सियासत को लहू पीने की आदत है। वरना मुल्क में सब खैरियत है।।

बदला जंगल न्याय है। यह कब तक चलेगा। सरकारें और पूंजिपति मुल्क अपने हथियार बेचने के लिए आपको कब तक लड़ाएंगे। इसका अंत तो सोचना होगा। क्योंकि यह संघर्ष केवल सत्ता की पिपासा शांति का प्रयास है। ...

अतिथि लेखक

सियासत को लहू पीने की आदत है। वरना मुल्क में सब खैरियत है।। चुनाव से पहले पाकिस्तान के पेशावर में मासूम बच्चों की हत्या कर दी जाती है। इस हृदय विदारक घटना के बाद भारत में होने वाले आम चुनाव से पहले 40 सैनिक मार दिए जाते हैं। भारत और पाकिस्तान दोनों की जनता मासूम है। अलग सही। हम खून के रिश्ते वाले हैं। हमारे धर्म और देश बंटे हैं। रिश्ते पुराने हैं। हमारे बीच कुछ ऐसे लोग हैं। जो सत्ता और संसाधनों पर कब्जा चाहते हैं। बस उनकी यही चाहत हमारे बच्चों की मौत और दु:ख का कारण है। इनको पहचानिए। ताकि जनाजों पर रोक लगे। 

दुनिया की किसी तहजीब के लिए बेटे की लाश को कंधा देना आसान नहीं। इसलिए संभलिए। मां, इधर भी है। मां उधर भी है। भाई इधर भी है, भाई उधर भी है। सूखी पलकें इधर भी हैं, नम आंखें उधर भी है। ....

बदला जंगल न्याय है। यह कब तक चलेगा। सरकारें और पूंजिपति मुल्क अपने हथियार बेचने के लिए आपको कब तक लड़ाएंगे। इसका अंत तो सोचना होगा। क्योंकि यह संघर्ष केवल सत्ता की पिपासा शांति का प्रयास है। इससे न यहां के लोगों के मुस्तकबिल में बदलाव आएगा न वहां के।

(अरविन्द शुक्ला की एफबी टिप्पणी)

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