पुलवामा आतंकी हमला : क्यों बख्श दें चौकीदार को..? जिम्मेदारी उनकी तो सवाल किससे ?

देश को चौकीदार के भेष में हिटलर मिल गया जिसे जनता पहचान नहीं पाई...

अतिथि लेखक

सवाल वाजिब भी हैं क्योंकि प्रबुद्ध वर्ग देश भक्ति (Patriotism) और अंधभक्ति (Blindfold) में फर्क जानता है। प्रधानमंत्री बनने से पहले किसी आतंकी घटना पर मोदी जी (Modi ji on terrorist incident) तत्कालीन सरकार पर उंगली उठाते थे, तो अब उन्हीं सवालों से भागते क्यों हैं ?

देश दुनिया के हर महत्वपूर्ण जगह जमीन फैक्ट्रियों संस्थानों घरों मकानों की सुरक्षा के लिए लोग चौकीदार रखते हैं।

चौकीदार पर लोग भरोसा करते हैं कि वह उस जगह की निगरानी सुरक्षा पूरे जी जान से करेगा, और चौकीदार भी अपनी जिम्मेदारी अपनी जान पर खेल कर निभाते रहे हैं। क्योंकि वह जानता है कि जिसकी  निगरानी वह कर रहा है अगर उसकी क्षति हुई तो उंगली उस पर ही उठेगी और जिम्मेदार भी उसे ही माना जायेगा।

क्योंकि चौकीदारी एक बड़ी जिम्मेदारी है।

आईये अब देश की चौकीदारी के बारे में जानें

नरेंद्र मोदी जब पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हुए तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार और तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की किसी भी मुद्दे पर खिंचाई करने से नहीं चूकते थे।

मुझे याद है वो दिन जब मोदी जी ने आतंकवाद पर मनमोहन सिंह पर तंज कसते हुए कहा था कि कमी बॉर्डर पर नहीं इस सरकार में है। पाकिस्तान भारत में आतंकी हमले कर रहा है तो दूसरी तरफ कांग्रेस की सरकार पाकिस्तान को प्रेमपत्र भेज रही है।

नरेंद्र मोदी ने यहां तक कहा था कि पाकिस्तान जिस भाषा में समझे उसे उस भाषा में जवाब देना चाहिए।

यही नहीं तब आतंकी हमले के बाद भाजपाइयों ने मनमोहन सिंह से इस्तीफा मांगते हुए उन्हें चूड़ियां भेजी थीं।

और एक रैली को संबोधित करते नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान हमारे जवानों का सर काट रहा है, हम सत्ता में आये तो एक जवान के बदले दस सर लाएंगे।

खैर इन सब बातों को कहे सुने पांच साल होने को हैं, नरेंद्र मोदी सत्ता में आ भी गए और इनके जाने का वक्त भी हो गया मने कार्यकाल खत्म होने वाला है। तब से कई बार बॉर्डर पर पाकिस्तान ने हेकड़ी दिखाई और तो और मोदी जी के ही कार्यकाल में उरी में आतंकी हमला हुआ जिसमें 18 जवान शहीद हुए, पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हम 7  जवान शहीद हो गए, अभी हम उन सब हमलों को भूल ही नहीं पाए थे कि तब से कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में अर्धसैनिक बल के 43 जवान शहीद हो गए।

इस घटना से पूरा देश आक्रोशित है, पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने की बातें हो रहीं हैं, होनी भी चाहिए, आखिर कब तक देश आतंकवाद को झेलेगा, कब तक सुरक्षाबल के जवान शहीद होते रहेंगे। जनआक्रोश तो लाजिमी है, मगर 2014 में एक के बदले दस सर लाने वाले और आतंकी हमले पर पूर्व मनमोहन सरकार को कोसने वाला 'देश का चौकीदार' मने मोदी जी अब मौन हैं।

खैर चौकीदार के लिए भले ही एक के बदले दस वाली बात सम्भव है जुमला हो मगर जनता इन्ही सब मुद्दों पर चौकीदार को देश की चौकीदारी सौंपी थी।

लिहाजा 'चौकीदार' पर देश का बुद्धिजीवी वर्ग सवाल खड़े करने लगा कि भई आप कर क्या रहे हो..? क्यूं बार-बार ऐसा हो रहा है..? कब एक के बदले दस सिर आएंगे..? यहां जवान शहीद हो गये औऱ आप उद्घाटन में लगे हो चुनाव प्रचार में लगे हो..?

भई उसके बाद तो चौकीदार के बचाव में आईटी सेल वाले और ट्रोलर सवाल करने वालों के खिलाफ गाली, कुतर्क आरोप की सुनामी ला दिये, कि यह वक्त नहीं है मोदी जी से सवाल करने का, आप पाकिस्तान समर्थक हो...आप राष्ट्रद्रोही हो...तो क्या पप्पू को ला दें।

आईटी सेल वाले यही नहीं रुके। राहुल गांधी की फोटो एडिट कर आत्मघाती हमलावर के साथ खड़े दिखा दिए।

और आईटीसेल वाले कुतर्की पोस्ट फारवर्ड करने लगे कि कि दुबई में राहुल जिस होटल में ठहरे थे, वहां पाकिस्तान कमांडर शुजा पाशा भी रुका था।

यहां तक कि अपने तार्किक सवालों से सरकार को घेरने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फोन नंबर सार्वजनिक कर उन्हें गरियाने को कहा गया, और ट्रोलरों ने रवीश को फोन और मैसेज से गरियाया भी।

देश के चौकीदार से सवाल पर अचानक गालियां कतई भौचक करने वाली नहीं थी। सूत्र बताते हैं कि वाराणसी के एक कार्यक्रम में अमित शाह ने सभी कार्यकर्ताओं से मोबाइल बन्द करवा के सम्बोधित करते हुए कहा था कि अगर कोई भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ लिखे तो उसके वाल पर ऐसा तर्क दो या लिखो लिखवाओ कि वह उस पोस्ट को हटाने को मजबूर हो जाये।

आईटीसेल वाले इस के सिद्धहस्त तो हैं ही मगर अमित शाह के इस गुरुमंत्र से उन्हें और बल मिला।

खैर आईटीसेल वाले अपना कार्य करें, मगर देश की करोड़ों जनता के जहन में एक सवाल बहुत तेजी से घर कर रहा है कि जब देश लोकतन्त्र स्थापित है और देश का शासक राजा नहीं है फिर जनता के सवालों से शासक क्यों भाग रहा है, क्यों राजतन्त्र की तरह जनता को सवाल करने के हक से राजा के ट्रोलर सिपाही रोक रहे हैं।

सवाल का उत्तर यह है कि देश को चौकीदार के भेष में हिटलर मिल गया जिसे जनता पहचान नहीं पाई अगर वक्त रहते हम नहीं सम्भले तो चौकीदार रूपी हिटलर हर सवाल करने वाले के मुँह पर टेप लगा दे तो आश्चर्य नहीं होगा।।

अमित मौर्य की कलम से

(लेखक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र “गूंज उठी रणभेरी” के संपादक हैं।)

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