ता है कि जब कोई घोषित अपराधी सत्ता के शीर्ष पर पहुंच जाए तो वह क्या-क्या कर सकता है, गोरखपुर अस्पताल का यह संगठित सामूहिक हत्याकांड इसका एक ज्वलंत उदाहरण है।

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हमारी माँग है इस कांड में शामिल सभी लोगों पर, जिनमें लखनऊ से घूस के लिये आक्सीजन वाले का भुगतान रुकवाने वाले भी शामिल है, सामूहिक हत्या का मुक़दमा चलाया जाए। इलाहाबाद या लखनऊ में हाईकोर्ट को ख़ुद इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए तत्काल यह मुक़दमा शुरू करना चाहिए। सभी मित्रों से अनुरोध है कि वे इस माँग को सभी स्तर तक पहुँचाए।

हम यहाँ 'टेलिग्राफ़' की इस रिपोर्ट को साझा कर रहे हैं :

https://www.telegraphindia.com/1170813/jsp/frontpage/story_167051.jsp

(फेसबुक)

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