गुजरात में विकास सचमुच पागल हो गया है

गुजरात में विकास सचमुच पागल हो गया है। वर्ना विकास का नाम और ऐसे काम! ...

हाइलाइट्स

अचरज नहीं कि अपनी अतिरिक्त रूप से चमकाई गयी हिंदुत्ववादी छवि के साथ आदित्यनाथ ने गुुजरात में अपने भाषणों में राहुल गांधी को घेरने की कोशिश की तो, राहुल गांधी के गुजरात के अपने दौरे के क्रम में विभिन्न मंदिरों के दर्शन करने के मुद्दे पर। बाद में पड़ौसी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान ने भी हमले की इसी लाइन को जारी रखा। जाहिर है कि इस हमले का मकसद हिंदू होने के नाम पर ही गुजरातियों को भाजपा के पीछे और जाहिर है कि उसके विरोधियों के खिलाफ, लामबंद करना था। आने वाले दिनों में हम इस प्रक्रिया को और तेज होता ही देखेेंगे।

गुजरात में विकास सचमुच पागल हो गया है

गुजरात में पागल हुआ मोदी का विकास

राजेंद्र शर्मा

गुजरात में विकास सचमुच पागल हो गया है। वर्ना विकास का नाम और ऐसे काम! अगर मोदी जी के गुजरात में विकास के पागल होने में किसी को कोई शक-शुबहा रहा भी होगा, तो कम से कम अब, गुजरात की राजधानी, गांधीनगर में नरेंद्र मोदी की सोमवार, 16 अक्टूबर की बहुप्रचारित रैली के साथ दूर हो जाना चाहिए था। बेशक, अपनी पार्टी की 15 दिन की ‘ गुजरात गौरव यात्रा’ के समापन के मौके पर हुई रैली में, जिसे भाजपा कार्यकर्ताओं की सबसे विशाल रैली के रूप में प्रचारित किया जा रहा था, प्रधानमंत्री ने बार-बार अपने और अपनी पार्टी के ‘विकास’ का पक्षधर होने का दावा किया। यहां तक कि उन्होंने इसका एलान भी कर दिया कि गुजरात का आने वाला चुनाव, ‘विकासवाद बनाम वंशवाद’ के बीच होगा। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कोशिश कर के गुजरात के विकास की अपनी उपलब्धियों की याद दिलाने का भी उद्यम किया। लेकिन, इसके बावजूद वास्तव में वह न सिर्फ गुजरात के चुनाव को खुद अपने और राहुल गांधी के बीच एक द्विध्रुवीय, ‘व्यक्तित्वों का मुकाबला’ बनाने की प्रवृत्तियों को ही हवा देते नजर आए, जो प्रवृत्तियां 2014 के आम चुनाव में अभूतपूर्व ताकत के साथ उभरने के बाद से उत्तरोत्तर मजबूत से मजबूत ही होती गयी हैं, प्रधानमंत्री जोर-शोर से विकास के लाभों का कोई तर्क पेश करने के बजाए, गुजराती जनता को भावनाओं के ज्वार में बहाने की ही कसरत करते नजर आए।

गुजरात : विकासपर राहुल के सवाल, BJP नहीं ढूंढ पा रही जवाब कि विकास क्यों पागल हो गया है

इस रैली से अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार की आधिकारिक रूप से शुरूआत करते हुए नरेंद्र मोदी ने गुजरात के चुनाव के लिए भाजपा के प्रचार को मजबूती के साथ गुजराती गौरव, गुजराती अस्मिता आदि के नारों से बांधने का भी रास्ता बनाया दिया, जो विकास को एक रस्मी नारा मात्र बनाकर रख देने वाला है।

आ गए अच्छे दिन : भारत में भुखमरी के हालात हुए और बदतर, सौंवे पायदान पर लुढ़का

जाहिर है कि गुजराती गौरव की दुहाई को चलाने के लिए, नरेंद्र मोदी को ‘गुजरात दुश्मन’ की खोज थी, जो उन्होंने बड़ी आसानी से गढ़ लिया। अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी को तथा वास्तव में जवाहरलाल नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक गांधी-नेहरू परिवार को गुजरात और गुजराती-दुश्मन बनाकर पेश करने में उन्हें क्यों कोई संकोच होता? उन्होंने सरदार पटेल से लेकर मोरारजी देसाई तक तथा दूसरे भी कई नेताओं के साथ ‘अन्यायों’ की खासी लंबी झूठी-सच्ची सूची पेश की। उन्होंने सरदार सरोवर परियोजना से लेकर, राजस्थान से पानी तक के मामलों में गुजरातियों के साथ हुए अन्याय गिनाए। और इस सब को शीर्ष पर ले जाते हुए उन्होंने, खुद अपनी गिरफ्तारी के षडयंत्र रचे जाने का भी आरोप लगाया। अपने जोड़ीदार, अमित शाह ही गिरफ्तारी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने दावा किया कि शाह की गिरफ्तारी के पीछे वास्तव में असली निशाने पर तो नरेंद्र मोदी ही थे!

गुजरात में विकास सचमुच पागल हो गया है, उसे होश में लाने का समय आ चुका है

वैसे यह कार्यनीति तो नरेंद्र मोदी इससे पहले भी, 2002 के अल्पसंख्यक विरोधी नरसंहार की पृष्ठभूमि में हुए गुजरात के आम चुनाव में ‘शानदार’ कामयाबी के साथ आजमा चुके  थे और नरसंहार के कांग्रेस समेत सभी आलोचकों को ‘पांच करोड़ गुजरातियों’ का दुश्मन बनाकर खड़ा कर के, कथित गुजराती गौरव को वोटों में तब्दील कर के दिखा चुके थे। याद रहे कि यह ‘गुजराती गौरव’ जितना शेष गैर-गुजरातियों के विरुद्घ था उतना ही खुद गुजरातियों के एक हिस्से यानी मुसलमानों के और अघोषित रूप से दलितों व आदिवासियों के भी विरुद्घ था। यही वह चुनाव था जिसमें खुद नरेंद्र मोदी ने नरसंहार के बाद काम कर रहे अल्पसंख्यकों के शरणार्थी कैंपों को ‘बच्चे पैदा करने वाली फैक्टरियां’ बताया था और ‘हम पांच, हमारे पच्चीस’ का हामी करार देकर, मुसलमानों पर हमला किया था। यानी यह गुजराती हिंदू अस्मिता तथा गुजराती हिंदी गौरव का ही मामला था। इस हिंदुत्ववादी गुजराती गौरव के विभिन्न तत्वों का वैसे तो उसके बाद से लगातार ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। फिर भी, इस बार के चुनाव में 2002 की कार्यनीति के कुछ तत्व नहीं बल्कि पूरी कार्यनीति ही दुहरायी जा रही नजर आती है। हां! इस बार शायद प्रधानमंत्री मोदी खुद ‘हम पांच हमारे पच्चीस’ के खिलाफ हमले करते नजर नहीं आएं।

      बच्ची भात मांगते माँगते मर गयी ... और इस तरह सरकार जीत गई रघुवर-मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया उबला

लेकिन, इससे कोई यह न समझे कि इस बार गुजरात में भाजपा का चुनाव अभियान, विकास के प्रश्नों से दूर भले रहे, सांप्रदायिक दुहाई से भी दूर ही रहने वाला है और बिना किसी भेद के सभी गुजरातियों को लेकर चलने जा रहा है। नरेंद्र मोदी की भाजपा बखूबी जानती है कि वह गुजराती गौरव की अपनी झूठी दुहाई को, हिंदुत्व की खपच्चियों के सहारे ही खड़ा कर सकती है। अचरज की बात नहीं है कि खासतौर पर गुजरात में उसकी शुरूआत, नरेंद्र मोदी की इस चुनाव की पहली औपचारिक रैली से पहले ही हो चुकी थी, जब गुजरात में प्रचार के लिए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखपुर की गोरखनाथ पीठ के प्रमुख, योगी आदित्यनाथ को उतारा गया था। बेशक, आदित्यनाथ को इससे पहले केरल में भाजपा की जन रक्षा यात्रा में भी उतारा गया था। अनेक राजनीतिक प्रेक्षक आदित्यनाथ को एक बढ़ती हुई, राष्ट्रीय भूमिका सौंपे जाने के इस सिलसिले को, देश के पैमाने पर नरेंद्र मोदी के विकास के नारे की हवा निकल जाने के  बाद, अब सांप्रदायिक छवि तथा धु्रवीकरण के कार्ड का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किए जाने के इशारे के रूप में ही देखते हैं। आदित्यनाथ के मठ के प्रमुख के नाते पूजा-पाठ की अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने की ताजा तस्वीरों के सचेत व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही, आदित्यनाथ के बार-बार अयोध्या दौडऩे, उनकी अयोध्या में राम की विशाल प्रतिमा लगाने की परियोजना से लेकर, ‘देव दीवाली’ के लिए अयोध्या पहुंचने के योजना तक, सब कुछ आदित्यनाथ की हिंदुत्ववादी छवि को और चमकाने के लिए ही किया जा रहा है, ताकि उनकी छवि हिंदुत्ववादी दुहाई का और कारगर साधन बन सके।

      जब भाजपा देश की सबसे अमीर पार्टी बन रही थी तब संतोषी भात माँगते हुए भूख से मर गई

अचरज नहीं कि अपनी अतिरिक्त रूप से चमकाई गयी हिंदुत्ववादी छवि के साथ आदित्यनाथ ने गुुजरात में अपने भाषणों में राहुल गांधी को घेरने की कोशिश की तो, राहुल गांधी के गुजरात के अपने दौरे के क्रम में विभिन्न मंदिरों के दर्शन करने के मुद्दे पर। बाद में पड़ौसी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान ने भी हमले की इसी लाइन को जारी रखा। जाहिर है कि इस हमले का मकसद हिंदू होने के नाम पर ही गुजरातियों को भाजपा के पीछे और जाहिर है कि उसके विरोधियों के खिलाफ, लामबंद करना था। आने वाले दिनों में हम इस प्रक्रिया को और तेज होता ही देखेेंगे। हां! यह देखना दिलचस्प होगा कि खुद प्रधानमंत्री मोदी सीधे गुजराती गौरव के इस हिंदूकरण में भागीदारी करते हैं या चतुर श्रम विभाजन के तहत इसे आदित्यनाथों के ही भरोसे छोड़े रहते हैं। वैसे प्रधानमंत्री ने अपने विरोधियों तथा खासतौर पर कांग्रेस पर सांप्रदायिकता का सहारा लेने का आरोप लगाकर, इस यज्ञ में खुद अपने हाथों से समिधा डालने का भी एक इशारा तो कर ही दिया है। संघ-भाजपा की शब्दावली में यह आरोप वास्तव में, अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण का आरोप है, जो अल्पसंख्यकविरोधी गोलबंदी का उनका जाना-पहचाना हथियार है। याद रहे कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में प्रधानमंत्री इसी रास्ते से चलकर, ‘कब्रिस्तान बनाम श्मशान’ और ‘दीवाली बनाम रमजान’ की दुहाइयों तक पहुंंचे थे!

      बदतमीज़ हुआ पागल 'विकास',  भगवान राम को छलते समय भी इनकी रूह नहीं काँपती

बेशक, यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि इस रास्ते चलना भी भाजपा को गुजरात में लगातार पांचवी बार जीत दिला पाता है या नहीं। फिलहाल, इतना तय है कि 150 प्लस की सारी शेखीखोरी के बावजूद, नरेंद्र मोदी इस चुनाव में कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं, जबकि जोखिम बहुत वास्तविक है। मोदी राज के विकास के दावों की खुलती पोल और पहले नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी की जनता पर पड़ी मार से, मोदी का यह दुर्ग दरकता दीख रहा है। यहां वैसे भी मुख्यमंत्री के कुर्सी पर होते हुए भी, पूर्व-मुख्यमंत्री तथा वर्तमान प्रधानमंत्री की तस्वीर पर ही चुनाव लड़ा जा रहा है। इतना तय है कि इस चुनाव में बदहवास संघ-भाजपा अपना सांप्रदायिक चेहरा ज्यादा से ज्यादा चमकाएंगे। गुजरात में मोदी वाला विकास और ज्यादा पागल होगा।                                                                                     0

     

      

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।